US Iran Deal: खत्म होगा अमेरिका-ईरान युद्ध? 14 शर्तों पर बनी बात! किसने कराई डील और किसे देने होंगे $300 अरब?
US Iran Deal: पूरी दुनिया के लिए एक राहत भरी खबर आई है। आप चाहें तो इस खबर को पढ़ने के बाद गहरी सांस भी ले सकते हैं। दरअसल पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव और युद्ध के बीच एक बड़ी कूटनीतिक बढ़त देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध खत्म होने के दावों के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ तैयार किए गए 14-सूत्रीय समझौता मसौदे (MoU) को पबल्कि कर दिया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक, यह समझौता फिलहाल दोनों देशों के बीच केवल सैद्धांतिक सहमति (Principle Agreement) के स्तर पर है और अभी इस पर अंतिम साइन नहीं हुए हैं।
ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान के टॉप लीडरशिप के साथ एक महत्वपूर्ण सहमति बन चुकी है। इसके ठीक एक दिन बाद यह फारसी भाषा का दस्तावेज सार्वजनिक किया गया। इस मसौदे का मकसद युद्ध को तुरंत रोकना और ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान निकालना है।

तो क्या खत्म होगा युद्ध?
मसौदे का सबसे अहम बिंदु पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को तत्काल प्रभाव से रोकना है। इसमें लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की बात कही गई है। इसके अलावा अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान की संप्रभुता का सम्मान करेगा और उसके आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार का दखल नहीं देगा।
अमेरिकी सेना हटेगी, होर्मुज स्ट्रेट फिर खुलेगा
क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था के तहत अमेरिका अपने सभी सैन्य दस्तों को ईरान के पड़ोसी इलाकों से वापस बुलाने पर सहमत हुआ है। इसके बदले में ईरान ने वादा किया है कि वह अपने कानूनों के मुताबिक 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल देगा।
इसके साथ ही ईरान द्वारा की गई समुद्री नाकेबंदी भी समाप्त कर दी जाएगी। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, इसलिए इसका खुलना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रतिबंध हटेंगे, अमेरिका देगा 300 अरब डॉलर
समझौते के तहत ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल और अन्य निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएंगे। इसके अलावा ईरान को उसकी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संपत्तियों तक फिर से पहुंच दी जाएगी। मसौदे में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को ईरान के लिए लगभग 300 अरब डॉलर की पुनर्निर्माण योजना (Reconstruction Plan) तैयार करनी होगी। इसका उद्देश्य युद्ध और प्रतिबंधों से प्रभावित ईरानी अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करना है।
न्यूक्लियर प्रोग्राम पर क्या हुआ समझौता?
दस्तावेज के मुताबिक ईरान न्यूक्लियर अप्रसार संधि (NPT) के तहत न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाने का अपना वादा दोहराएगा। साथ ही न्यूक्लियर प्रोग्राम और सेंक्शन्स को लेकर अगले 60 दिनों तक अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष बातचीत होगी। इस बातचीत का मकसद भविष्य के न्यूक्लियर समझौतों को अंतिम रूप देना और अमेरिकी प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने का रास्ता तैयार करना होगा।
24 अरब डॉलर की जब्त संपत्ति वापस मिलेगी
60 दिनों तक चलने वाली इस कूटनीतिक प्रक्रिया के दौरान अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव नहीं करेगा। इसके अलावा ईरान को उसकी जब्त की गई 24 अरब डॉलर की संपत्ति वापस दी जाएगी। समझौते के मुताबिक इस रकम का आधा हिस्सा बातचीत शुरू होने से पहले ही जारी किया जाना होगा।
यूनाइटेड नेशन्स करेगा निगरानी
समझौते के पालन को सुनिश्चित करने के लिए एक Special Monitoring Mechanism बनाया जाएगा। इस सिस्टम को यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) के विशेष प्रस्ताव का समर्थन मिलेगा। ईरान ने स्पष्ट किया है कि इस बातचीत का फोकस केवल न्यूक्लियर प्रोग्राम, आर्थिक प्रतिबंधों से राहत और आर्थिक पुनर्निर्माण पर रहेगा।
मिसाइल और क्षेत्रीय समूहों पर कोई बातचीत नहीं
इस दस्तावेज में साफ कहा गया है कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई चर्चा नहीं होगी। इसी तरह हिजबुल्लाह, हमास और हूती जैसे संगठनों को मिलने वाले समर्थन का मुद्दा भी बातचीत का हिस्सा नहीं बनेगा। दिलचस्प बात यह है कि मसौदे में ईरान ने इन संगठनों को Resistance Groups के रूप में संबोधित किया है।
अंतिम मंजूरी खामेनेई से मिलेगी
ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए देश के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की आधिकारिक मंजूरी जरूरी होगी। हालांकि ट्रंप इससे पहले भी कई बार ईरान के साथ समझौते की संभावना का दावा कर चुके हैं, लेकिन इस बार दोनों पक्षों के बीच लिखित मसौदा सामने आने के कारण इसे पहले की तुलना में ज्यादा गंभीर और वास्तविक माना जा रहा है।
पाकिस्तान और तुर्किये ने निभाई अहम भूमिका
कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक इस समझौते को तैयार करने में पाकिस्तान और तुर्किये ने महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ बातचीत पूरी होने के बाद ही डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इस समझौते की जानकारी दी थी।
कतर भी बना अहम मध्यस्थ
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान पर संभावित जवाबी कार्रवाई टालने से कुछ समय पहले पाकिस्तान ने अमेरिकी प्रशासन को संदेश भेजा था कि दोनों पक्षों के बीच समझौते का रास्ता निकल चुका है। बाद में कतर भी इस प्रक्रिया में शामिल हो गया। कतर के मध्यस्थ अली अल-थवादी और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची के बीच लंबी बातचीत के बाद इस मसौदे को साझा मंजूरी मिली।
ट्रंप के दूतों से लगातार संपर्क
पूरी बातचीत के दौरान कतर के मध्यस्थ अली अल-थवादी अमेरिकी प्रतिनिधियों स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर के साथ लगातार संपर्क में रहे। सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों ने लिखित मसौदे को स्वीकार कर लिया है, लेकिन अंतिम राजनीतिक मंजूरी और आधिकारिक हस्ताक्षर अभी बाकी हैं।
क्या बदल सकती है पश्चिम एशिया की तस्वीर?
अगर यह समझौता अंतिम रूप ले लेता है तो इसे पश्चिम एशिया की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ माना जाएगा। इससे न सिर्फ क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है बल्कि वैश्विक तेल बाजार को भी स्थिरता मिल सकती है। इसके अलावा प्रतिबंध हटने और वित्तीय संपत्तियां वापस मिलने से ईरान की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिल सकती है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि सर्वोच्च ईरानी नेतृत्व इस समझौते को कब मंजूरी देता है और यह कूटनीतिक पहल वास्तव में जमीन पर कब उतरती है।
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