नोटबंदी के बाद जीएसटी की गिरफ्त में देश की अर्थव्यवस्था
नई दिल्ली। सरकार ने गुरूवार को वित्त वर्ष की पहली तिमाही के आंकड़े जारी कर सबको हैरान कर दिया है। अप्रैल से जून में आर्थिक विकास दर घटकर 5.7 फीसदी पर आ गई है, जो पिछले तीन सालों में सबसे कम बताई जा रही है। जीडीपी दर घटने के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चौतरफा आलोचना हो रही है। इसके घाटे के लिए पिछले साल की नोटबंदी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। वहीं, दूसरे तिमाही के लिए कई अर्थशास्त्री जीएसटी को लेकर भी चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

विशेषज्ञों की माने तो नोटबंदी के बाद देश में लागू हुई नई टैक्स प्रणाली से भी आने वाले टाइम में जीडीपी को नुकसान होने वाला है। अगले दो तिमाही तक देश की अर्थव्यवस्था की हालत यही रहने वाली है। अर्थशास्त्री अंजली वर्मा के अनुसार, अगले दो तिमाही तक समग्र विकास दर में कमी आने वाली है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर विपरित प्रभाव पड़ने वाला है।
पिछले साल इसी तिमाही के दौरान आर्थिक विकास दर में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी और देश की अर्थव्यवस्था 7.4 प्रतिशत तक पहुंची थी। इन आंकड़ो से पता चलता है कि सरकार की नोटबंदी से देश की अर्थव्यस्था को नुकसान हुआ है। फिक्की ने भी जीडीपी में लगातार आ रही कमी को लेकर चिंता व्यक्त की है।
कई छोटी कंपनियों और व्यापारियों को नई टैक्स नियमों से जूझना पड़ रहा है और बिजनेस सर्वे के अनुसार अभी लंबे समय तक जीएसटी का दर्द बना रहेगा। अर्थशास्त्री ह्युगो इर्केन ने बहुत पहले ही अनुमान लगाया था कि वित्त वर्ष के पहले तिमाही में जीडीपी में 5.7 प्रतिशत तक कमी आएगी। वहीं, रबोरिसर्च ग्लोबल इकॉनमी के वरिष्ठ अर्थशास्त्री के माने तो दूसरे तिमाही में जीडीपी दर 5.9 से 6% तक रहने वाली है।












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