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इन 3 सरकारी बैंकों को बेचना चाहती है सरकार, नीति आयोग ने दिया निजीकरण का सुझाव, रह जाएंगे मात्र 5 सरकारी बैंक

नई दिल्ली। बैंकिंग सिस्टम मेों आए दिन बदलाव हो रहे हैं। सरकार बैंकों पर बढ़ रहे एनपीए को कम करने के लिए निजीकरण का रास्ता अपना रही है। पहले एसबीआई में छह सरकारी बैंकों का विलय किया गया। फिर 10 सरकारी बैंकों का विलय करने का ऐलान किया गया तो अब सरकार बैंकों की सेहत सुधारने के लिए तीन बैंकों के निजीकरण का फैसला कर सकती है।

इन तीन सरकारी बैंकों के निजीकरण का सुझाव

इन तीन सरकारी बैंकों के निजीकरण का सुझाव

बैंकिंग सेक्टर को हो रहे भारी घाटे से उबारने के लिए मोदी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। सरकार का कहना है कि जितने कम सरकारी बैंक होंगे घाटा उतना काम होगा और काम करने के तरीके उतने बेहतर होंगे। बैंकों के निजीकरण से बैंकों के NPA को कम करने में आसानी होगी और बैंकों की हालात में सुधार आएगा। इसी के तहत नीति आयोग ने सरकार से सिफारिश की है कि तीन बैंकों का निजी कर दें ताकि बैंकिंग सेक्टर पर लगातार बढ़ रहे बोझ को कम किया जा सके।

 इन तीन सरकारी बैंकों के निजीकरण की तैयारी

इन तीन सरकारी बैंकों के निजीकरण की तैयारी

सरकार को दिए अपनी सिफारिश में नीति आयोग ने कहा है कि सरकार पंजाब एंड सिंध बैंक, यूको बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र पर लगातार बढ़ रहे एनपीए के बोझ को कम करने के लिए उनका निजीकरण किया जाना चाहिए। इन बैंकों को निजी हाथों में सौंप देना चाहिए। इतना ही नहीं नीति आयोग ने कहा है कि निजीकरण का मतलब है कि सरकार इन बैंकों में अपनी हिस्सेदारी को बेच दे। अपने सुझाव में नीति आयोग ने कहा है कि इन बैंकों को लगातार घाटा हो रहा है। बैंकों पर बढ़ रहे बोझ का असर सरकार की आय पर पड़ रहा है, क्योंकि सरकार की इन बैंकों में हिस्सेदारी है।

ग्रामीण बैंकों के विलय का सुझाव

ग्रामीण बैंकों के विलय का सुझाव

इतना ही नहीं नीति आयोग ने अपने सुझाव में सभी ग्रामीण बैंकों के मर्जर का भी सुझाव दिया है। इसके जरिए बैंकों के खर्च को कम किया जा सकेगा और उन्हें घाटे से उबरने में मदद मिलेगी। अगर इन बैंकों के गाटे पर नजर डाले तो पंजाब एंड सिंघ बैंक का साल 2019-20 की चौथी तिमाही में घाटा बढ़कर 236.30 करोड़ रुपए हो गया। वहीं अगर यूको बैंक की बात करें तो इस साल जून तिमाही में बैंक को 21.45 करोड़ रु का फायदा हुआ, लेकिन पिछले साल इसी तिमाही में बैंक को 601.45 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। दरअसल सरकार बैंकों के घाटे से उबारने के लिए विलय और निजीकरण का रास्ता अपना रही है। केंद्र सरकार आधे से भी अधिक सरकारी बैंकों के निजीकरण की योजना बना रही है।जिसके बाद देश में सरकारी बैंकों की संख्या घटकर मात्र 5 रह जाएगी।

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