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Budget 2025: एजुकेशन सेक्टर को इस बार के बजट से हैं क्या उम्मीदें? जानिए किस बदलाव की उठ रही मांग

Budget 2025: केंद्रीय बजट 2025-26 की प्रस्तुति में अब सिर्फ 2 दिन बाकी हैं, और शिक्षा क्षेत्र की नजरें इस बजट पर टिकी हुई हैं। इस बार शिक्षा क्षेत्र को अधिक धन आवंटन की उम्मीद है, जिससे स्कूलों और उच्च शिक्षा को और मजबूती मिल सके।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए शिक्षा बजट में वृद्धि आवश्यक मानी जा रही है। इसके अलावा, डिजिटल शिक्षा, तकनीकी नवाचार और कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए जाने की उम्मीद है।

Budget 2025

साथ ही, सरकार से एडटेक और स्टार्टअप इंडस्ट्री के विकास के लिए ठोस कदम उठाने की भी अपेक्षा की जा रही है, ताकि भारत की युवा पीढ़ी वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सके। शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने इस बजट से अपनी उम्मीदें साझा की हैं।
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शिक्षा के लिए 6% जीडीपी आवंटन की मांग

ईटी नाउ की एक रिपोर्ट एक अनुसार शिव नादर स्कूल की डिप्टी सीईओ आरती दावर का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत 2035 तक उच्च शिक्षा में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) को 50% तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके लिए शिक्षा को GDP का 6% आवंटित करने की जरूरत है।

उन्होंने सरकार से इंडस्ट्री के साथ सहयोग बढ़ाने, इंटर्नशिप और कौशल आधारित ट्रेनिंग को बढ़ावा देने और PM विद्यालक्ष्मी योजना के तहत मेधावी छात्रों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।

आयकर में छूट और शिक्षा में निवेश की जरूरत

ग्रेट लेक्स इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, चेन्नई के डीन सुरेश रमणाथन का मानना है कि बजट 2025-26 सरकार के लिए आयकर स्लैब में संशोधन या छूट सीमा बढ़ाने का अच्छा मौका है। इससे मध्यम वर्ग को राहत मिलेगी। साथ ही, उन्होंने ग्रीन एनर्जी, कौशल विकास और AI स्टार्टअप्स में निवेश को बढ़ावा देने के लिए टैक्स छूट की मांग की। इससे देश के दीर्घकालिक आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी।

वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए उच्च शिक्षा में सुधार जरूरी

शूलिनी यूनिवर्सिटी, सोलन के कुलपति अतुल खोसला ने कहा कि भारत 4 ट्रिलियन डॉलर से 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 3 मिलियन नए लीडर्स तैयार करने होंगे। उन्होंने शिक्षा संस्थानों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

डिजिटल शिक्षा और ग्रामीण स्कूलों के लिए बजट बढ़ाने की मांग

डीपीएस इंदिरापुरम के बोर्ड सदस्य गिरीश सचदेव का कहना है कि सरकार को ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अधिक फंड आवंटित करना चाहिए। उन्होंने ऑनलाइन लर्निंग टूल्स, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम्स पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई, जिससे डिजिटल डिवाइड को कम किया जा सके।

स्टार्टअप्स और उद्यमिता को बढ़ावा देने की जरूरत

ग्रेट लेक्स इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, गुरुग्राम के असिस्टेंट प्रोफेसर स्वपनिल साहू का कहना है कि स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत 1.17 लाख से अधिक स्टार्टअप्स पंजीकृत हो चुके हैं, जिससे 15.53 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा हुई हैं। उन्होंने स्टार्टअप्स के लिए टैक्स छूट, फंडिंग को आसान बनाने और नियमों को सरल बनाने की मांग की।

ग्रामीण शिक्षा और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए समर्थन

हिंदुस्तान इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, चेन्नई के डॉ. पीएस कृष्णा राजन का मानना है कि ग्रामीण इलाकों और कमजोर आर्थिक वर्गों के लिए कम फीस वाले स्कूलों की स्थापना की जानी चाहिए। उन्होंने छात्रवृत्ति, सस्ते शिक्षा ऋण, और माता-पिता के लिए छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए किफायती ऋण योजनाओं की मांग की, जिससे उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें।

मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए ठोस नीति जरूरी

प्रोफेसर और प्रमुख, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, हिंदुस्तान इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस एमके बद्रीनारायणन का कहना है कि मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे बढ़ती लागत, नौकरी की असुरक्षा, स्वास्थ्य खर्च और सामाजिक सुरक्षा की कमी। उन्होंने सरकार से आयकर में छूट, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ाने और छोटे उद्यमों के लिए सस्ती फंडिंग उपलब्ध कराने की मांग की।

नए जमाने की तकनीक को शिक्षा में शामिल करने की जरूरत

मेधावी स्किल्स यूनिवर्सिटी के संस्थापक प्रवेश दुदानी ने कहा कि बजट में AI, IoT और रोबोटिक्स जैसी नई तकनीकों को शिक्षा के मुख्यधारा पाठ्यक्रमों में शामिल करने के लिए पर्याप्त धन आवंटित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च बढ़ाने और इंडस्ट्री-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने से भारत की शिक्षा प्रणाली को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सकता है।

कक्षा 12 तक डिजिटल शिक्षा को प्राथमिकता देने की जरूरत

नमन जैन, वाइस चेयरमैन, सिल्वरलाइन प्रेस्टिज स्कूल, गाजियाबाद ने कहा कि डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, इंटरनेट एक्सेस और आधुनिक उपकरणों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने AI, VR और AR जैसी तकनीकों का उपयोग कर शिक्षा को अधिक इंटरएक्टिव और व्यक्तिगत बनाने की जरूरत बताई।

अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के लिए समर्थन जरूरी

EduVib के संस्थापक और सीईओ वसीम जावेद का कहना है कि 13.35 लाख भारतीय छात्र विदेशों में पढ़ाई कर रहे हैं, इसलिए बजट में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा को सरल और वित्तीय सहायता को अधिक सुलभ बनाने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।

शिक्षा क्षेत्र को सबसे अधिक बजट आवंटन की उम्मीद

सेंटूरियन यूनिवर्सिटी, ओडिशा की कुलपति सुप्रिया पटनायक ने कहा कि सरकार को उद्योग-अकादमिक साझेदारी को बढ़ावा देने और शिक्षा में कौशल विकास पर ध्यान देने के लिए बजट में अधिक आवंटन करना चाहिए।
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