'प्रणव दा अकेले नहीं थे,ऐसा यूंही नहीं कह रहा',पंकज झा ने शर्मिष्ठा मुखर्जी का किया समर्थन,लिख डाली लंबी पोस्ट

Sharmistha Mukherjee Social Media Post: पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। शर्मिष्ठा ने कहा कि जब उनके पिता का निधन हुआ था, तो कांग्रेस ने सीडब्ल्यूसी (कांग्रेस वर्किंग कमेटी) की शोक सभा तक बुलाने की जहमत नहीं उठाई। उनके इस ट्वीट को भाजपा नेता और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के सलाहकार पंकज झा ने साझा किया और कांग्रेस पर जबरदस्त हमला बोला है।

पंकज झा ने अपनी पोस्ट में कहा कि जब प्रणव मुखर्जी का निधन हुआ, तो कांग्रेस ने कोई शोक सभा तक नहीं बुलायी, जो कि एक असाधारण घटना थी। पंकज ने एक वरिष्ठ नेता का हवाला देते हुए कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि के.आर. नारायणन की मृत्यु पर सीडब्ल्यूसी की शोक सभा बुलाई गई थी और शोक संदेश केवल प्रणव मुखर्जी द्वारा तैयार किया गया था।

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पंकज झा ने आगे कहा कि प्रणव मुखर्जी अकेले नहीं थे, बल्कि कई बड़े नेता जिनका कद कांग्रेस में बड़ा था, वे नेहरू-फिरोज परिवार के निशाने पर रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के हर बड़े नेता को सोनिया गांधी और उनके परिवार से नफरत का सामना करना पड़ा। पंकज ने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने प्रणव मुखर्जी को भारत रत्न दिया, लेकिन सोनिया परिवार ने उनका अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पंकज झा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने जिस हिकारत के साथ मनमोहन सिंह के अध्यादेश को फाड़ा था, आज वैसा ही हिकारत से धर्मग्रंथ जलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर आज कांग्रेस की सरकार होती, तो प्रणव मुखर्जी का अंतिम संस्कार भी नहीं होने दिया जाता।

पंकज झा की पूरी पोस्ट इस ट्वीट में पढ़ें

पंकज झा ने अपनी पोस्ट में यह भी याद दिलाया कि कैसे कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के साथ बुरा बर्ताव किया था। राव की सरकार में वित्त मंत्री रहे मनमोहन सिंह को वैश्विक पहचान मिली, लेकिन जब नरसिम्हा राव का निधन हुआ, तब कांग्रेस ने उनके शव को पार्टी मुख्यालय में रखने तक की अनुमति नहीं दी। सिर्फ 11 लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए उपस्थित हुए थे। पंकज ने सवाल किया कि आज कांग्रेस से कोई पूछे कि नरसिम्हा राव की समाधि कहां है?

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कैसे कांग्रेस ने भारत रत्न प्राप्त पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के साथ भी बुरा बर्ताव किया। उन्होंने बताया कि शास्त्री जी की मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में नहीं किया गया और उनकी समाधि के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। पंकज ने आरोप लगाया कि यह सब कांग्रेस के अंदर चल रहे परिवारवाद का नतीजा था, जहां किसी भी बड़े नेता को नेहरू परिवार से बाहर स्थान मिलने नहीं दिया जाता था।

किया प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद का ज़िक्र

पंकज झा ने इस विषय को और आगे बढ़ाते हुए लिखा कि सिर्फ प्रणव मुखर्जी, नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह का ही मामला नहीं है, बल्कि भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के साथ भी बुरा बर्ताव हुआ था। उन्होंने कहा कि जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद को सेवानिवृत्ति के बाद दिल्ली में रहने के लिए एक कमरा तक नहीं दिया गया, तब उन्हें पटना के एक सीलन भरे कमरे में अपना जीवन बिताना पड़ा।

पंकज झा ने यह भी कहा कि कांग्रेस के इन इतिहासों को लेकर अब कोई भी सवाल नहीं उठाता, लेकिन यह सचाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अगर आज अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हुआ होता, तो कांग्रेस के इतिहास को देखते हुए उन्हें भी दिल्ली में अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं मिलती। पंकज झा ने कहा कि मनमोहन सिंह के निधन के बाद उन्हें समग्र सम्मान मिल रहा है, क्योंकि आज गांधी परिवार की सत्ता में कोई पकड़ नहीं रह गई है।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने मनमोहन सिंह के स्मारक को लेकर बयान दिया

इस बीच, शर्मिष्ठा मुखर्जी ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए स्थान आवंटित करने के मुद्दे पर अपनी राय जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह हमारी परंपरा रही है कि पूर्व प्रधानमंत्री के लिए स्मारक बनाए जाते हैं, और डॉ. मनमोहन सिंह के योगदान को देखते हुए उनके स्मारक पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। शर्मिष्ठा ने यह भी कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह को भारत रत्न दिया गया है, और उन्हें यह सम्मान मिलना चाहिए, क्योंकि उन्होंने देश के लिए अपार योगदान दिया है।

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