ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते ट्रेंड से डरे व्यापारी
नई दिल्ली। मोबाइल से लेकर सोफा तक, टीवी से लेकर आलू-प्याज तक। आज हर चीज ऑनलाइन शॉपिंग में उपलब्ध है। और जिस तरह से इसका ट्रेंड बढ़ रह है, उसे देखते हुए व्यापारियों में एक डर दिखाई देने लगा है।

जी हां यही कारण है कि देश के व्यापारियों ने वित्तमंत्री अरुण जेटली से ई-कॉमर्स ट्रेडिंग पर नियंत्रण कसने की मांग की है। कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने जेटली को भेजे अपने बजट पूर्व ज्ञापन में कुछ अहम मांगें की हैं।
क्या हैं कैट की मांगे
- ई कॉमर्स में एफडीआई को अनुमति न देने की स्पष्ट घोषणा हो।
- ई कॉमर्स और डायरेक्ट सेलिंग व्यापार के लिए नियम एवं कायदे कानून बनाए जाएं।
- देश में नकदरहित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना मकसद हो।
- क्रेडिट, डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग कीअधिकतम उपयोग हेतु बजट में एक प्रोत्साहन स्कीम की घोषणा।
- मुद्रा बैंक का धनाभाव से ग्रसित लोगों तक पहुंचना बहुत जरूरी है।
- संसद में एक कानून लाकर एक रेगुलेटर बनाया जाए।
- मुद्रा योजना में देशभर में व्यापारी संगठनों को जोड़ा जाए।
- इससे वास्तविक लोगों को मुद्रा ऋण आसानी से मिल सकेगा।
- जीएसटी कर प्रणाली को देशभर में एक किया जाए।
- एक अथॉरिटी सभी राज्यों में समान कानून, समान कर हटें।
- साथ ही अंर्तराज्यीय व्यापार में लागू सभी प्रकार के रोड परमिट और एंट्री फार्म समाप्त हो।
- व्यापारियों को प्राइमरी सेक्टर लैंडिंग रेट पर बैंकों से वित्तीय सहायता देने की योजना भी बनाई जाए।
- शैक्षिक एवं स्वास्थ्य के क्षेत्रों में काम कर रहे व्यापारियों को स्पेशल पैकेज दिया जाए।
- इससे बेहद उचित दामों पर आम आदमी को शिक्षा और चिकित्सा उपलब्ध हो सके।
और क्या हैं कैट की मांगे
- व्यापार पर लगे सभी प्रकार के कर एवं अन्य कानूनों की पुर्नसमीक्षा की जाए।
- इसके लिए एक पुर्नसमीक्षा आयोग गठित किया जाए।
- जो कानून वर्तमान में अप्रासंगिक हो गये हैं उनको समाप्त किया जाए।
- जिन कानूनों में संशोधनों की आवश्यकता है उनमेंसंशोधन किये जायें।
- कैट ने यह भी मांग की है कि रिटेल सेक्टर को अत्याधुनिक और उच्चस्तरीय बनाया जाए।
- रिटेल व्यापार की जमीनी हकीकत और परेशानियों को समझना जरूरी है।
- इसके लिए अधिकारियों एवं व्यापारियों की एक संयुक्त समिति गठित की जाए।
- फ्री ट्रेड जोन और स्पेशल इकोनोमिक जोन की तर्ज पर रूरल इकोनोमिक जोन बनाया जाए।
- ऐसे क्षेत्रों में काम करने वाले व्यापारियों को पांच वर्ष तक सभी करों में छूट मिलनी चाहिए।
- 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यापारियों को पेंशन दी जानी चाहिए।
- यह पेंशन उनके द्वारा एकत्र किये गये कर का एक हिस्सा हो सकती है।












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