काम की खबर: 26 मई से बदलेगा नियम, बिना पैन-आधार के ना निकाल-ना जमा कर पाएंगे इससे अधिक कैश
काम की खबर: 26 मई से बिना पैन-आधार के ना निकाल-ना जमा कर पाएंगे इससे अधिक कैश
नई दिल्ली। एक बार फिर से कैश ट्रांजैक्शन के लिए सरकार और सीबीडीटी ने नियम में बदलाव करने की तैयारी कर ली है। 26 मई से कैश निकासी और डिपॉजिट दोनों के नियम में बदलाव होने जा रहा है। आयकर विभाग ने टैक्स चोरी पर लगाम लगाने के लिए नियम में बदलाव किया है, जिसके मुताबिक 26 मई से बिना पैन कार्ड के आप ना को 20 लाख रुपए के रकम जमा करवा पाएंगे और ना ही इससे अधिक कैश खाते से निकाल पाएंगे। यानी 26 मई से कैश निकालने और जमा करने के लिए पैन कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया है। ये 20 लाख की सीमा एक वित्तीय वर्ष के लिए है। यानी एक वित्तीय वर्ष में कोई व्यक्ति अगर 20 लाख रुपए का जमा-निकासी करता है तो उसे अपना पैन कार्ड देना होगा। CBDT ने इसके लिए इनकम टैक्स के नियम 1962 में बदलाव किया है।

26 मई से बदलेगा नियम
टैक्स चोरी पर लगाम लगदाने के लिए सरकार ने लेन-देन के नियम में बदलाव करने का फैसला किया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष बोर्ड( CBDT) ने नए नियम को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया है। नए नियम के मुताबिक 26 मई से कोई बी व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में अगर 20 लाख रुपए से अधिक की राशि जमा करता है या निकालता है तो उसे अपने पैन कार्ड( PAN Card) की जानकारी देनी होगी। सीबीडीटी ने 20 लाख रुपए से अधिक के लिए आयकर नियमों में संशोधन कर पैन कार्ड को अनिवार्य कर दिया है।

नया नियम होगा लागू
नए नियम के मुताबिक 26 मई से बैंक, सहकारी बैंक, डाकघर में एक वित्तीय वर्ष में अपने खाते से 20 लाख या उससे अधिक के लेन-देन पर पैन कार्ड देना होगा। पैन कार्ड से इस रकम के लेनेदेन को ट्रैक किया जा सकेगा। वहीं बैंक ने करंट अकाउंट खोलने के नियम में भी बदलाव किया है। अब किसी को भी करंट अकाउंट खोलने के लिए अपना पैन कार्ड दिखाना होगा। वहीं जिन लोगों का बैंक अकाउंट पहले से भी पैन से लिंक हैं, लेकिन लेनदेन के समय उन्हें भी इस नियम का पालन करना होगा।

सारे खातों के लेनदेन होंगे शामिल
सीबीडीटी ने अपने नोटिफिकेशन में कहा है कि नए नियम के तहत एक वित्तीय वर्ष में एक खाते या अन्या खातों से जो भी लेनदेन 20 लाख रुपए के निकासी या जमा हैं उसपर लागू होगा। हालांकि सरकार के इस नए नियम को लेकर बैंकों को स्पष्टीकरण का इंतजार है। सरकार का कहना है कि इस नियम से न केवल टैक्स चोरी को रोका जा सकेंगे, बल्कि कैश ट्रांजैक्शन को कम कर डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना है। नए नियम के लागू होने के बाद एक वित्तीय वर्ष में ट्राजैक्शन शुरू करने के साथ ही ग्राहकों और फाइनेंशियल संस्थाओं को अपने पैन की जानकारी देनी होगी।
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