CG Election 2023: कोंटा सीट पर कांग्रेस का वर्चस्व, 20 साल से BJP की एंट्री नहीं, क्या भाकपा बिगाड़ेगी खेल?
CG Election 2023: विधानसभा चुनाव के पहले चरण में बस्तर की सभी 12 सीटों समेत 20 सीटों पर पहले चरण में 7 नवंबर को मतदान होंगे। कोंटा विधानसभा बस्तर की हाइप्रोफाइल सीटों में शुमार है।
इसके पीछे का कारण ये है कि इस सीट से प्रदेश के आबकारी मंत्री रहे कवासी लखमा छठवीं बार विधायक बनने चुनावी मैदान में मौजूद हैं। वहीं भाकपा के उम्मीदवार मनीष कुंजाम भी चुनाव लड़ रहे हैं। इधर भाजपा ने सोयम मुका को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है।

कोंटा विधानसभा सीट से आबकारी मंत्री लखमा अजेय विधायक माने जाते हैं। दरअसल वे लगातार 5 बार क्षेत्र के विधायक रहे और छठवीं बार वे चुनाव लड़ रहे हैं। इधर भाजपा ने सलवा जुडुम नेता सोयम मुका पर दांव लगाया है। वहीं भाकपा से मनीष कुंजाम भी इसी सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इन हालातों में कोंटा विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार देखने को मिल रहे हैं।
दरअसल कांग्रेस से लखमा और भाजपा से मुका, दोनों के पास पार्टी का चुनाव चिन्ह है, लेकिन इस बार भाकपा के उम्मीदवार मनीष कुंजाम के पास पार्टी का चुनाव चिन्ह नहीं है। वे निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। बताया जाता है कि तकनीकी कारणों से उन्हें पार्टी का चुनाव चिन्ह नहीं मिल पाया। ऐसे में वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में वोट मांग रहे हैं।
आबकारी मंत्री व क्षेत्रीय विधायक के रूप में कवासी लखमा के बाद भाकपा के मनीष कुंजाम क्षेत्र की राजनीति में बड़ा नाम हैं। लखमा जहां छठवीं बार चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं कुंजाम भी छठवीं बार चुनाव लड़ रहे हैं। वे दो बार क्षेत्र के विधायक भी रहे हैं। चूंकि 5 बार के विधायक लखमा भी इस चुनावी लड़ाई में उतरे हुए हैं, ऐसे में त्रिकोणीय मुकाबले के बीच लखमा अजेय होंगे या नहीं, इसे देखने के लिए पूरे प्रदेश की नजरें कोंटा विधानसभा सीट पर लगी हुई है।
पिछले चुनावों को देखें तो साल 2003 में कांग्रेस के कवासी लखमा का सीधा मुकाबला भाकपा के मनीष कुंजाम के साथ रहा और कुंजाम दूसरे नंबर पर रहे, जबकि भाजपा के तत्कालीन प्रत्याशी रहे बुधराम सोड़ी तीसरे नंबर पर रहे। वहीं 2008 में लखमा और भाजपा के पदाम नंदा के बीच मुकाबला रहा। इस साल भाकपा की टिकट से रामा सोड़ी चुनावी मैदान में रहे। साल 2013 में कांग्रेस के लखमा और भाजपा के धनीराम बारसे के साथ ही भाकपा के कुंजाम के बीच भी त्रिकोणीय मुकाबला रहा। यही स्थिति साल 2018 में हुए चुनाव में भी देखने को मिली, जहां लखमा, बारसे और कुंजाम के बीच भी त्रिकोणीय लड़ाई हुई।
कोंटा सीट पर जिस तरह से कांग्रेस का विधायक काबिज होता रहा है, इस बार भी कांग्रेस अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। इधर भाजपा के सोयम मुका की स्थिति भी अच्छी बताई जा रही है। भाकपा के कुंजाम के पास पार्टी के परंपरागत वोटर्स हैं, लेकिन चुनावी दौड़ में उनके भी आगे निकलने की संभावना बढ़ गई है। चूंकि मुका सलवा जुडुम अभियान से जुड़े रहे, ऐसे में गांवों में उनकी अच्छी पकड़ है। इन हालातों में कोंटा विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक जानकार बताते हैं कि लखमा की कुर्सी अब डांवाडोल होती नजर आ रही है।
चूंकि मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं। ऐसे में छठवीं बार चुनाव लड़ रहे मंत्री लखमा कुछ क्षेत्रों में कमजोर दिखते नजर आ रहे हैं। वहीं बीते महीनों हुई घटनाओं को देखा जाए तो कुंजाम सभी में आगे रहे और फर्जी मुठभेड़ों का आरोप लगाते हुए सरकार के खिलाफ मुखरता से अपनी आवाज उठाई। उनकी कई पदयात्राओं को भी रोकने का प्रयास किया गया। इस बीच वे ग्रामीणों के संपर्क में बने रहे।
मालूम हो कि इस बार कोंटा विधानसभा से सबसे ज्यादा 8 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। अब तक जहां 3 से 4 प्रत्याशी ही चुनाव लड़ते थे, लेकिन इस बार संख्या दोगुनी हो गई है। कांग्रेस से लखमा, भाजपा से मुका और भाकपा से कुंजाम के अलावा विधायक बनने की दौड़ में इस बार छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जोगी से देवेंद्र तेलाम, बहुजन समाज पार्टी से मड़कामी मासा, सर्व आदि दल से चन्नाराम मरकाम, आजाद जनता पार्टी से जगदीश नाग और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में बीदा सोड़ी भी चुनावी दंगल में कूद पड़े हैं।












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