Jayalalitha sized assets: जयललिता के सम्पत्ति पर किसका हक, कोर्ट ने सुनाया फैसला, क्या है पूरा मामला?
Chennai News: तमिलनाडु (Tamilnadu) की पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत अभिनेत्री जयललिता (Jayalalitha) की संपत्ति पर कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। सालों से चले आ रहे जयललिता की करोड़ों की जब्त संपत्ति पर अब तमिलनाडु सरकार का हक होगा। बता दें कि, उनके निधन के बाद से उनकी पूरी संपत्ति कर्नाटक सरकार के पास थी। 14 फरवरी को बंगलुरु कि एक अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए ये फैसला दिया है।
इस संपत्ति में सोने-चांदी के गहनें और हजारों एकड़ जमीन है जिसे अब राज्य सरकार के हवाले कर दिया गया है।
आखिर जयललिता की करोड़ों की जब्त संपत्ति तमिलनाडु सरकार को क्यों दे दी गई? उनके कानूनी उत्तराधिकारी को ये संपत्ति क्यों नहीं सौंपी गई? जयललिता संपत्ति विवाद का क्या है? आइए इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं..
क्या है पूरा मामला
1996 से 2001 के बीच तमिलनाडु की डी.एमके सरकार ने आय से अधिक संपत्ति मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए दर्जनों मुकदमें दर्ज किए। जयललिता पर आरोप था कि उनके पास 63 करोड़ से अधिक की संपत्ति है जो उनके वास्तविक आय से कहीं अधिक थी। 18 साल चले इस मामले में 27 सितंबर 2014 में को बेंगलुरु की विशेष अदालत ने जयललिता को दोषी पाया और 4 साल की जेल और 100 करोड़ की जुर्माना राशि की सजा सुनाई।

इस दौरान तमिलनाडु की पूर्व सीएम जयललिता को आय से अधिक संपत्ति के मामले में पहली बार गिरफ्तार किया गया। इस मामले में जब सीबीआई और इनकम टैक्स ने जांच की तो उस दौरान जयललिता के पास करोड़ों के सोने-चांदी के गहने, महंगी साड़ियां और शानदार किमती घड़ियों कलेक्शन मिला जिसे तत्कालिन सरकार ने अखबारों में फोटो के साथ छपवाया।
कितनी है 'अम्मा' की संपत्ति?
जयललिता की इन जब्त संपत्तियों में एक सोने का तलवार, सोने का मुकुट, सोने की करघनी है। इसके अलावा कर्नाटक सरकार के पास जयललिता की 1,526 एकड़ जमीन के साथ-साथ 27 किलोग्राम सोने और 1,126 किलोग्राम चांदी के गहने हैं। इन सारी संपत्तियों को तमिलनाडु सरकार के हवाले कर दिया गया है।
सुप्रिम कोर्ट ने माना अवैध संपत्ति
मई 2015 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस मामले में जयललिता को बरी कर दिया और वो एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनी और 2016 के विधानसभा चुनाव में जीत भी हासिल की। फरवरी 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया और बेंगलुरु विशेष अदालत के फैसले को बरकरा रखा।
2016 में जयललिता की मृत्यु के बाद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उनकी कुल संपत्ति जब्त की गई। सुप्रिम कोर्ट के मुताबिक, ये संपत्ति जयललिता और उनके रिश्तेदारों द्वारा अवैध तरीके से बनाई गई थी इसलिए इस पर उनका या उनके किसी रिश्तेदार का हक नहीं है। हालांकि, सुप्रिम कोर्ट में जयललिता की भतिजी जे.दीपा ने एक याचिका दायर करके उस संपत्ति पर अपना मालिकाना हक का दावा किया संपत्ति लौटाने की मांग की थी।
तमिलनाडु सरकार को सौंपी गई जब्त संपत्ति
संपत्ति विवाद के इस पूरे मामले पर 14 फरवरी 2025 को सुप्रिम कोर्ट ने जे.दीपा की उस मांग को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने अपने हक का दावा करते हुए संपत्ति लौटाने की मांग की थी। इसके बाद 15 फरवरी 2025 को बेंगलुरु की सीबीआई अदालत ने जब्त संपत्ति मामले पर सुनवाई करते हुए इससे तमिलनाडु सरकार को सौंप दी है। रिपोर्टस के मुताबिक, लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए अदालत ने इसे निलाम करने से मना कर दिया है और तमिलनाडु सरकार को इसे समाजिक हित में इस्तेमाल करने को कहा है।
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