UP Police ने तो हद मचा दी! चोर के पते पर जज की तलाश शुरू, कोर्ट में कहा- 'नगमा खान' नाम का कोई नहीं मिला
Uttar Pradesh Police (UP Police): उत्तर प्रदेश पुलिस अपने कार्यशैली को लेकर अक्सर चर्चाओं में आ जाती है। हाल ही में कानपुर में एक मेमने को लेकर किया गया पुलिस का फैसला चर्चाओं में था, कि कैसे पुलिस ने मेमने को लेकर दावा करने वाली दो महिलाओं में असली मालिक का पता लगाया। वहीं अब फिरोजाबाद से पुलिस अधिकारी की एक अजीबोगरीब गलती सामने आई है, जो खासा चर्चाओं में है।
दरअसल, फिरोजाबाद में एक अजीबोगरीब गलती करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारी ने चोरी के एक सालों पुराने मामले में असली आरोपी की जगह जज की तलाश शुरू कर दी, क्योंकि उसने आधिकारिक नोटिस पर गलती से चोर की जगह जज का नाम लिख दिया।

जानकारी के मुताबिक करीब 24 साल पुराने चोरी के मामले में आरोपी को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया गया था। लेकिन अब उसकी गलती के बाद आरोपी एसआई को एसएसपी ने लाइन हाजिर कर दिया है। इसी के साथ विभागीय जांच भी शुरू की गई है।
सब-इंस्पेक्टर का कांड, चोर की जगह जज का लिखा नाम
हुआ यूं कि कोर्ट का आदेश देने के लिए नियुक्त एक सब-इंस्पेक्टर (एसआई) गलत व्यक्ति यानी आदेश जारी करने वाले जज की ही तलाश शुरू कर दी। यह उलझन पिछले महीने तब सामने आई जब चोरी के संदिग्ध राजकुमार को कोर्ट नोटिस देने के लिए नियुक्त सब-इंस्पेक्टर बनवारीलाल ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नगमा खान को बताया कि आरोपी 'नगमा खान' पूरी तलाशी के बाद भी अपने घर पर नहीं मिली।
चोर के पते पर जज की तलाश
पुलिस अधिकारी ने अदालत से कहा, "जब मैंने संलग्न गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) की तामील की, तो नगमा खान के दिए गए पते पर गहन तलाशी ली गई। हालांकि, उस नाम का कोई भी आरोपी वहां नहीं मिला। इसलिए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया आगे के आदेश दें।"
दारोगा लाइन हाजिर, जज ने लगाई फटकार
इसके बाद मजिस्ट्रेट ने पुलिस अधिकारी की खिंचाई और 24 मार्च को दिए गए आदेश में मजिस्ट्रेट ने कहा कि यह अजीब है कि पुलिस अधिकारी को इस बात का 'बहुत कम या बिल्कुल भी पता नहीं था' कि अदालत ने क्या भेजा था, किसने भेजा था और किसके खिलाफ भेजा था। मजिस्ट्रेट नगमा खान ने कहा, "प्रक्रिया पर जरा भी ध्यान दिए बिना, उन्होंने लापरवाही से उद्घोषणा को गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) के रूप में संदर्भित किया और बिना सोचे-समझे पीठासीन अधिकारी का नाम लिख दिया।"
'कर्तव्यों के बारे में कुछ भी नहीं पता है'
मजिस्ट्रेट ने कहा कि संबंधित पुलिस स्टेशन के अधिकारी, जिन्हें सीआरपीसी की धारा 82 के तहत जारी उद्घोषणा पर कार्रवाई करनी थी, को स्पष्ट रूप से इस बात की बुनियादी समझ नहीं थी कि दस्तावेज में क्या आवश्यक है। ऐसा लगता है कि उन्होंने इसे ठीक से पढ़ा भी नहीं। यह गंभीर गलती एक पुलिस अधिकारी के रूप में उनके आचरण को बहुत खराब तरीके से दर्शाती है और दिखाती है कि उन्हें अपने ऊपर लगाए गए कर्तव्यों के बारे में कुछ भी नहीं पता है।
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