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शेयर बाजार में रिकॉर्ड बुल रन, कहीं निवेशकों को भारी ना पड़ जाए

दुनियाभर के बाजारों में एक तरफ जहां उथल-पुथल मची है, ऐसे में भारतीय बाजार में लगातार बुल रन जारी है। पिछले चार वर्षों में भारतीय बाजार ने जबरदस्त बुल रन दिखाई है, जोकि अभी अभी जारी है। महज चार वर्षों में सेंसेक्स 27000 से बढ़कर 81 हजार के आंकड़े को पार कर गया है। कोरोना काल में बाजार में आई बड़ी गिरावट के बाद बाजार ने ना सिर्फ रिकवरी की बल्कि बाजार ऐतिहासिक दौड़ लगानी शुरू कर दी।

कोरोना काल से पहले सेंसेक्स 41,000 से उपर था, लेकिन लॉकडाउन के ऐलान के साथ ही बाजार धड़ाम होकर 28,000 से नीचे चले गए। लेकिन महज 6 महीनों के भीतर बाजार ने पूरी रिकवरी कर ली और 40,000 के पार पहुंच गया। इसके बाद से भारतीय बाजार ने पलटकर नहीं देखा और लगातार बुल रन जारी है।

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पिछले महीने जापान के केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के कमजोर होने के कारण वैश्विक व्यापार को झटका लगा था।

तमाम बाजार धड़ाम हो गए थे, लेकिन भारतीय बाजार में इसका कोई असर देखने को नहीं मिला। जिस तरह से तमाम बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए बाजार में तेजी है, उसके बाद बाजार में करेक्शन का डर निवेशकों को सता रहा है।

निवेशकों को बाजार में नई खरीदारी से पहले कई अहम बातों के बारे में जागरूक रहने की जरूरत है। अमेरिकी चुनाव के नतीजे ब्याज दरों को प्रभावित कर सकते हैं, मोदी सरकार किस तरह से गठबंधन के सहयोगियों के साथ सरकार को चलाती है यह काफी अहम होने वाला है।

इसके अलावा एसएमई बाजार में जोखिम काफी ज्यादा है। कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव (विशेष रूप से कच्चे तेल) और आगामी राज्यों में होने वाले चुनाव के नतीजे काफी अहम होने वाले हैं। इन तमाम अहम मुद्दों पर निवेशकों को नजर बनाए रखने की जरूरत है।

एडलवाइस म्यूचुअल फंड के अध्यक्ष और सीआईओ-इक्विटीज त्रिदीप भट्टाचार्य ने निवेशकों को अमेरिकी चुनाव परिणामों और दरों में कटौती पर उनके प्रभाव पर नज़र रखने का सुझाव दिया है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एनडीए 3.0 सरकार द्वारा गठबंधन वार्ता को संभालने के तरीके के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जो नीति दिशा को प्रभावित कर सकता है।

इसके साथ ही निवेशकों द्वारा रिकॉर्ड निवेश के पीछे कोई मजबूत वजह नहीं होने का भी डर बाजार में बना हुआ है। ऐसे में कमोडिटी की कीमतों, विशेष रूप से कच्चे तेल से संभावित बदलाव के चलते बाजार में उठापटक आने वाले समय में देखने को मिल सकती है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

पीजीआईएम इंडिया एएमसी में अल्टरनेटिव्स के सीआईओ अनिरुद्ध नाहा बताते हैं कि चीन जैसे प्रमुख बाजारों से मांग में कमी वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि चीन के बढ़ते निर्यात से भारतीय कंपनियों के लिए चिंता का विषय है।

अमेरिका में वाणिज्यिक रियल एस्टेट लोन के साथ समस्याओं का भी उल्लेख किया, जहां कोविड के बाद कार्यालय स्थान के कम उपयोग कर रहे हैं, जिससे किराये और ऋण सेवा को प्रभावित किया है, जो संभवतः अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने बाजार मूल्यांकन पर नजर रखने की सलाह दी क्योंकि वे बहुत बेहतर स्थिति में नहीं हैं।

क्वांटम फंड की राय

क्वांटम एमएफ के फंड मैनेजर जॉर्ज थॉमस का मानना ​​है कि कई मार्केट सेगमेंट, खास तौर पर स्मॉल-कैप में ऊंचे वैल्यूएशन पर कड़ी निगरानी की जरूरत है।

वह खुदरा निवेशकों के प्रवाह पर नजर रखने के महत्व पर भी जोर देते हैं क्योंकि कई निवेशक उच्च रिटर्न की तलाश में बाजार में आए हैं; कोई भी सुधार इन उम्मीदों को प्रभावित कर सकता है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में विकास और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी घटनाओं पर भी बारीकी से नजर रखनी चाहिए।

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