अडानी का मामला बेहद पेचीदा, जांच में 15 महीने लगेंगे, SEBI ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी और मोहलत
Sebi Gautam Adani Probe: रिसर्च एजेंसी हिंडनबर्ग ने अडानी ग्रुप प कॉरपोरेट दुनिया की सबसे बड़ी धोखाधड़ी का आरोप लगाया। यह आरोप ऐसे समय आया जब अडानी ग्रुप 20 हजार करोड़ रुपये का एफपीओ जारी करने वाला था।

Gautam Adani Probe: अडानी-हिंडनबर्ग मामले की जांच पूरी होने में अभी और वक्त लगेगा। जांच एजेंसी बाजार नियामक संस्था सेबी (SEBI) ने सुप्रीम कोर्ट में इस बात की जानकारी दी है। सेबी (SEBI) ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अडानी-हिंडनबर्ग मामले की जांच में छह पहले से तय समय सीमा से छह महीने अधिक का वक्त लगेगा। सेबी ने कहा कि हमें इस जांच को सही तरीके से करने के लिए लगभग 15 महीने का वक्त चाहिए।
SEBI ने सुप्रीम कोर्ट को बताई मामले की जटिलता
सेबी (SEBI) ने कहा कि अडानी और हिंडनबर्ग से जुड़ा मामला बेहद पेचीदा है। इसलिए इसकी हर बारिकी को सही तरीके से जांच करनी होगी। SEBI ने कहा कि इस मामले की जांच में कम से कम 15 महीने लगेंगे। SEBI ने यह भी कहा कि अमेरिका में इस तरह के मामले की जांच के लिए 9 महीने से लेकर पांच साल तक लग जाते हैं।
अडानी ग्रुप के प्रमुख प्रबंधकीय व्यक्तियों को हटाने की जरूरत पड़ सकती है
सेबी ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी कहा है कि हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच पूरी होने से पहले सात सूचीबद्ध अडानी कंपनियों से प्रमुख प्रबंधकीय व्यक्तियों को पदच्युत करने की आवश्यकता हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने बनाई थी कमेटी
दरअसल, हिंडबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद अडानी ग्रुप ऑफ कंपनीज के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2 मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट के ही पूर्व जस्टिस अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति का गठन कर मामले की जांच के लिए दो महीने दिया था। साथ ही SEBI को भी इस मामले की जांच जारी रखने के लिए कहा था।
24 जनवरी को हिंडनबर्ग रिसर्च जारी हुई थी
आपको बता दें कि 24 जनवरी को हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अडानी ग्रुप की शेयर बाजार में लिस्टेड अहम कंपनियों पर काफी कर्ज है। इसमें कहा गया है कि अडानी ग्रुप अपनी उन स्कीमों को प्रमोट करके शेयर मार्केट को कंट्रोल कर रही थी जो फ्राड हैं। इस रिपोर्ट में अडानी ग्रुप की कंपनियों को 85 फीसदी से ज्यादा ओवरवैल्यूड भी बताया गया है और बताया गया है कि इनकी वजह से ही ग्रुप पर संकट है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में मॉरीशस और कैरेबियन जैसे विदेशी टैक्स हैवेन में मौजूद कंपनियों के द्वारा अडानी ग्रुप की नीति पर सवाल खड़े किए गए थे।












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