छत्तीसगढ़: हसदेव अरण्य के मुद्दे पर आदिवासियों के साथ खड़े हैं राहुल गांधी, जल्द ही हो जायेगा समाधान
रायपुर, 25 मई। छत्तीसगढ़ के सरगुजा में कोयला खनन करने लिए हसदेव अरण्य के जंगलो की कटाई का पूरी दुनिया में विरोध हो रहा है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है, इसलिए सीएम भूपेश बघेल के बाद अब सवाल पार्टी की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से होने लगे हैं।
राहुल गांधी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है,जिसमे वह लंदन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में हसदेव अरण्य पर एक छात्रा की तरफ से सवाल का जवाब देते नजर आ रहे हैं।

हसदेव के मुद्दे पर आदिवासियों के साथ खड़े हुए है राहुल
हाल में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी लंदन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी गए थे, जहां उनसे एक छात्रा ने हसदेव अरण्य को बचाने के लिए आदिवसियो के आंदोलन पर उनकी राय जाननी चाही ,जिसपर राहुल गांधी ने कहा कि यह विषय उनके संज्ञान में है,इसपर वह पार्टी के भीतर बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह आदिवासियों की मांगो से सहमत हैं। कुछ ही सप्ताह में कांग्रेस पार्टी हसदेव के मुद्दे पर समाधान कर देगी। आदिवासी छत्तीसगढ़ की कांग्रेस की सरकार के खिलाफ ही हसदेव अरण्य बचाओ आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि कुछ सप्ताह में राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद सारा मामला सुलझा लिया जायेगा। बहरहाल राहुल गांधी के इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

सरकार से क्यों नाराज है हसदेव अरण्य के बाशिंदे ?
छत्तीसगढ़ के कोरबा, सरगुजा और सूरजपुर जिले में हसदेव अरण्य जिले का जंगल फैला हुआ है, यह जंगल मध्यप्रदेश के कान्हा , झारखंड के पलामू के जंगलो जुड़ा हुआ मध्य भारत का सबसे हरा भरा खूबसूरत वनक्षेत्र है। यहां बहने वाली हसदेव नदी कोयला खदान भी के कैचमेंट एरिया में आती है। हसदेव के जंगलों में हाथी समेत करीब 25 प्रजातियों के वन्य प्राणी रहते हैं।
2010 में भारत सरकार के वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हसदेव अरण्य में खनन प्रतिबंधित इलाका मानते हुए इसे नो-गो एरिया घोषित किया था, लेकिन बाद में वन सलाहकार समिति ने अपने ही नियम के विरूद्ध जाकर यहां परसा ईस्ट और केते बासेन कोयला परियोजना को वन मंजूरी दे दी थी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस समिति की स्वीकृति को निरस्त भी कर दिया था। हसदेव बचाने विरोध कर रहे स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि राज्य सरकार ने फर्जी ग्राम सभा आयोजित करके ग्रामीणों की सहमति के बिना कोयला खनन की मंजूरी का प्रस्ताव पास किया था।

छत्तीसगढ़ सरकार ने दी है खनन की अनुमति
केंद्र सरकार ने राजस्थान सरकार को हसदेव अरण्य क्षेत्र के परसा कोल ब्लॉक आबंटित की है। इसके लिए राजस्थान सरकार ने अडानी समूह के साथ एमडीओ भी साइन किया है। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने मोदी सरकार की तरफ से अनुमति प्रदान किए जाने के बाद इस प्रोजेक्ट को वन स्वीकृति प्रदान नहीं की थी,लेकिन हाल ही में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के छत्तीसगढ़ दौरे के बाद सीएम भूपेश बघेल ने परसा कोल ब्लॉक में कोयला खनन के लिए हरी झंडी दे दी थी।

क्या कर सकते हैं राहुल गांधी?
छत्तीसगढ़ बचाओ अभियान के संयोजक अलोक शुक्ला हसदेव अरण्य के मुद्दे पर हसदेव अरण्य के आदिवासियों के साथ राहुल गांधी से दिल्ली में पहले ही मुलाकात कर चुके हैं। यानि यह बात शुरू से साफ़ है कि मामला राहुल गांधी के संज्ञान में है ,लेकिन पार्टीगत मजबूरियों के चलते वह अब तक खामोश रहे हैं। लंदन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में राहुल गांधी ने जो बयान दिया है,उसके कई मायने तलाशे जा सकते हैं।
पहला या तो भूपेश सरकार कोयला खनन पर अपनी मंजूरी वापस ले लेगी,दूसरा छत्तीसगढ़ सरकार में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर फैसला लिया जा सकता है, तीसरा सारे मामले को ठंडे बस्ते में डालकर छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के हितों के लिए पेसा कानून को मजबूत करके सरकार कोई नया रास्ता निकालेगी। बहरहाल जो फैसला भी होगा, अगले कुछ सप्ताह के भीतर हो जायेगा।












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