Chhattisgarh News: दंतेवाड़ा नक्सल हमले में शहीद जवानों में से 5 थे पूर्व नक्सली, कहलाते थे "माटी के लाल"

DRG Chhattisgarh: आत्मसमर्पण करने वाले स्थानीय नक्सली युवाओं के सुरक्षाबल के सबसे मज़बूत जिला रिजर्व गार्ड में भर्ती किया जाता है। स्थानीय होने की वजह से डीआरजी के जवानों को ‘माटी का लाल’ कहकर भी भी पुकारा जाता है।

DRG Chhattisgarh

Chhattisgarh DRG: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में बुधवार को बारूदी सुरंग ब्लास्ट में शहीद 10 पुलिस जवानों में से 5 नक्सलवाद छोड़ने के बाद पुलिस बल में शामिल हुए थे। राज्य के एक सीनियर अफसर ने गुरुवार को यह जानकारी दी। बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने अपने एक बयान में बताया कि प्रधान आरक्षक जोगा सोढ़ी (35), मुन्ना कड़ती (40), आरक्षक हरिराम मंडावी (36) जोगा कवासी (22) और गोपनीय सैनिक राजूराम करटम (25) पुलिस बल में शामिल होने से पहले माओवादी के तौर में सक्रिय थे। उन्होंने बताया कि शासन की आत्मसमर्पण नीति का लाभ लेते हुए यह सभी पुलिस में शामिल हो गए थे।

महज एक माह पहले भर्ती हुआ था जोगा कवासी

सुंदरराज पी ने बताया कि 2017 में दंतेवाड़ा के पड़ोसी सुकमा जिले के अरलमपल्ली गांव के रहने वाले सोढ़ी और दंतेवाड़ा के मुड़ेर गांव के निवासी कड़ती पुलिस में शामिल हुए थे। इसी प्रकार दंतेवाड़ा जिले के रहवासी मंडावी और करटम को 2020 और 2022 में पुलिस में शामिल हुए थे। सुंदरराज ने बताया कि दंतेवाड़ा जिले के बड़ेगादम गांव के एक अन्य जवान जोगा कवासी बीते महीने पुलिस में शामिल हुआ था।बुधवार को छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले के अरनपुर थाना क्षेत्र में माओवादियों ने सुरक्षाबल के काफिले में शामिल एक वाहन को विस्फोट से उड़ा दिया था। इस घटना में जिला रिजर्व गार्ड (DRG ) के 10 जवान और एक वाहन चालक की जान चली गई थी।

माटी के लाल कहलाते है DRG के जवान

ज्ञात हो कि नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में आत्मसमर्पण करने वाले स्थानीय नक्सली युवाओं के सुरक्षाबल के सबसे मज़बूत जिला रिजर्व गार्ड में भर्ती किया जाता है। स्थानीय होने की वजह से डीआरजी के जवानों को 'माटी का लाल' कहकर भी पुकारा जाता है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में बीते तीन दशकों से चल रहे नक्सली आतंक के खिलाफ लड़ाई के लिए सात जिलों में अलग-अलग समय पर डीआरजी का गठन किया गया था। पुलिस अफसरों ने बताया कि 2008 में पहली बार कांकेर (उत्तर बस्तर) और नारायणपुर (अबूझमाड़ शामिल) जिले में डीआरजी का गठन किया गया था। आगे चलकर पांच वर्ष बाद 2013 में बीजापुर और बस्तर जिलों में DRG बल का गठित हुआ, जिसका विस्तार करते हुए सुकमा और कोंडागांव जिलों में 2014 में और दंतेवाड़ा में 2015 में डीआरजी का गठन किया हुआ।

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