CG Encounter: कैसे 30 नक्सली बने सुरक्षाबलों का निशाना? AK-47 समेत क्या-क्या बरामद? जानें नक्सलवाद के आका कौन?
Chhattisgarh Naxal Encounter: छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों ने शुक्रवार (4 अक्टूबर) को एक बड़ी मुठभेड़ में 30 नक्सलियों को मार गिराया है, जिसमें से 28 नक्सलियों के शव बरामद हो चुके हैं। यह मुठभेड़ दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिले के बॉर्डर पर स्थित ओरछा थाना क्षेत्र के नेंदुर और थुलथुली गांव के बीच जंगलों में हुई।
सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच यह मुठभेड़ लगभग 2 घंटे तक चली, जिसमें रुक-रुक कर गोलीबारी होती रही। जब फायरिंग थमी, तो सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन चलाया और भारी मात्रा में हथियार, जिसमें AK-47, SLR समेत कई ऑटोमैटिक हथियार बरामद किए। खास बात यह रही कि इस ऑपरेशन में सभी सुरक्षाकर्मी सुरक्षित हैं।

सुकमा में भी नक्सल सामग्री बरामद (Sukma Naxal Action)
यह मुठभेड़ सुकमा जिले में हुई हालिया कार्रवाई का ही एक हिस्सा है, जहां पिछले 11 दिनों में यह तीसरी मुठभेड़ है। 4 अक्टूबर को भी सुकमा में मुठभेड़ के बाद भारी मात्रा में नक्सली सामग्री बरामद की गई थी। इसके अलावा, 24 सितंबर को भी सुकमा में दो नक्सली मारे गए थे, हालांकि उनके शव उनके साथी ले गए थे।
मुख्यमंत्री ने जवानों के साहस को सराहा
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को मिली बड़ी कामयाबी पर सराहना की। उन्होंने कहा, "जवानों के अदम्य साहस को नमन। नक्सलवाद के खात्मे के लिए हमारी लड़ाई अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। हमारी सरकार पूरी तरह से नक्सलवाद का सफाया करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
छत्तीसगढ़ में फल-फूल रहा नक्सलवाद (Chhattisgarh Naxalism Flourishing)
छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जैसे इलाके, लंबे समय से नक्सलवाद का गढ़ बने हुए हैं। इस क्षेत्र में नक्सलवाद की गहरी जड़ें हैं, जो ऐतिहासिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारणों से यहां फलता-फूलता रहा है। नक्सलवाद का उदय एक जमीनी स्तर के विद्रोह के रूप में हुआ, जो धीरे-धीरे एक सशस्त्र संघर्ष में बदल गया। इन इलाकों में घने जंगल और पहाड़ी इलाके होने के कारण नक्सलियों का डेरा लंबे समय से यहां स्थापित है।
2024 में अब तक हुए बड़े नक्सली ऑपरेशन (Chhattisgarh Naxalite Encounter Timeline)
- 20 मार्च, दंतेवाड़ा: 2 नक्सली मारे गए।
- 27 मार्च, बीजापुर: नक्सल डिप्टी कमांडर समेत 6 नक्सलियों को मुठभेड़ में ढेर।
- 3 अप्रैल, बीजापुर: 13 नक्सली ढेर।
- 16 अप्रैल, कांकेर: 29 नक्सली मारे गए, जिनमें 15 महिलाएं शामिल थीं। इनमें नक्सली कमांडर शंकर राव शामिल।
- 30 अप्रैल, नारायणपुर: 10 नक्सली मारे गए। मारे गए नक्सलियों में 3 महिलाएं और 7 पुरुष।
- 10 मई, बीजापुर: 12 घंटे तक चली मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 12 नक्सलियों को मार गिराया। मारे गए नक्सलियों में टॉप कमांडर लिंगा और पापाराव समेत अन्य हार्डकोर नक्सली शामिल थे।
- 23-24 मई, नारायणपुर: अबूझमाड़ के जंगलों में दो अलग-अलग मुठभेड़ों में 8 नक्सलियों को मारा गया।
- 14-15 जून, अबूझमाड़: 8 नक्सली मारे गए।
- 31 अगस्त, नारायणपुर: 3 महिला नक्सली ढेर।
नक्सलवाद का मुख्य केंद्र
छत्तीसगढ़ का 'रेड कॉरिडोर' नक्सलियों का मुख्य केंद्र है, जिसमें बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और नारायणपुर जैसे जिले आते हैं। नक्सली संगठन CPI (Maoist) और People's Liberation Guerrilla Army (PLGA) यहां के प्रमुख नक्सली संगठनों में शामिल हैं। ये संगठन आदिवासी समुदाय के बीच अपना प्रभाव बनाकर उन्हें सरकार के खिलाफ खड़ा करने का प्रयास करते हैं।
कौन-कौन से हैं नक्सलियों के समूह एक्टिव ? (Chhattisgarh Naxalite Groups)
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का खाका मुख्य रूप से दो बड़े संगठनों में बंटा हुआ है। आइए जानते हैं कौन-कौन....
- CPI (Maoist): यह सबसे बड़ा और प्रमुख नक्सली संगठन है, जो पूरे देश के नक्सली आंदोलन का नेतृत्व करता है।
- People's Liberation Guerrilla Army (PLGA): यह संगठन CPI (Maoist) के अंतर्गत काम करता है और बस्तर तथा अन्य इलाकों में गुरिल्ला हमलों के लिए जाना जाता है।
छत्तीसगढ़ के नक्सली क्षेत्र में छोटे-मोटे कई संगठन भी सक्रिय हैं, लेकिन उनका मुख्य संपर्क और सहारा CPI (Maoist) से ही होता है।
कौन-कौन से हैं छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाके? (Chhattisgarh Naxalite Red Zone)
- दंतेवाड़ा
- सुकमा
- बीजापुर
- नारायणपुर
- कांकेर
- बस्तर
- कोंडागांव
- राजनांदगांव के कुछ हिस्से
- गरियाबंद और बलरामपुर के कुछ हिस्से
इन इलाकों में जंगल और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण नक्सलियों का प्रभाव अधिक है। ये इलाके केंद्रीय भारत के 'रेड कॉरिडोर' का हिस्सा माने जाते हैं, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाने जाते हैं।
नक्सलवाद के आका कौन? (Chhattisgarh Naxalism Mastermind)
- मुप्पला लक्ष्मण राव (गणपति): यह नक्सलियों के सबसे बड़े नेता माने जाते थे, हालांकि उनके बाद संगठन में नेतृत्व बदलाव हुए हैं।
- बसवराज: वर्तमान में नक्सलियों के शीर्ष नेता माने जाते हैं। वह केंद्रीय समिति का प्रमुख सदस्य है और नक्सल आंदोलन को छत्तीसगढ़ में नेतृत्व दे रहा है।
- मांडवी हिडमा: यह बस्तर में सक्रिय नक्सलियों के सबसे ताकतवर कमांडर के रूप में जाने जाते हैं। यह कई बड़े हमलों में प्रमुख भूमिका निभा चुके हैं।












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