MP News: छतरपुर में झोलाछाप डॉक्टरों पर शिकंजा, स्वास्थ्य विभाग की महाराजपुर और कुसमा में छापेमारी
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध मेडिकल स्टोरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की शुरुआत की है। महाराजपुर और कुसमा कस्बों में जिला चिकित्सा अधिकारी, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, और तहसीलदार की संयुक्त टीम ने मेडिकल स्टोरों की जांच की और झोलाछाप डॉक्टरों की तलाश में छापेमारी की। लेकिन इस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कुछ मेडिकल संचालक दुकानें बंद कर फरार हो गए, जबकि कुछ को इलाज करते पकड़ा गया।
स्थानीय लोगों का दावा है कि जांच दल के कुछ सदस्यों और मेडिकल संचालकों के बीच "अंदरूनी रिश्ते" होने की वजह से यह कार्रवाई सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई। आइए, इस रोमांचक और चौंकाने वाली कहानी में गोता लगाते हैं, जहां स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और स्थानीय लोगों की शिकायतें आमने-सामने हैं!

छापेमारी की शुरुआत, महाराजपुर और कुसमा में हड़कंप
7 मई 2025 को छतरपुर के महाराजपुर और कुसमा कस्बों में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अचानक छापेमारी शुरू की। इस अभियान का मकसद था बिना डिग्री के क्लीनिक चलाने वाले झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध रूप से दवाइयां बेचने वाले मेडिकल स्टोरों पर नकेल कसना। जांच दल में जिला चिकित्सा अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. आरपी गुप्ता, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, और स्थानीय तहसीलदार शामिल थे। टीम ने मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस, दवाइयों की वैधता, और स्टॉक रजिस्टर की जांच की, साथ ही झोलाछाप डॉक्टरों की मौजूदगी की पड़ताल की।
महाराजपुर के मुख्य बाजार और कुसमा के स्वास्थ्य केंद्रों के आसपास के मेडिकल स्टोरों में यह कार्रवाई सुबह से दोपहर तक चली। कुछ मेडिकल स्टोरों पर बिना योग्यता के इलाज करने वाले झोलाछाप डॉक्टर पकड़े गए, जो सामान्य बुखार से लेकर गंभीर बीमारियों तक का "इलाज" कर रहे थे। लेकिन जैसे ही जांच दल की गाड़ियां पहुंचीं, कई मेडिकल संचालकों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं और रफूचक्कर हो गए।
जांच में चौंकाने वाले खुलासे: "अंदरूनी रिश्तों" का खेल?
जांच के दौरान कुछ मेडिकल स्टोरों पर अनियमितताएं सामने आईं। कई दुकानों पर बिना लाइसेंस की दवाइयां, एक्सपायर्ड दवाएं, और अप्रशिक्षित कर्मचारी पाए गए। कुछ मेडिकल संचालक बिना डॉक्टरी डिग्री के मरीजों को ड्रिप चढ़ाते और इंजेक्शन देते हुए पकड़े गए। लेकिन स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जांच दल के कुछ सदस्यों और मेडिकल संचालकों के बीच "अंदरूनी रिश्ते" होने की वजह से कार्रवाई ढीली रही।
महाराजपुर के निवासी रमेश साहू ने कहा, "हमने देखा कि जांच दल कुछ मेडिकल स्टोरों पर रुका ही नहीं। जिन दुकानों पर झोलाछाप डॉक्टर काम करते हैं, वे पहले ही बंद हो चुकी थीं। ऐसा लगता है कि उन्हें पहले से खबर मिल गई थी।" कुसमा की गृहिणी शांति बाई ने जोड़ा, "ये लोग कागजों में कार्रवाई दिखाते हैं, लेकिन असल में कुछ नहीं होता। झोलाछाप डॉक्टर फिर दुकान खोल लेंगे।"

