IRS के टैक्स बढ़ाने के सुझाव को वित्त मंत्रालय ने किया खारिज, अधिकारियों से मांगी सफाई
नई दिल्ली। कोरोना वायरस संकट में देशव्यापी लॉकडाउन के चलते होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए सीनियर टैक्स अधिकारियों के एक ग्रुप ने सरकार को एक सुझाव दिया था जिसे केंद्र ने ठुकरा दिया है। भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) एसोसिएशन ने केंद्र को सुझाव दिया था कि विदेशी कंपनियों पर हायर लेवी और सुपर रीच टैक्स लगाया जाए ताकि सरकार को कोरोनो वायरस महामारी से लड़ने में मदद करने के लिए शॉट टर्म उपायों के तौर पर कैश रखा जा सके। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने इस सुझाव को अस्वीकार कर दिया है।

गौरतलब है कि 25 मार्च से लागू किए गए देशव्यापी लॉकडाउन के केंद्र सरकार को आर्थिक मोर्चे पर भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है, अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनाए रखने के लिए सरकार कई बड़े कदम उठा रही है। इसी दिशा में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी) के चेयरमैन पीसी मोडी को 50 आईआरएस अधिकारियों ने 'कोविड-19 महामारी के वित्तीय विकल्प और प्रतिक्रिया (फोर्स)' नामक दस्तावेज में कई सुझाव दिए। इनमें अमीरों पर टैक्स बढ़ाने का सुझाव मुख्य था।
सुझाव पत्र में आईआरएस ने सरकार को सलाह दिया कि कोरोना वायरस संकट में फंड का इंतजाम करने के लिए 40% तक की आयकर दर बढ़ाने, सुपर-रिच टैक्स लगाने और 4% COVID-19 राहत उपकर लगाने का सुझाव दिया गया था। सुझाव में कहा गया कि वर्ष में 1 करोड़ रुपए से अधिक आमदनी वालों से 30 फीसदी की बजाय 40 फीसदी टैक्स वसूल किया जाए। इसके अलावा 5 करोड़ रुपए से अधिक संपत्ति वालों पर वेल्थ टैक्स लगाने का भी सुझाव दिया गया है।
आईआरएस अधिकारियों की लगाई क्लास
हालांकि वित्त मंत्रालय ने आईआरएस के फोर्स सुझाव को अस्वीकार कर दिया है। मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को अपरिपक्व बताया है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने इसे कुछ अधिकारियों का गैर जिम्मेदाराना रवैया भी बताया है। इस मामले में अब सीबीडीटी से लिखित सफाई मांगने को कहा गया। ये भी साफ किया गया है कि आईआरएस अधिकारियों को न तो ऐसी रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया था और न ही ये उनके अधिकार क्षेत्र में आता है।
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