Chhattisgarh: चीफ सेक्रेटरी ने ली अहम बैठक, छत्तीसगढ़ में वनाधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन पर ली जानकारी

छत्तीसगढ़ सरकार ने जंगलों में रहने वाले आदिवासियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए फैसले लेने में तेजी लाना शुरू कर दिया है।

रायपुर, 12 सितम्बर। छत्तीसगढ़ सरकार ने जंगलों में रहने वाले आदिवासियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए फैसले लेने में तेजी लाना शुरू कर दिया है। सोमवार को प्रदेश एक मुख्य सचिव अमिताभ जैन की अध्यक्षता मे मंत्रालय महानदी भवन में वन अधिकार अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन हेतु गठित राज्य स्तरीय निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में वन अधिकार पत्रों के वितरण, व्यक्तिगत वन अधिकार के तहत मान्य वन अधिकार पत्रधारकों में से शेष वन अधिकार पत्र धारकों की वन भूमि को चिन्हित कर राजस्व और वन अभिलेखों में दर्ज हुए वन अधिकार पुस्तिका प्रदान करने के संबंध में अधिकारियों से विस्तार से जानकारी ली गई।

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बैठक में बस्तर संभाग के बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा एवं सुकमा जिलें में व्यक्तिगत वनाधिकार के दावों को ग्राम स्तर पर फाईल करने के कार्य की समीक्षा की गई। बैठक में वन अधिकार पत्रों के डिजिटलाइजेशन की प्रगति और व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र धारकों को दी जाने वाली सुविधाओं की भी समीक्षा की गई। सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्राप्त ग्रामों में ग्राम सभा स्तर पर सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों के गठन के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए इस बैठक में कांकेर विधानसभा क्षेत्र के विधायक शिशुपाल सोरी, जशपुर के विधायक विनय भगत एवं पूर्व विधायक कटघोरा बोधराम कंवर एवं पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी भी शामिल हुए।

मुख्य सचिव ने वन अधिकार अधिनियम के तहत वितरित किए गए वन अधिकार पत्रों के हितग्राहियों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश अधिकारियों को दिए है। बैठक में राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि व्यक्तिगत वन अधिकार पत्रों के अभिलेखीकरण के तहत एक लाख 76 हजार से अधिक वन अधिकार पत्रों की जानकारी भूईया पोर्टल में अद्यतन की जा चुकी है। इसी तरह से वन विभाग के अंतर्गत वन भूमि पर वितरित वन अधिकार पत्रों के अभिलेखीकरण की कार्यवाही की जा रही है। मार्च 2022 की स्थिति में करीब चार लाख 45 हजार 986 वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके है और तीन लाख 12 हजार 342 वन अधिकार पत्र ऋण पुस्तिकाओं का वितरण कर दिया गया है।
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बैठक में जानकारी दी गई कि वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत अब तक वितरित भूमि में एक लाख 16 हजार 621 हितग्राहियों की भूमि को समतलीकरण एवं मेढ़ बंधान का कार्य किए गए है। इन कार्यों का क्षेत्रफल करीब 66 हजार 362 हेक्टेयर क्षेत्र है। इस कार्य के लिए 457 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की गई है। इसी तरह से एक लाख 56 हजार 223 हितग्राहियों को खाद एवं बीज हेतु करीब 31 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। कृषि उपकरण हेतु 12 हजार 854 हितग्राहियों को सात करोड़ की राशि स्वीकृत की जा चुकी है। इसी तरह से वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत वितरित भूमि में सिंचाई हेतु नलकूप, कुंआ एवं स्टापडेम आदि के 32 हजार से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए है। इसके लिए 265 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की जा चुकी है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 63 हजार 644 हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा चुका है।

व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र धारकों को लाभान्वित करने के लिए अभिसरण के माध्यम से कार्ययोजना तैयार की गई है। इसमें करीब 56 हजार 561 कार्य प्रस्तावित किए गए है। जिसके लिए 415 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इसमें 43 हजार 235 के कार्य मनरेगा के अंतर्गत प्रस्तावित किए गए है। इनमें 4364 कार्य महिला हितग्राहियों और 5504 कार्य पीवीटीजी हितग्राहियों की भूमि पर किया जाना प्रस्तावित किया गया है। बैठक में प्रमुख सचिव वन श्री मनोज पिंगुवा, आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग के सचिव श्री डी.डी.सिंह, राजस्व विभाग के सचिव श्री एन.एन.एक्का, आयुक्त आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विभाग सुश्री शम्मी आबिदी सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
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