US H-1B Visa Fee: अमेरिका ने बढ़ाई वीजा फीस, पलभर में धड़ाम हुआ निफ्टी! IT शेयर-एजुकेशन लोन पर दोहरा असर
US Visa Fee Hike: अमेरिका ने अचानक एच-1बी वीजा की फीस (H-1B Visa Fee) में जबरदस्त बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले ने भारतीय आईटी सेक्टर और बैंकों दोनों को हिला दिया है। जहां एक तरफ टीसीएस, इंफोसिस और टेक महिंद्रा जैसी आईटी दिग्गज कंपनियों के शेयर धड़ाम हो गए। निफ्टी आईटी इंडेक्स सोमवार को करीब 3% गिर गया। मिड-साइज कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा नुकसान देखने को मिला।
वहीं दूसरी ओर लाखों भारतीय छात्रों और एजुकेशन लोन देने वाले बैंकों के लिए भी नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि महंगा वीज़ा न केवल आईटी कंपनियों की भर्ती लागत को बढ़ा देगा। बल्कि अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी के सपने देखने वाले छात्रों के लिए भी बड़ी रुकावट बन सकता है। इसका सीधा असर भारत के 2 लाख करोड़ रुपये के शिक्षा ऋण बाजार पर पड़ सकता है।

टीसीएस, इंफोसिस और टेक महिंद्रा में गिरावट
आईटी दिग्गज कंपनियों टीसीएस, इंफोसिस और टेक महिंद्रा के शेयर 6% तक टूटे। निवेशकों को डर है कि अमेरिका में नए कर्मचारियों की भर्ती अब और महंगी हो जाएगी।
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छोटे आईटी फर्म पर ज्यादा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि निकट भविष्य में असर और तेज दिख सकता है। छोटे आईटी फर्म जो नए एच-1बी वीज़ा पर ज्यादा निर्भर रहते हैं, उनकी कमाई पर बड़ा दबाव बन सकता है। हालांकि टीसीएस और इंफोसिस जैसी बड़ी कंपनियां इस चुनौती को संभालने की बेहतर स्थिति में हैं।
पहले से मुश्किल दौर में आईटी शेयर
आईटी सेक्टर के शेयर पहले ही 2025 में कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं। टीसीएस अब तक 23% नीचे है, इंफोसिस 18% टूटा और विप्रो में 14.6% की गिरावट आ चुकी है। वीज़ा फीस में यह बढ़ोतरी सेक्टर की रिकवरी की उम्मीदों को और पीछे धकेल सकती है।
एजुकेशन लोन के बाजार पर भी असर
वीज़ा फीस में यह अचानक उछाल सिर्फ आईटी कंपनियों के लिए ही नहीं, बल्कि बैंकों और एनबीएफसी पर भी असर डाल सकता है। अमेरिका ने नए एच-1बी वीज़ा पर 1 लाख डॉलर की भारी-भरकम फीस लगा दी है। इससे भारत के करीब 2 लाख करोड़ रुपये के शिक्षा ऋण बाजार में नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
अमेरिका जाने वाले छात्रों पर दबाव
करीब 30 से 40% शिक्षा ऋण उन्हीं छात्रों से जुड़ा है जो अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी के सपने देखते हैं। वीज़ा महंगा होने से कई छात्र पीछे हट सकते हैं, जिससे नौकरियों के अवसर भी प्रभावित होंगे। यह स्थिति बैंकों और खासकर शिक्षा फाइनेंस देने वाली एनबीएफसी के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है।
डिफॉल्ट का खतरा
अगर छात्रों की संख्या कम हुई या नौकरी के मौके घटे, तो बैंकों को डिफॉल्ट का खतरा बढ़ सकता है। जुलाई के अंत तक भारतीय बैंकों का शिक्षा ऋण 1.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, जो सालाना 15% की वृद्धि दिखाता है। हालांकि यह वृद्धि पहले के 19% से कम है, यानी पहले ही रफ्तार धीमी हो चुकी है।
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