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बेटी को शादी में सोना नहीं,सांप देना है जरूरी ! छत्तीसगढ़ में निभाई जाती है अनोखी परम्परा

Daughter should not sleep in marriage, it is necessary to give snake! Unique tradition is played in Chhattisgarh

रायपुर, 23 मार्च। दुल्हन जब लक्ष्मी के रूप में अपने नए घर में प्रवेश करती है, तब उसके पास मायके से तोहफे में मिले सोने चांदी के आभूषण होते हैं। भारत में बेटी को उसकी शादी में दहेज के तौर पर महंगे तोहफे देने का चलन तो बरसों से है, लेकिन छत्तीसगढ़ में कुछ ऐसे स्थान हैं, जहां पिता बेटी को सोना नहीं, बल्कि जहरीले सांप देकर उसके सुसराल भेजता है।

जहरीले सांप ही होते है जीवन यापन का जरिया

जहरीले सांप ही होते है जीवन यापन का जरिया

भारत में अलग-अलग समुदायों में शादियों के दौरान कई प्रकार कि रस्मे निभाई जाती हैं और सभी में दहेज के तौर पर बेटी को महंगे तोहफे देने का चलन दिखाई देता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में कई ऐसे गांव हैं, जहां परिवार के लोग बेटी को दहेज में जहरीले सांप देकर विदा करते हैं। दरअसल छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों में जहां भी सपेरों की बस्ती है, वहां सपेरों की परम्परा के मुताबिक लड़की को शादी में तोहफे के रूप में सांप देने का चलन है। दरअसल आदिकाल से सपेरों का काम सांप पकड़ना ही रहा है, यही उनके जीवन यापन का जरिया है। इसलिए जब किसी घर में शादी तय होती है, तब लड़की पक्ष के लोग सांप पकड़ने में व्यस्त हो जाते हैं, ताकि उसका होने वाला दामाद इन्ही सांपों की मदद से उसकी बेटी और परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी कर सके।

सांप को मानते है परिवार का सदस्य

सांप को मानते है परिवार का सदस्य

सपेरों के घर में जहरीले सांप परिवार के सदस्य की तरह ही रहते हैं। बच्चे बचपन से ही सांपों के बीच खेलकर बड़े होते हैं, इसलिए उनके मन में इस जहरीले जीव के प्रति कोई खौफ नहीं होता। सपेरों का पाला हुआ कोई सांप अगर मर जाता है, तो परिवार के सदस्य उसके शोक में मुंडन भी करवाते हैं और मृत सांप के सम्मान में मृत्यु भोज भी आयोजित करते हैं। सपेरों की बस्ती में हर घर में जहरीले सांप देखने को मिल जाते हैं। सांप बड़ों के लिए कमाई में मदद करने वाला साथी, तो बच्चे के लिए दोस्त से कम नहीं होता। सपेरों के परिवार में बच्चों की परवरिश के दौरान उन्हें सांपों को पकड़ना और उनसे दोस्ती करना सिखाया जाता है।

छत्तीसगढ़ के कई गांवों में निभाई जाती है परम्परा

छत्तीसगढ़ के कई गांवों में निभाई जाती है परम्परा

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में भीखमपुरा गांव, कोरबा के सोहागपुर गांव, महासमुंद जिले में तुमगांव, कवर्धा के बांधाटोला गांव और बिलासपुर के लालपुर समेत कई ऐसे स्थान हैं, जहां बरसों से एक सपेरों की बस्ती है। ऐसे गांवों में शादियों में लड़की का पिता दहेज में कम से कम 12 और अधिकतम 21 सांप देता ही है। इन्ही सांपों के आशीर्वाद से दूल्हा-दुल्हन अपने नए जीवन की शुरुवात करते हैं। शादी के मंडप में सबसे पहले सांप लाया जाता है, उसके बाद ही अन्य रस्में पूरी की जाती हैं। मिली जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश में भी गौरिया समुदाय के लोगों की तरफ से ऐसी परम्परा निभाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि अगर शादी में बेटी को सांप नहीं दिए गए, तो आगे चलकर शादी टूट जाती है।

पिता सांप नहीं पकड़ सका तो बेटी रह जाती है कुंवारी

पिता सांप नहीं पकड़ सका तो बेटी रह जाती है कुंवारी

वैसे तो छत्तीसगढ़ में अनेक जनजातियां रहती हैं, लेकिन सभी किसी ना किसी रूप से कृषि के व्यवसाय से जुड़ चुकी हैं। सपेरों की विभिन्न जातियां आज भी सांपों को अपने जीवन का हिस्सा मानकर अपनी परम्परा को निभा रहे हैं और नागपंचमी समेत कई अन्य त्योहारों में लोगों को सांप दिखाकर अपने बच्चों का पेट पाल रहे हैं। इसी कारण से शादी में सांप देने की परम्परा बनाई गई थी। यदि कोई सपेरा अपनी बेटी को शादी में सांप देने में सक्षम नहीं होता, तो उसकी बेटी कुंवारी ही रह जाती है। अगर इन लोगों पर सरकार विशेष ध्यान दे, तो परम्परा के साथ ही सांपों की प्रजाति को भी बचाने का प्रयास किया जा सकता है।

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