SEBI Adani Group Clean Chit: हिंडनबर्ग के स्टॉक हेरफेर के आरोप सेबी से खारिज, गौतम अडानी ने कही मन की बात
SEBI Adani Group Clean Chit: भारतीय शेयर बाजार के नियामक सेबी (SEBI) ने गुरुवार (18 सितंबर) को एक बड़ा फैसला सुनाया। सेबी ने अडानी समूह को क्लीन चिट दे दी है। अमेरिकी शॉर्ट-सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च के स्टॉक हेरफेर के आरोपों को सेबी ने पूरी तरह खारिज कर दिया। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश सी. वर्णेय ने दो अलग-अलग आदेश जारी किए, जिसमें अडानी पोर्ट्स, अडानी पावर और अडानी एंटरप्राइजेज जैसी कंपनियों को किसी भी गड़बड़ी से मुक्त कर दिया गया।
कोई जुर्माना या सजा नहीं लगाई गई। यह फैसला जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग की रिपोर्ट (Hindenburg Report) से शुरू हुई जांच का अंत है, जो अडानी समूह के लिए बड़ी राहत है। आइए, क्या हुआ विस्तार से समझते हैं...

हिंडनबर्ग का क्या था आरोप?
हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) ने 2023 में एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें अडानी समूह पर स्टॉक प्राइस को गलत तरीके से ऊंचा दिखाने और पैसे की हेराफेरी का आरोप लगाया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि अडानी समूह ने आदिकॉर्प एंटरप्राइजेज, माइलस्टोन ट्रेडलिंक्स और रेहवर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी छोटी कंपनियों का इस्तेमाल करके अरबों रुपये के लेन-देन किए।
इनमें से कुछ पैसे अडानी पोर्ट्स से अडानी पावर या अडानी एंटरप्राइजेज को ट्रांसफर हुए, जो कथित तौर पर बैलेंस शीट को गलत दिखाने के लिए था। उदाहरण के लिए, आदिकॉर्प ने अडानी पोर्ट्स से 1,200 करोड़ रुपये का लोन लिया और उसे अडानी पावर को दे दिया। हिंडनबर्ग का दावा था कि ये लेन-देन संबंधित पक्षों के बीच छिपे हुए थे, जो शेयरधारकों को धोखा देने जैसे थे। इस रिपोर्ट के बाद अडानी समूह के शेयरों का बाजार मूल्य 150 अरब डॉलर (करीब 12 लाख करोड़ रुपये) गिर गया था। विपक्ष ने इसे 'क्रोनी कैपिटलिज्म' कहा, और सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को जांच के लिए कहा। अडानी समूह ने हमेशा इनकार किया और कहा कि सभी लेन-देन कानूनी और पारदर्शी थे।
सेबी की जांच: 10 साल के रिकॉर्ड्स चेक, कोई हेराफेरी नहीं पाई
सेबी ने 2012-13 से 2022-23 तक के वित्तीय वर्षों की गहन जांच की। बैंक स्टेटमेंट, बोर्ड मीटिंग्स, ऑडिट रिपोर्ट्स और लेखा मानकों की जांच हुई। सेबी ने पाया:-
- आदिकॉर्प केस: अडानी पोर्ट्स ने 1,282 करोड़ रुपये का लोन दिया, जो अडानी पावर को ट्रांसफर हुआ। लेकिन सारा पैसा ब्याज सहित वापस आ गया। कोई फंड डायवर्जन या हेराफेरी नहीं।
- माइलस्टोन-रेहवर केस: 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के लोन दिए गए, लेकिन सब ब्याज सहित रिटर्न हो गए। ये कंपनियां मध्यस्थ की तरह काम कर रही थीं, लेकिन संबंधित पक्ष के लेन-देन के नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ।
- सेबी ने कहा, 'कोई धोखाधड़ी या अनुचित व्यापार का सबूत नहीं। सभी पैसे वापस आ चुके, कोई फंड मिसयूज नहीं।' गौतम अडानी, राजेश अडानी, और CFO जुगेशिंदर सिंह पर भी कोई दोष नहीं। सेबी एक्ट, LODR रेगुलेशन्स, और PFUTP रेगुलेशन्स के तहत कोई उल्लंघन नहीं पाया गया।
सेबी ने जोर दिया कि 'रूप से ज्यादा तथ्य' महत्वपूर्ण हैं - यानी लेन-देन वैध थे, प्रकटीकरण के नियमों का पालन हुआ।
अडानी समूह के लिए राहत: शेयरों में उछाल, लेकिन सवाल बाकी
यह फैसला अडानी समूह के लिए बड़ी जीत है। रिपोर्ट के बाद शेयर गिरे थे, लेकिन अब रिकवरी हो रही। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि SEBI को जांच पूरी करने दो। लेकिन आलोचक सवाल उठा रहे हैं - क्या SEBI का 'संबंधित पक्ष' का मतलब बहुत संकीर्ण है? क्या ये जांच पूरी तरह निष्पक्ष थी? हिंडनबर्ग ने पहले SEBI चेयरपर्सन पर भी आरोप लगाए थे, लेकिन सेबी ने क्लीन चिट दी।
अडानी समूह ने कहा, 'हम हमेशा कानून का पालन करते हैं।' बाजार पर असर: अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स के शेयरों में तेजी आई। लेकिन राजनीतिक बहस जारी - विपक्ष ने 'क्रोनी कैपिटलिज्म' का राग अलापा। यह फैसला भारतीय बाजार के लिए अहम है - निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, लेकिन पारदर्शिता पर सवाल बने रहेंगे।
गौतम अडानी ने कही मन की बात
वहीं, गौतम अडानी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर कहा- 'एक विस्तृत जांच के बाद, सेबी ने अपनी इस बात की पुष्टि की है कि हिंडनबर्ग के दावे निराधार थे। पारदर्शिता और ईमानदारी हमेशा से अदाणी समूह की पहचान रही है। हम उन निवेशकों के दर्द को गहराई से समझते हैं, जिन्होंने इस धोखाधड़ी और प्रेरित रिपोर्ट के कारण पैसा गंवाया। झूठे दावे फैलाने वालों को देश से माफी मांगनी चाहिए। भारत के संस्थानों, भारत के लोगों और राष्ट्र निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटूट है। सत्यमेव जयते! जय हिंद!'
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