छत्तीसगढ़ में भाजपा की भरपूर कोशिश के बाद भी भूपेश बघेल सरकार, वजह?
छत्तीसगढ़ में मतदान के बाद 3 दिसंबर को हर किसी को नतीजों का इंतजार है। नतीजों से पहले एग्जिट पोल के जो आंकड़े सामने आए हैं उसमे एक बार फिर से भूपेश बघेल सरकार की वापसी के कयास लगाए जा रहे हैं।
तकरीबन हर एग्जिट पोल में यहां कांग्रेस को जीत मिलती नजर आ रही है। बहरहाल देखने वाली बात यह है कि क्या 3 दिसंबर को नतीजे भी एग्जिट पोल की ही तरह आते हैं।

छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंकी है। चुनाव प्रचार में पार्टी के दिग्गज नेता मैदान में उतरे और प्रचार की कमान संभाली। लेकिन जिस तरह से एग्जिट पोल के अनुमान सामने आए हैं उसे देखकर लगता है कि यह मेहनत रंग नहीं लाई और एक बार फिर से भूपेश बघेल का लोगों पर जादू चल गया है।
प्रदेश में भूपेश बघेल की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह है उनका वोटर्स से सीधा संपर्क। प्रदेश में पार्टी की छवि सकारात्मक है और इसे किसान समर्थक के तौर पर लोग देख रहे हैं। जिस तरह से धान की खरीद के दौरान पेमेंट को बढ़ाने का फैसला लिया गया उसने किसानों की काफी मदद की है।
चुनाव नतीजों से पहले कांग्रेस ने दावा किया है कि वह प्रदेश में 90 में से 75 सीटों पर जीत दर्ज करेग। हालांकि चुनाव विश्लेषकों का कहना है कि ऐसा होत नजर नहीं आ रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि पार्टी का माहौल 2018 जैसा नही है। लेकिन निसंदेह पार्टी की स्थिति प्रदेश में मजबूत नजर आ रही है।
भूपेश बघेल सरकार ने कई ऐसी योजनाएं चलाईं जो काफी लोकप्रिय हुईं और माना जा रहा है कि इन योजनाओं के दम पर भूपेश बघेल सरकार एक बार फिर से प्रदेश में वापसी कर सकती है। इसमे मुख्य रूप से रूरल इंडस्ट्रियल पार्क यानि रीपा योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, बिजली बिल हाफ योजना, मुख्यमंत्री सुपोषण योजना अहम है।
प्रदेश में कांग्रेस के मजबूत नजर आने की एक बड़ी वजह यह है कि भारतीय जनता पार्टी इस बार चुनावी मैदान में बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के उतरी। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह को पार्टी ने मुख्यमंतरी का चेहरा नहीं बनाया है।












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