Bihar News: विकास के नए मानक गढ़ रहा बिहार, मानव विकास और गरीबी उन्मूलन में बना अग्रणी राज्य

2006 और 2024 के बीच बिहार ने मानव विकास, गरीबी में कमी, स्वास्थ्य, पोषण और एसडीजी में मजबूत प्रगति दिखाई है, जिसमें एचडीआई 0.485 से बढ़कर 0.614 हो गया है और बहुआयामी गरीबी 51.89 प्रतिशत से घटकर 33.76 प्रतिशत हो गई है, जो एक टिकाऊ विकास पथ का संकेत देता है।

बिहार ने पिछले दो दशकों में सामाजिक और आर्थिक विकास के लगभग सभी प्रमुख मानकों पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज करते हुए देश के सामने एक सकारात्मक विकास मॉडल प्रस्तुत किया है। मानव विकास, गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और बुनियादी सेवाओं के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियां यह संकेत देती हैं कि बिहार सतत और समावेशी विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

Bihar Development Progress: HDI Gains

मानव विकास सूचकांक (HDI) के अनुसार वर्ष 2006 से 2023 के बीच बिहार का एचडीआई 0.485 से बढ़कर 0.614 तक पहुंच गया है। यह करीब 27 प्रतिशत की वृद्धि है, जो राष्ट्रीय औसत वृद्धि से अधिक मानी जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर इसी अवधि में लगभग 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में बिहार ने देश में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के अनुसार वर्ष 2015-16 से 2019-21 के बीच बिहार में बहुआयामी गरीबी 51.89 प्रतिशत से घटकर 33.76 प्रतिशत रह गई। इस दौरान राज्य में 18.13 प्रतिशत अंकों की कमी दर्ज की गई, जो देश में सर्वाधिक है। राष्ट्रीय स्तर पर इसी अवधि में गरीबी में 9.89 प्रतिशत अंकों की कमी दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास, स्वच्छता और बुनियादी सेवाओं के विस्तार के लिए किए गए निरंतर निवेश और योजनाओं का परिणाम है।

राज्य की आर्थिक स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। वर्ष 2004 में बिहार की प्रति व्यक्ति आय 5,780 रुपये थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 76,490 रुपये तक पहुंच गई है। यह लगभग 13 गुना वृद्धि है। इस दौरान बिहार ने करीब 13 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर दर्ज की, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक मानी जा रही है।

विकास व्यय में लगातार वृद्धि से सामाजिक क्षेत्र में बेहतर परिणाम सामने आए हैं। बिहार का प्रति व्यक्ति विकास व्यय वर्ष 2005-06 में 1,463 रुपये था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 13,279 रुपये हो गया। इसी अवधि में स्वास्थ्य क्षेत्र पर व्यय में 14.8 गुना और शिक्षा क्षेत्र पर खर्च में 13.2 गुना वृद्धि दर्ज की गई।

स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी बिहार ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। संस्थागत प्रसव का प्रतिशत वर्ष 2005-06 के 19.9 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 81.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 64.2 वर्ष से बढ़कर 69.5 वर्ष हो गई है।

पोषण संबंधी आंकड़ों में भी बिहार का प्रदर्शन बेहतर रहा है। बच्चों में ठिगनापन (Stunting) 20 प्रतिशत अंक, कम वजन (Underweight) 20.2 प्रतिशत अंक और क्षीणता (Wasting) 8.1 प्रतिशत अंक कम हुई है, जो राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज सुधार से अधिक है।

रोजगार के क्षेत्र में भी राज्य का प्रदर्शन सकारात्मक रहा है। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2024 के अनुसार बिहार की बेरोजगारी दर 3 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 3.2 प्रतिशत से कम है।

सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में भी बिहार ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2023-24 में स्वच्छ जल एवं स्वच्छता (SDG-6) के क्षेत्र में बिहार 98 अंकों के साथ देश में तीसरे स्थान पर रहा। वहीं अच्छे स्वास्थ्य एवं कल्याण (SDG-3) में राज्य का स्कोर 2018-19 के 44 से बढ़कर 2023-24 में 67 तक पहुंच गया, जिससे बिहार ‘Aspirant’ श्रेणी से निकलकर ‘Front Runner’ श्रेणी में शामिल हो गया।

राज्य का समग्र एसडीजी स्कोर भी 48 से बढ़कर 57 हो गया है, जिससे बिहार अब ‘Performer’ श्रेणी में शामिल हो चुका है। इन उपलब्धियों से स्पष्ट है कि बिहार ने सामाजिक और आर्थिक दोनों क्षेत्रों में तेज गति से प्रगति की है। मानव विकास, गरीबी में कमी, स्वास्थ्य एवं पोषण सुधार, रोजगार और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में राज्य की उपलब्धियां विकसित बिहार के संकल्प को मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+