तमिलनाडु: कोस्ट गार्ड ने पकड़े ₹8 करोड़ के 2 हजार KG 'समुद्री खीरे', ये सब्जी नहीं बल्कि एक 'खास' जीव
चेन्नई, 20 सितंबर: भारत के समुद्री इलाकों में इन दिनों 'समुद्री खीरे' की तस्करी बड़े पैमाने पर की जा रही है। तमिलनाडु में सी कुकुम्बर यानी समुद्री खीरे की स्मगलिंग जोरों पर है। रिपोर्टस की मानें तो दक्षिणी भारत और श्रीलंका में 'सी कुकुम्बर' का सबसे ज्यादा शिकार किया जाता है और सोने के बराबर भाव में बेचा जाता है। हाालांकि जैसा नाम से लगता है कि ये कोई समंदर में उगने वाली सब्जी होगी, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। ये सब्जी नहीं बल्कि एक 'विशेष' समुद्री जीव है, जिसकी इंटरनेशनल लेवल पर तस्करी हो रही है।

2000 किलोग्राम 'समुद्री खीरा' जब्त
तमिलनाडु में रविवार को एक बार फिर सी कुकुम्बर की तस्करी से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है। भारतीय तटरक्षक दल (Indian Coast Guard) ने मंडपम के पास एक नाव से लुप्तप्राय प्रजाति के 2 टन यानी 2000 किलोग्राम 'समुद्री खीरे' जब्त करने में बड़ी सफलता हासिल की है। संदिग्ध नाव मंडपम के दक्षिण में वेदालाई से लगभग 15 किमी दूर उसके चालक दल के बिना लंगर में पाई गई थी। जब्त समुद्री खीरे की कीमत करीब 8 करोड़ रुपए बताई जा रही है।

8 करोड़ रुपए बताई जा रही कीमत
भारतीय तटरक्षक बल ने जब्त किए गए समुद्री खीरे की फोटो शेयर करते हुए बताया कि जांच में खुलासा हुआ कि समुद्री खीरे की इस बड़ी खेप को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा के पार ट्रांसशिपमेंट के लिए योजना बनाई गई थी। दल ने जब्त समुद्री खीरे के साथ नाव को वन अधिकारियों को सौंप दिया है। ऐसे में आप सोच रहे होंगे की आखिर सी कुकुम्बर क्या है? जिसकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तस्करी की जा रही हैं।

लुप्तप्राय समुद्री प्रजाति की श्रेणी में 'समुद्री खीरा'
दरअसल, यह एक समुद्री जीव है, जिसको समुद्री खीरा या ककड़ी या फिर सी कुकुम्बर कहा जाता है। ये बिल्कुल खीरे जैसी आकृति या फिर यूं कहे कि खीरे की दिखता है। बता दें कि इस प्रजाति पर हर वक्त बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इसलिए इसे लुप्तप्राय समुद्री प्रजाति की श्रेणी में रखा गया है, जो अब लुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है। रिपोर्ट्स की मानें तो यह जीव ढाई लाख रुपए का एक किलो बिकता है।

दवाइयों से लेकर खाने तक में इस्तेमाल
जानकारी के मुताबिक इसका इस्तमाल दवाईयां बनाने में किया जाता है। जैसे कामोत्तेजना बढ़ाने वाली दवाओं, कैंसर की दवा। इसके अलावा तेल, क्रीम, कॉस्मेटिक्स बनाने में भी इसका उपयोग किया जाता है। इसकी मांग चीन समेत कई दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में बहुत ज्यादा है। वहीं लोग इसे खाने के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं, जिसके चलते विलुप्त हो रहे जीव की प्रजाति को बड़ा खतरा पैदा हो गया है।












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