Bulandshahr: तारबंदी कर श्मशान घाट को अगड़ी-पिछड़ी जातियों में बांटा, प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
Bulandshahr News, बुलंदशहर। डिजिटल इंडिया के समय में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो वाकई इंसानियत को शर्मसार करने वाली है। दरअसल, बुलंदशहर जिले के पहासू ब्लॉक के बनल गांव में स्थित श्मशान घाट को जाति के आधार पर दो हिस्सों में बांट दिया गया है। इस श्मशान घाट में एक तरफ अगड़ी जातियों के लोगों के शव जलाए जाते हैं, वहीं तार के दूसरा तरफ दलितों के।

श्मशान घाट में तारबंदी की खबर मीडिया की सुर्खियां बनी तो जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में इस मामले का संज्ञान बुलंदशहर के जिलाधिकारी ने लिया और अधिकरियों को मौके पर जांच के लिए भेजा गया है। प्राप्त समाचार के मुताबिक, श्मशान घाट में की गई तार बंदी को हटा दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। बीडीओ घनश्याम वर्मा का कहना है कि अभी मामले की जांच कराई जा रही है, जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

2017-18 में इस श्मशान घाट का निर्माण हुआ था। यह जब श्मशान बना था, उसके 6 महीने बाद ही ग्राम प्रधान ने श्मशान के दो हिस्से करा दिए थे। गांव के रहने वाले सचिन वर्मा ने बताया कि इस श्मशान घाट में एक तरफ दलित और दूसरी तरफ अगड़ी जाति के शवों का अंतिम संस्कार होता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक राजेन्द्र सिंह उर्फ रज्जू भैया के पैतृक गांव से जातीय भेदभाव की जो तस्वीर सामने आई हैं, वो न सिर्फ इंसानियत को शर्मसार करती हैं, बल्कि सवाल भी खड़ा करती हैं?
ग्रामीण मानते हैं कि जातीय भेदभाव के चलते इस तरह की तारबंदी किया जाना गलत है, लेकिन जब यहां तारबंदी की गई होगी उस वक्त किसी की ओर से इसका विरोध नहीं किया गया होगा, अगर किया गया होता, तो ऐसा नहीं होता। श्मशान घाट में तार बंदी की खबरे मीडिया में सुर्खियां बनी तो जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। बुलंदशहर के जिलाधिकारी ने मामले का संज्ञान लेते हुए अधिकरियों को मौके पर जांच के लिए भेज है।












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