Budget 2025: आम जनता की परेशानियों को कम करके विकास को ऐसे मिल सकता है बढ़ावा, क्या हैं बजट के लिए अहम सुझाव?
Budget 2025: भारत के आगामी बजट 2025 में कर व्यवस्था को सरल और प्रभावी बनाने के लिए Deloitte ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इन सुझावों का मुख्य उद्देश्य देश में व्यापार को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश को आकर्षित करना और भारतीय उद्योगों में नवाचार को प्रोत्साहित करना है।
Deloitte के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सुझावों को लागू किया जाता है तो इससे भारत की अर्थव्यवस्था में स्थिरता आएगी और व्यवसायों को अधिक सहारा मिलेगा। उन्होंने बजट में कुछ अहम कर सुधारों की सिफारिश की है, जिनमें अनुसंधान और विकास (R&D) के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव्स का विस्तार, कॉर्पोरेट कर दरों में कमी और सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) को बढ़ावा देना शामिल है।

इसके अलावा, व्यक्तिगत करदाताओं के लिए संपत्ति खरीद पर कर अनुपालन को सरल बनाने और विदेशी बैंकों से कर भुगतान की अनुमति देने जैसे कदम भी सुझाए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य कर प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाना है, ताकि छोटे और मध्यम व्यवसायों को भी इसके लाभ मिल सकें। साथ ही, यह विदेशी निवेशकों के लिए भारत को एक आकर्षक बाजार बनाने में मदद करेगा। यदि इन प्रस्तावों को बजट 2025 में लागू किया जाता है, तो यह भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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नीति और अर्थव्यवस्था
डेलॉइट ने सुझाव दिया है कि पोर्ट, शिपिंग, हरित ऊर्जा और शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाया जाए। इसके अलावा, सब्सिडी की बचत को ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और नकद प्रोत्साहन योजनाओं में लगाने का सुझाव दिया गया है ताकि ग्रामीण आय को बढ़ावा मिल सके। साथ ही, नए और मौजूदा बाजारों को मजबूत करने की जरूरत है।
कर सुधार
प्रत्यक्ष करों में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव्स (PLI) की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, अप्रत्यक्ष करों में कस्टम्स के लिए एमनेस्टी स्कीम और FTA के तहत अनुपालन को आसान बनाने की बात की गई है। साथ ही, कर दरों में भी कुछ बदलावों का सुझाव दिया गया है।
व्यक्तिगत कर
व्यक्तिगत कर प्रणाली को सरल बनाने के लिए गैर-निवासियों के लिए संपत्ति खरीदने में कर अनुपालन को आसान बनाने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, विदेशों से कर भुगतान और कर वापसी के लिए नए नियमों की सिफारिश की गई है।
शिक्षा
शिक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने, GIFT सिटी में विदेशी शिक्षा संस्थानों को INR में फीस लेने की अनुमति देने और विदेशी स्रोतों से अनुदान और दान की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने का सुझाव दिया गया है।
कृषि और ग्रामीण विकास
कृषि क्षेत्र में उपज सुधार के लिए कार्यक्रम शुरू करने, बीज सुधार और डिजिटल कृषि को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है। किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को भी मजबूत किया जाएगा।
ऑटोमोबाइल
ऑटोमोबाइल सेक्टर में GST दरों को सरल बनाने, हाइब्रिड वाहनों पर टैक्स कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के निर्माताओं के लिए रिफंड प्रक्रिया को आसान बनाने की बात की गई है।
स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान
स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान के क्षेत्र में नियामक ढांचे को सुधारने, मेडिकल उपकरणों के आयात के लिए नीति बनाने और घरेलू दवा निर्माण को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया है।
वित्तीय सेवाएं और अंतरिक्ष
वित्तीय सेवाओं में GIFT सिटी को और बढ़ावा देने और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र को विविधतापूर्ण बनाने की बात की गई है। साथ ही, अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए टैक्स छूट और स्पेस एक्ट को लागू करने की सिफारिश की गई है।
सतत विकास
सतत विकास के लिए पीएम सूर्य घर योजना को मजबूत करने और प्रदूषण कम करने के लिए कदम उठाने की बात की गई है। जलवायु परिवर्तन और हरित ऊर्जा में निवेश को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।
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