CG Election 2023: क्या कांग्रेस को हैट्रिक बनाने से रोक पाएंगे भाजपा के आशाराम? जानें कांकेर सीट का समीकरण

CG Assembly Election 2023: बस्तर संभाग में सियायत अगर कहीं से शुरू होती है तो वो कांकेर विधानसभा है। दरअसल कांकेर जिला बस्तर संभाग का प्रवेशद्वार है और यहीं से बस्तर में प्रवेश किया जा सकता है।

ऐसे में बस्तर संभाग में सियायती हलचल भी सबसे पहले कांकेर से उठती है और ये पूरे बस्तर संभाग में फैलती है। इस नजरिए से कांकेर विधानसभा सीट बस्तर की सभी 12 सीटों में से अहम है। कांकेर विधानसभा में भी इस बार बदलाव की बयार बहती दिख रही है।

Kanker seat Chhattisgarh

मालूम हो कि कांग्रेस ने पूर्व विधायक शंकर धुर्वा को अपना प्रत्याशी बनाया है, जबकि भाजपा ने पूरी तरह से युवा और नए चेहरे आशाराम नेताम पर अपना दांव खेला है। युवा और शिक्षित होने के चलते आशाराम मतदाताओं की पसंद बनते चले जा रही हैं, जबकि कांग्रेस के शंकर धुर्वा को कांग्रेस के प्रति एंटी इंकम्बेंसी का सामना करना पड़ रहा है।

खबर है कि कांकेर विधानसभा के मतदाताओं ने अब कांग्रेस के प्रत्याशी सहित उनके नेताओं से मुखर होकर ये पूछना शुरू कर दिया है कि उनकी सरकार ने क्या किया है। चूंकि वर्तमान विधायक रहे शिशुपाल शोरी की लोकप्रियता काफी अच्छी थी और उन्होंने कांकेर से होकर गुजरने वाली उस सड़क का चौड़ीकरण करवा दिया, जिसके लिए लंबे समय से मांग उठती रही और लोग अपनी जमीन देने को भी तैयार नहीं थे।

कांकेर के राजनीतिक जानकार बताते हैं कि सड़क चौड़ीकरण के अलावा भी कई कार्य बतौर विधायक शिशुपाल ने करवाए। ऐसे में उम्मीद थी कि उन्हें दूसरी बार चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा, लेकिन कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि पार्टी में अहम स्थान रखने वाले सीएम के करीबी एक नेता के साथ उनकी आंतरिक कलह के कारण शिशुपाल की टिकट काटकर पूर्व विधायक शंकर धुर्वा को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है। इसे लेकर भी कांकेर के मतदाताओं में निराशा की स्थिति रही।

ऐसा माना जा रहा है कि कांकेर की सीट पर वर्तमान विधायक की टिकट काटने का खासा नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है। यही नहीं, मतदाताओं में भी शिशुपाल के नाम को लेकर ही चर्चा की जा रही थी और दोबारा मौका मिलने पर उन्हें जीत दिलवाने की जिम्मेदारी भी खुद मतदाताओं ने उठा रखी थी। ऐसे में सर्वे रिपोर्ट का हवाला देकर शिशुपाल की टिकट काट दी गई।

भाजपा के उम्मीदवार आशाराम नेताम के युवा और शिक्षित होने के साथ ही जागरूक माने जाते हैं। भाजपा ने प्रत्याशियों की पहली सूची जब जारी की, तब से ही वे लोगों से संपर्क बनाने में जुट गए और एक बड़ा क्षेत्र उन्होंने कवर भी किया। हालांकि कांकेर विधानसभा में जब कांग्रेस के नेताओं से मतदाता सवाल कर रहे हैं तो वे बगलें झांकते नजर आ रहे हैं। कुल मिलाकर कांकेर सीट पर कांग्रेस की आंतरिक कलह का फायदा भाजपा को होता दिख रहा है।

कांकेर के राजनीतिक जानकारों की मानें तो भाजपा के आशाराम और कांग्रेस के शंकर के बीच यूं तो कांटे की टक्कर मानी जा रही है, लेकिन जीत का अंतर काफी कम होने की संभावना भी उन्होंने जताई है। हालांकि भाजपा के पक्ष में कांकेर में माहौल दिख रहा है, लेकिन भाजपा या कांग्रेस, दोनों ही पार्टी में से किसी एक पार्टी का प्रत्याशी भी जीतता है तो जीत का अंतर काफी कम होगा, ऐसा अनुमान जानकार लगा रहे हैं।

मालूम हो कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद पहली बार 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के अघन सिंह ठाकुर ने कांग्रेस की श्यामा धुर्वा को 25 हजार से ज्यादा मतों से हराया था। इसके बाद 2008 में हुए चुनाव में भी भाजपा ने जीत का सिलसिला बरकरार रखा और सुमित्रा मारकोले ने कांग्रेस की डॉ. प्रीति नेताम को करीब 17 हजार वोटों से हराया।

साल 2013 में कांग्रेस के शंकर धुर्वा ने भाजपा के संजय कोड़ोपी को करीब 5 हजार वोटों से हराकर सीट अपने कब्जे में ले ली और बीते 2018 में हुए चुनाव में कांग्रेस के शिशुपाल शोरी ने भाजपा के हीरा मरकाम को करीब 20 हजार वोटों से पटखनी दी थी।

राज्य गठन के बाद भाजपा और कांग्रेस के दो-दो कार्यकालों के बाद अब फिर से बदलाव की बयार बहने लगी है। इन हालातों में भाजपा कांग्रेस के हाथ से सीट हथियाने में कामयाब होती है या फिर कांग्रेस प्रत्याशी इस सीट पर अपना कब्जा बनाए रखती है, ये मतदान के बाद 3 दिसंबर के बाद होने वाली मतगणना के बाद ही साफ हो पाएगा।

बहरहाल कांकेर सीट से भाजपा के उम्मीदवार आशाराम नेताम और कांग्रेस के प्रत्याशी शंकर धुर्वा के अलावा राष्ट्रीय जनसभा पार्टी से डायमंड नेताम, भारतीय शक्ति चेतना पार्टी से नमिता नेताम, आजाद जनता पार्टी से पार्वती तेता, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से हेमलाल मरकाम और अर्जुन सिंह आंचला, गोविंद कुमार दर्रो व जयप्रकाश सलाम निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में हैं।

संवाद सूत्र: ऋषि भटनागर, जगदलपुर/छत्तीसगढ़

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