Chanda Kochhar कभी एक दिन में कमाती थीं लाखों रु, जानिए कहां हुई थी दीपक कोचर से मुलाकात?
चंदा कोचर ने मुंबई के जय हिंद कॉलेज से आर्ट्स में स्नातक करने के बाद जमनालाल बजाज इंस्टिट्यूट ऑफ बिजनेस स्टडी से मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की थी और गोल्ड मेडल जीता।
Chanda Kochhar-Deepak Kochhar: बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज ICICI बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर को बहुत बड़ी राहत दी है। उसने आज दोनों को बेल दे दी है और ये भी कहा है कि दोनों की गिरफ्तारी कानून के मुताबिक नहीं हुई थी। हाईकोर्ट ने एक-एक लाख रुपए की जमानत राशि पर दोनों को बेल दी है, मालूम हो कि सीबीआई ने लोन फ्रॉड मामले में चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर को गिरफ्तार किया था, अब सीबीआई बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी।

3250 करोड़ की हुई थी डील
आपको बता दें कि विश्व की शक्तिशाली महिलाओं में शामिल होने वाली चंदा कोचर पर भ्रष्टाचार और परिवारवाद का आरोप लगा था। मामला दिसंबर 2008 का है, तब वीडियोकॉन समूह के मालिक वेणुगोपाल धूत ने चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और उनके दो संबंधियों के साथ मिलकर एक कंपनी बनाई थी, जिसमें दोनों के बीच 3250 करोड़ की डील हुई थी।

लोन दिलाने में चंदा कोचर ने मदद की थी
सीबीआई के मुताबिक 3250 करोड़ का लोन दिलाने में चंदा कोचर ने मदद की थी और तभी धोखाधड़ी के केस में चंदा कोचर की एंट्री हुई थी, खास बात ये है कि इस लोन का 86 प्रतिशत यानी लगभग 2810 करोड़ रुपए 2017 में बैंक ने एनपीए घोषित कर दिया गया है। धूत लोन की रकम न चुकाने के बाद बैंकों द्वारा डिफॉल्टर घोषित किए जा चुके थे।

फ्रॉड मामले में चंदा कोचर का नाम
इस प्रकरण के सामने आते ही CBI ने लोन फ्रॉड मामले में चंदा कोचर, दीपक कोचर और वीडियोकॉन ग्रुप के वेणुगोपाल धूत को करप्शन चार्ज तहत अरेस्ट किया था।
चंदा बनी थीं मिसाल
चंदा कोचर का जिक्र हमेशा महिलाओं को उदाहरण देने के लिए दिया जाता था, जिन्होंने अपनी योग्यता से ना केवल अपने घर-परिवार और समाज को बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित होने का मौके दिया था।

दो बच्चे अर्जुन और आरती
17 नवंबर 1961 में जोधपुर के एक सिंधी परिवार में जन्मी चंदा शुरू से ही पढ़ाई में काफी तेज थीं। उन्होंने मुंबई के जय हिंद कॉलेज से आर्ट्स में स्नातक करने के बाद जमनालाल बजाज इंस्टिट्यूट ऑफ बिजनेस स्टडी से मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की और गोल्ड मेडल जीता और इसी पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात दीपक कोचर से हुई और फिर दोनों दोस्त बन गए, पढ़ाई पूरी करने के बाद दीपक ने चंदा के सामने शादी का प्रस्ताव रखा जिसे कि चंदा ने स्वीकार कर लिया। इस शादी से दोनों को दो बच्चे अर्जुन और आरती हैं।

चंदा कोचर इस बैंक को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी
और इसके बाद साल 1984 में चंदा कोचर ने आईसीआईसीआई बैंक में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में प्रवेश किया और तब ये किसी को नहीं पता था कि चंदा कोचर इस बैंक को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।
तीसरा सबसे बड़ा पुरस्कार पद्म विभूषण
चंदा के नए आइडिए बैंक को ग्रोथ देते गए और साल 1994 में आईसीआईसीआई बैंक सेल्फ स्वामितत्व वाली कंपनी और चंदा इसकी असिस्टेंट जनरल बनाई गईं और इसके बाद वो सफलता की सीढ़ियां चढ़ती गईं वो बैंक के शीर्ष पद पहुंच गईं और उनकी एक दिन की कमाई 2.18 लाख रु की थी। बैंकिंग के क्षेत्र में अपने योगदान के कारण चंदा को कई अवॉर्डों से नवाजा गया जिसमें भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला तीसरा सबसे बड़ा पुरस्कार पद्म विभूषण भी शामिल है।
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