Crude Oil Price Hike: हॉर्मुज पर ट्रंप की घेराबंदी से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल,भारत में क्या है रेट?
Crude Oil Price Hike: दुनिया एक बार फिर बड़े ऊर्जा संकट की दहलीज पर खड़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) की नौसैनिक घेराबंदी (Naval Blockade) के आदेश के बाद वैश्विक तेल बाजारों में हड़कंप मच गया है।
इस फैसले के तुरंत बाद कच्चे तेल की कीमतों में 7 प्रतिशत तक का जबरदस्त उछाल देखा गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यानी 13 अप्रैल को जब दुनिया भर के शेयर बाजार खुलेंगे, तो उनमें भारी गिरावट देखने को मिल सकती है, जबकि कच्चा तेल $115 प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकता है।

Strait of Hormuz पर क्यों लिया गया घेराबंदी का फैसला?
यह तनाव तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान के इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता पूरी तरह विफल हो गई। ईरान ने अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। इसके जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने सख्त कार्रवाई करते हुए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्ग (Oil Transit Route) 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' को ब्लॉक करने का आदेश दे दिया।
दिलचस्प बात यह है कि इस सैन्य कार्रवाई से ठीक पहले ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक रहस्यमयी पोस्ट की थी। उन्होंने लिखा था, मिड-टर्म चुनाव से पहले तेल और गैस की कीमतें कम भी हो सकती हैं और शायद थोड़ी ज्यादा भी। अब जबकि उन्होंने खुद ही घेराबंदी का आदेश दिया है, यह साफ है कि ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का दौर लंबा चलने वाला है। ट्रंप का यह कदम न केवल ईरान को घुटनों पर लाने की कोशिश है, बल्कि आगामी अमेरिकी चुनावों से पहले उनकी 'मजबूत नेता' की छवि को भी दर्शाता है।
बाजार में मची खलबली: $96 के पार पहुंचा क्रूड ऑयल
पारंपरिक बाजारों के बंद होने के बावजूद, डिसेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म 'हाइपरलिक्विड' (Hyperliquid) पर तेल की कीमतों ने आसमान छू लिया। इसकी कीमत 7% उछलकर $96.40 पर पहुंच गई। प्लेटफॉर्म पर इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम $1.53 बिलियन दर्ज किया गया। ब्रेंट फ्यूचर्स भी 6% की बढ़त के साथ $96 के स्तर को छू गया।
मार्केट में महंगाई और मंदी का खतरा: भारत समेत दुनिया पर असर
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का वह 'चोकपॉइंट' है जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग के बंद होने का मतलब है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की भारी कमी हो जाएगी। तेल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे खाने-पीने की चीजों से लेकर हर चीज के दाम बढ़ेंगे।
शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। 13 अप्रैल को वैश्विक बाजारों में 'ब्लैक मंडे' जैसी स्थिति बन सकती है। निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों जैसे बिटकॉइन (Bitcoin) और शेयरों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर भाग सकते हैं।
मार्केट गुरुओं का मानना है कि आपातकालीन तेल भंडार पहले ही अपनी सीमा पर हैं। ऐसे में यदि यह घेराबंदी जारी रहती है, तो दुनिया में तेल की भारी किल्लत हो सकती है। कल 13 अप्रैल को बाजारों में 'शेडिंग' यानी बिकवाली का दौर चलने की पूरी आशंका है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। हॉर्मुज की घेराबंदी भारत के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है, क्योंकि भारत का अधिकांश तेल आयात इसी रास्ते से होता है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें: अगर कच्चा तेल $115 के पार जाता है, तो भारतीय तेल कंपनियों (OMCs) पर भारी दबाव पड़ेगा। हालांकि भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदने की रणनीति अपनाई है, लेकिन वैश्विक बेंचमार्क में बढ़ोतरी घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
महंगाई का खतरा: ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई (Logistics) महंगी होगी, जिससे सीधे तौर पर खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामानों के दाम बढ़ेंगे।
शेयर बाजार में हलचल: 13 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार (Sensex/Nifty) के लिए भी काफी चुनौतीपूर्ण दिन होने वाला है। निवेशक 'रिस्क एसेट्स' जैसे शेयर और बिटकॉइन (Bitcoin) से पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख कर सकते हैं।
क्या कहते हैं आर्थिक जानकार?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह घेराबंदी जारी रहती है, तो सोमवार को तेल की कीमतें $115-$120 तक जा सकती हैं। आपातकालीन तेल भंडार (Strategic Reserves) भी अपनी सीमा पर हैं, जिससे कीमतों को नियंत्रित करना लगभग नामुमकिन होगा। कल सुबह भारतीय शेयर बाजार (Sensex/Nifty) के लिए भी काफी चुनौतीपूर्ण होने वाली है।
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