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सीएम भूपेश के पिता ने लिखा राष्ट्रपति को पत्र, कहा - बैलेट पेपर से कराएं चुनाव, नहीं तो चाहिए "इच्छामृत्यु"

रायपुर,12 जनवरी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल एक बार फिर सुर्खियों मे हैं। अपने विवादित बयानों की वजह से हमेशा चर्चाओं में बने रहने वाले नंदकुमार बघेल ने इस बार राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की मांग की है। बघेल ने राष्ट्रपति से मांग की है कि देश मे ईवीएम मशीन की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराना चाहिए। अगर ऐसा नही होता है, तब उन्हे इच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान की जाए।

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    राष्ट्रपति को लिखा ,ईवीएम से मतदान कर रहा है मेरे संवैधानिक अधिकार का हनन

    राष्ट्रपति को लिखा ,ईवीएम से मतदान कर रहा है मेरे संवैधानिक अधिकार का हनन

    नंद कुमार बघेल ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है कि 'आपको अत्यन्त दुःख के साथ अवगत कराना पड़ रहा है कि देश के नागरिकों के समस्त संवैधानिक अधिकारों का व्यापक स्तर पर हनन हो रहा है। लोकतंत्र के तीनों स्तम्भ विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका ध्वस्त होती जा रही है। मीडिया भी लोकतंत्र के तीनों स्तम्भों के इशारे पर काम कर रही है। देश के नागरिकों के अधिकारों के संबंध में कोई सुनने वाला नहीं है। जिन जनप्रतिनिधियों को मतदाता अपनी हर समस्या के लिए चुनते हैं, उनकी आवाज भी लगातार दबती जा रही है।

    विधायिका देश के सभी सरकारी विभागों व उपक्रमों को अपने चहेते लोगों को बेच रही है। कार्यपालिका भ्रष्टाचार में संलिप्त होकर अपने आने वाली संतानों के लिए अधिक से अधिक धन इकट्ठा कर उनका भविष्य सुरक्षित करने में लगी है। नंदकुमार बघेल ने पत्र में यह भी लिखा है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 700 से ज्यादा किसानों की गलत नीतियों की वजह से मृत्यु या हत्या हुई है। यह समझना होगा। इसकी जिम्मेदारी किसके उपर रखी जायेगी। लोकतंत्र के सबसे बड़े अधिकार मतदान के अधिकार को ईवीएम मशीन से कराया जा रहा है।

    ईवीएम मशीन को किसी राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त संस्था या सरकार ने 100 प्रतिशत शुद्धता से काम करने का प्रमाण पत्र नहीं दिया है। किसी भी मशीन को उपयोग में लाने से पहले मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्था या सरकार की ओर से मशीन का शुद्धता से काम करने का प्रमाण पत्र प्राप्त करना जरूरी है। फिर भी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में ईवीएम मशीन से मतदान कराकर मेरे वोट के उस संवैधानिक अधिकार का हनन किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में यह भी लिखा है कि, अगर बैलेट पेपर से मतदान संभव नहीं है, तो उन्हें राष्ट्रपति की तरह से इस साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर इच्छामृत्यु की अनुमति देनी चाहिए।

    नंदकुमार बघेल का विवादों से रहा है पुराना नाता ,जा चुके हैं कई बार जेल

    नंदकुमार बघेल का विवादों से रहा है पुराना नाता ,जा चुके हैं कई बार जेल

    हाल ही में नंदकुमार बघेल अपने आपत्तिजनक बयान की वजह से जेल से लौटे हैं।दरअसल कुछ समय पहले ही उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित हुए एक कार्यक्रम में उन्होंने ब्राम्हण समुदाय पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वह ब्राह्मणों के खिलाफ आन्दोलन चलाकर उन्हें गंगा से वोल्गा भेजेंगे। बघेल का कहना था कि ब्राम्हण विदेशी हैं, जिस तरह अंग्रेज भारत आए और चले गए, उसी तरह वह भी गंगा से वोल्गा जाने के लिए तैयार रहें।

    बघेल के इस बयान के बाद पूरे देश में ब्राह्मणों ने नंदुकमार बघेल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए। नंदकुमार बघेल पर उनके भड़काऊ बयान के लिए एफआईआर दर्ज की गई, उन्हें जेल जाना पड़ा था।

    पिता से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के वैचारिक मतभेद

    पिता से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के वैचारिक मतभेद

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल की उम्र 86 साल स्वतंत्र रूप से मतदाता जागृति मंच नाम की संस्था चलाते हैं। वह भूपेश सरकार के मंत्रीमंडल में शामिल सामान्य वर्ग के मंत्रियों के खिलाफ भी जातिगत आधार पर खुलकर टिप्पणी करते रहे हैं। हालंकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कई बार कह चुके हैं कि उनकी अपने पिता से कई मामलों में नही बनती है और उनके बीच वैचारिक मतभेद हैं।

    अजीत जोगी ने लगवाया था किताब पर प्रतिबंध

    अजीत जोगी ने लगवाया था किताब पर प्रतिबंध

    साल 2001 में अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे। उस समय भूपेश बघेल उनकी सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। नंदकुमार बघेल की एक किताब जिसका शीर्षक था "ब्राम्हण कुमार रावण को मत मारो" नाम से एक किताब प्रकाशित हुई थी। तब बतौर मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने इस किताब पर बैन लगवा दिया था। उस दौरान भी नंदकुमार बघेल को जेल भी हुई थी। लेकिन वैचारिक मतभेदों की वजह से तत्कालीन कैबिनेट मंत्री भूपेश बघेल ने भी अपने पिता को छुड़वाने के लिए किसी तरह के राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल नहीं किया था। नंदकुमार बघेल की यह किताब अभी भी प्रतिबन्धित है।

    यह भी पढ़ें डॉ. रमन की सीएम भूपेश बघेल को चुनौती,5 लाख नौकरियों का दें प्रमाण ,नहीं तो दें इस्तीफा !

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