छत्तीसगढ़ में 28 जुलाई को मनाया जायेगा हरेली तिहार, शुरू होगी गौठानों में गौ-मूत्र की खरीदी
छत्तीसगढ़ में आगामी 28 जुलाई को ‘‘हरेली-तिहार'' मनाया जायेगा। राज्य सरकार ने इस परम्परागत त्यौहार को सभी सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में विशेष रूप से मनाने निर्देश जारी किये हैं ।
रायपुर, 18 जुलाई। छत्तीसगढ़ में आगामी 28 जुलाई को ''हरेली-तिहार'' मनाया जायेगा। राज्य सरकार ने इस परम्परागत त्यौहार को सभी सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में विशेष रूप से मनाने निर्देश जारी किये हैं । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा प्रदेश में हरेली त्यौहार को परंपरागत रूप से मनाए जाने के संबंध में सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. एस. भारतीदासन ने सभी कलेक्टरों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गौरतलब है कि 7 जुलाई को हुई भूपेश कैबिनेट की बैठक में हरेली पर्व को राज्य में परंपरागत ढंग से मनाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के सभी स्कूलों में हरेली पर्व के मौके पर विद्यार्थियों के मध्य गेड़ी नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन करने के निर्देश दिए थे।
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इसके अलावा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर राज्य के गौठानों में 28 जुलाई हरेली तिहार से गौ-मूत्र की खरीदी की शुरूआत होगी। प्रथम चरण में प्रत्येक जिले के दो चयनित स्वावलंबी गौठानों में गौ-मूत्र की खरीदी की जाएगी। कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य में गौ-मूत्र क्रय के लिए न्यूनतम राशि 4 रूपए प्रति लीटर प्रस्तावित की गई है। क्रय गौ-मूत्र से महिला स्व-सहायता समूह की मदद से जीवामृत एवं कीट नियंत्रक उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. एस. भारतीदासन की ओर से जारी निर्देश के तहत सभी प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाई स्कूल तथा हायर सेकेण्डरी स्कूलों, आश्रम शालाओं और छात्रावासों आदि में स्थानीय जनप्रतिनिधि, शाला प्रबंधन समिति, स्थानीय कला और संगीत मंडलियों की सहायता से हरेली त्यौहार का विशेष आयोजन होगा। विद्यार्थियों के बीच गेड़ी नृत्य प्रतियोगिता' होगी। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को खास तौर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले प्रगतिशीलकिसानों के हाथों पुरस्कृत कर प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया जाएगा।
इस सम्बन्ध में स्कूल शिक्षा सचिव द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधताओं और गौरवशाली परंपराओं को संरक्षित और संवर्धित करने की दिशा में प्रदेश शासन निरंतर प्रयासरत है। इसी श्रृंखला में विगत सालों से राज्य की कृषि संस्कृति के प्रमुख त्यौहार 'हरेली' को प्रमुखता के साथ पूरे प्रदेश में मनाया जा रहा है। 'हरेली त्यौहार' को उत्साह से मनाने और इसमें लोगों की अधिक से ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शासकीय अवकाश भी घोषित किया गया है।ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से मिट्टी की उर्वरा शक्ति को पुनर्जीवित करने के मकसद से अक्षय तृतीया 3 मई 2022 से माटी पूजन महाअभियान की शुरूआत भी की गई थी। स्कूलों में किचन गार्डन विकसित करने के लिए संचालक लोक शिक्षण संचालनालय की तरफ से पूर्व में ही विस्तृत निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को हरेली के दिन जिला स्तर और विकासखण्ड मुख्यालयों में कृषि व वन विभाग के सहयोग से 'पर्यावरण संरक्षण और हरेली की महत्ता' पर आधारित संगोष्ठी का आयोजन करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस अवसर पर कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले उन्नत कृषकों, प्रयोगधर्मी कृषकों को विशेष तौर पर सम्मानित किया जाएगा। जारी निर्देश में यह भी बताया गया गया है कि प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा द्वारा विद्यालयों में स्थानीय संसाधन से कुदरती बाउण्ड्रीवाल तैयार किए जाने के निर्देश दिए गए थे। इसी कड़ी में हरेली के दिन ऐसे विद्यालय जहां बाउण्ड्रीवाल नहीं है, उन विद्यालयों की चौहद्दी के किनारे प्राकृतिक बाउण्ड्रीवाल बनाने के लिए वृक्षारोपण करने का विशेष अभियान भी संचालित किया जाए। इसके अलावा विद्यालय परिसर में फलदार-छायादार पौधे भी लगाने और उसकी सुरक्षा के साथ देख-भाल के लिए गोद लेने की व्यवस्था भी तय की जाए।
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