इन आरोपों ने जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठा दिए। एक स्थानीय पत्रकार ने दावा किया कि कुछ मेडिकल संचालकों को जांच से पहले ही "टिप-ऑफ" मिल गया था, जिसके चलते वे दुकानें बंद कर फरार हो गए।
MP News: झोलाछाप डॉक्टरों का आतंक, बमीठा की घटना ने खोली पोल
छतरपुर में झोलाछाप डॉक्टरों की समस्या कोई नई नहीं है। अगस्त 2024 में बमीठा क्षेत्र में एक झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज से दो बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने कार्रवाई का वादा किया था। सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता ने तब कहा था, "जिले में 150 से ज्यादा झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय हैं। हम उनकी कुंडली तैयार कर रहे हैं।"
महाराजपुर और कुसमा जैसे कस्बों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का फायदा ये झोलाछाप डॉक्टर उठाते हैं। गरीब और अशिक्षित लोग इनके पास इलाज के लिए जाते हैं, जहां सामान्य बुखार के लिए भी ड्रिप और स्टेरॉयड दिए जाते हैं। कुसमा के रामू यादव ने बताया, "मेरे पड़ोसी को बुखार था, झोलाछाप ने ड्रिप चढ़ाई। हालत बिगड़ी तो उसे जिला अस्पताल ले जाना पड़ा। ये लोग जान से खेलते हैं।"
मेडिकल स्टोरों की स्थिति अवैध दवाइयां और लापरवाही
- जांच दल ने कई मेडिकल स्टोरों पर गंभीर खामियां पाईं। कुछ प्रमुख अनियमितताएं:
- बिना लाइसेंस की दवाइयां: कई दुकानों पर नशीली दवाएं और एंटीबायोटिक्स बिना प्रिस्क्रिप्शन बेचे जा रहे थे।
- एक्सपायर्ड दवाएं: कुछ स्टोरों पर पुरानी और एक्सपायर्ड दवाएं बेची जा रही थीं।
- अप्रशिक्षित कर्मचारी: मेडिकल स्टोरों पर फार्मासिस्ट की जगह अप्रशिक्षित लोग दवाइयां दे रहे थे।
- झोलाछाप क्लीनिक: कुछ मेडिकल स्टोरों के पीछे छोटे-छोटे "क्लीनिक" चल रहे थे, जहां झोलाछाप डॉक्टर मरीजों को भर्ती कर इलाज कर रहे थे।
सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता ने कहा, "हमने कई मेडिकल स्टोरों को नोटिस जारी किया है। जिन दुकानों पर अनियमितताएं मिलीं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। झोलाछाप डॉक्टरों की पहचान कर उनके क्लीनिक सील किए जाएंगे।" लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी कार्रवाइयां पहले भी हुईं, पर कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
MP News: स्थानीय लोगों का गुस्सा: "कागजी खानापूर्ति बंद करो!"
महाराजपुर और कुसमा के निवासियों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को "कागजी खानापूर्ति" करार दिया। कुसमा के व्यापारी सुरेश गुप्ता ने कहा, "हर साल जांच होती है, नोटिस जारी होते हैं, लेकिन एक भी झोलाछाप डॉक्टर जेल नहीं जाता। ये लोग फिर से दुकान खोल लेते हैं।" कुछ लोगों ने दावा किया कि जांच दल ने सिर्फ छोटे मेडिकल स्टोरों को निशाना बनाया, जबकि बड़े स्टोरों को छोड़ दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग का जवाब, "कार्रवाई जारी रहेगी"
सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा, "हमारी कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी है। किसी भी मेडिकल संचालक के साथ कोई अंदरूनी रिश्ता नहीं है। जांच में मिली अनियमितताओं के आधार पर मेडिकल स्टोरों को नोटिस दिए गए हैं, और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी।" उन्होंने यह भी बताया कि जिले के अन्य कस्बों-चंदला, लवकुशनगर, और बक्सवाहा-में भी जल्द छापेमारी होगी।
ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी ने कहा, "महाराजपुर और कुसमा में स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं, जिसका फायदा झोलाछाप डॉक्टर उठाते हैं। हम जनता से अपील करते हैं कि वे केवल रजिस्टर्ड डॉक्टरों से इलाज कराएं।" प्रशासन ने लोगों से अवैध क्लीनिकों की शिकायत करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 104 जारी किया है।
छतरपुर में स्वास्थ्य संकट, झोलाछाप डॉक्टरों का जाल
छतरपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और झोलाछाप डॉक्टरों की बढ़ती संख्या एक गंभीर समस्या है। जिले के सुदूर क्षेत्रों-जैसे बारीगढ़, घुवारा, और बक्सवाहा-में सरकारी अस्पतालों और योग्य डॉक्टरों की कमी के चलते लोग झोलाछाप डॉक्टरों पर निर्भर हैं। ये डॉक्टर मामूली बीमारियों के लिए भारी-भरकम दवाइयां और ड्रिप्स देते हैं, जिससे मरीजों की जान को खतरा बढ़ता है।
पिछले कुछ वर्षों में छतरपुर में झोलाछाप डॉक्टरों के गलत इलाज से कई मौतें हो चुकी हैं। 2020 में कोविड-19 के दौरान भी जिले में 60 डॉक्टरों की टीम ने बाहर से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग की थी, लेकिन झोलाछाप डॉक्टरों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई थी। स्थानीय लोग अब मांग कर रहे हैं कि सरकार जिले में और सरकारी अस्पताल खोले और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ स्थायी कार्रवाई करे।
भोपाल से कनेक्शन, प्रदेशव्यापी समस्या
छतरपुर की यह समस्या पूरे मध्य प्रदेश में फैली हुई है। हाल ही में भोपाल में दूध की कीमतों के खिलाफ महिला कांग्रेस के प्रदर्शन ने दिखाया कि जनता मूलभूत जरूरतों की बढ़ती लागत से त्रस्त है। उसी तरह, छतरपुर में झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही स्वास्थ्य सेवाओं की महंगाई और पहुंच की कमी को उजागर करती है। भोपाल के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, "हम पूरे प्रदेश में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। छतरपुर में हुई कार्रवाई इसकी शुरुआत है।"
आगे क्या? जनता की मांग और सरकार की चुनौती
छतरपुर के लोग चाहते हैं कि झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो और मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच हो। कुछ सुझाव जो स्थानीय लोगों ने दिए:
- रजिस्टर्ड डॉक्टरों की तैनाती: ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी अस्पतालों में योग्य डॉक्टरों की नियुक्ति।
- जागरूकता अभियान: लोगों को झोलाछाप डॉक्टरों के खतरों के बारे में शिक्षित करना।
- सख्त सजा: गलत इलाज से मौत होने पर झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ हत्या का मुकदमा।
- मेडिकल स्टोरों का लाइसेंस चेक: नियमित रूप से दवाइयों और लाइसेंस की जांच।
स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती है जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और स्थानीय लोगों का भरोसा जीतना। अगर "अंदरूनी रिश्तों" के आरोप सही हैं, तो यह कार्रवाई की विश्वसनीयता को और कमजोर करेगा।












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