अजीबो गरीब परंपरा: मरने के बाद अपनों की लाश को खा जाते हैं ये लोग
अजीबोगरीब परंपरा: मरने के बाद अपनों की लाश को खा जाते हैं ये लोग
नई दिल्ली। भले ही आपको सुनने में अजीब लगे, लेकिन ये सच है। दुनिया में एक जनजाति ऐसी भी है, जहां के लोग अपनों के मरने के बाद उसकी लाश को खा जाते है। आमूमन मरने के बाद शवों को दफनाया या जलाया जाता है, लेकिन एक ऐसी जनजाति भी हैं, जिसके लोग अब तक अपनी पुरानी परंपराओं को मान रहे हैं और जब भी किसी की मौत हो जाती है तो उसकी लाश को जलाने या दफनाने के बजाए सब मिलकर खा जाते हैं।

अजीब परपंरा
दुनिया में इंसानों की बहुत सारी ऐसी जनजातियां हैं, जिनसे आप अनजान है। उनका रहन सहन, उनकी रीति-रिवाज, परंपराएं और संस्कृति सब अलग है। ऐसी ही एक जनजाति है यानोमामी । इस जनजाति से जुड़ा एक अजीबो-गरीब रिवाज है, जो आपको हैरान कर देगा। आप जानकर दंग रह जाएगे कि इस जनजाति के लोग अपने ही लोगों के मरने पर उनका मांस खा जाते हैं। ये जनजाति साउथ अमेरिका के ब्राजील में पाई जाती है।

क्या है एंडो-केनिबलवाद
यानोमामी जनजाति के बारे में 'द गार्जियन' ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इस जनजाति के लोगों को यनम और सीनेमा के नाम से भी जाना जाता है। ये जनजाति अभी भी अपनी पुरानी परंपरा को मानती है। इनपर अब तक आधुनिकीकरण और पश्चिमीकरण का असर नहीं पड़ा है। इस जनजाति के लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं का अनुपालन करते हैं और बाहरी लोगों की दखलअंदाजी को पसंद नहीं करते। बाहरी लोगों को यहां खतरा हैं। जनजाति के लोग उन्हें अपने में शामिल नहीं होने देते और कई बार उपर हमला कर लेते हैं। इन जनजाति के लोगों का अंतिम संस्कार बहुत की अजीब है, जिसे एंडो-केनिबलवाद कहते हैं।

मरने के बाद लाश की दावत
इस जनजाति की परंपरा के मुताबिक अगर घर में किसी की मृत्यु हो जाती है तो घऱ के बाकी लोग इकट्ठा होते हैं और मरने वाली की लाश को पूरी तरह से जलाकर खाते हैं। इस परंपरा के मुताबिक पहले शव को जलाया जाता है, फिर उसके चेहरे को पेंट किया जाता है और फिर घर के सभी लोग इकट्ठा होकर उसे खा जाते हैं। ये लोग गीत गाकर मौत का दुख मनाते हैं। भले ही आपको ये अजीब लगे, लेकिन सालों से ये लोग इसी परंपरा को मानते आ रहे हैं।
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