SBI बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव में शामिल हुए RBI गवर्नर, अर्थव्यवस्था को लेकर कहीं ये बातें

नई दिल्ली: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव शुक्रवार को शुरू हुआ। कोरोना वायरस के कहर को देखते हुए ये कॉन्क्लेव इस बार वर्चुअल आयोजित हो रहा है। जिसमें आर्थिक जगत से जुड़ी कई हस्तियां हिस्सा ले रही हैं। शनिवार को आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास भी इसमें शामिल हुए और लोगों को संबोधित किया। एसबीआई का ये सांतवा कॉन्क्लेव है।

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    आरबीआई गवर्नर के संबोधन की बड़ी बातें-

    • शक्तिकांत दास ने कहा कि COVID-19 पिछले 100 वर्षों में सबसे खराब स्वास्थ्य और आर्थिक संकट है। जिसने उत्पादन और नौकरियों पर नेगेटिव प्रभाव डाला है। इसने दुनिया भर में मौजूदा व्यवस्था, श्रम और कैपिटल के मूवमेंट को कम किया है।
    • आरबीआई गवर्नर ने कहा कि फरवरी 2019 से, संचयी आधार पर हमने कोविड-19 की शुरुआत तक रेपो रेट में 135 बेसिस अंकों की कटौती की थी। यह मुख्य रूप से विकास में मंदी से निपटने के लिए किया गया था, जो उस समय दिखाई दे रहा था और हमने अपने एमपीसी प्रस्तावों में इसके बारे में विस्तार से बताया था।
    • उन्होंने कहा कि जैसा की आप जानते होंगे MPC ने निर्णय लिया है कि रेपो रेट में 115 आधार अंकों की कटौती की जाएगी। इसलिए फरवरी 2019 से आरबीआई ने 250 आधार अंकों की कटौती की है।
    • आरबीआई गवर्नर के मुताबिक कोरोना काल ने लोगों के जीवन और आजीविका को खतरे में लाया, ऐसे में रिजर्व बैंक के इन उपायों का शिथिल प्रभाव आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के बारे में था।
    • शक्तिकांत दास ने आरबीआई के कई बड़े फैसलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यस बैंक संकट को देखते हुए रिजर्व बैंक ने तुरंत फैसला लिया। जिस वजह से उसका सफलतापूर्वक बचाव हुआ, साथ ही वित्तीय स्थिति भी सुधरी है। ये RBI की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के प्रयासों का उदाहरण है।
    • शक्तिकांत दास के मुताबिक आरबीआई के लिए आर्थिक विकास सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिसके लिए हर जरूरी कदम वक्त से उठाए जाएंगे। उनके मुताबिक वित्तीय स्थिरता के पहलू को समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
    • आरबीआई ने फरवरी के बाद से 9.57 लाख करोड़ रुपये के तरलता उपायों की घोषणा की है, जो जीडीपी के 4.5% के बराबर है।
    • शक्तिकांत दास के मुताबिक कोरोना महामारी हमारी आर्थिक और वित्तीय व्यवस्था की मजबूती और लचीलता को परखने के लिए अबतक का सबसे बड़ा टेस्ट है। उन्होंने कहा कि जोखिम को चिह्नित करने के लिए आरबीआई ने अपना निगरानी तंत्र मजबूत किया है।

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