'ना डीएनए-ना गवाह', थाने में ऐसे हुआ कौन है मेमने की मां का फैसला? पुलिसकर्मी भी मुस्कुरा उठे
Kanpur Lambs dispute Bizarre News: अगर आपको लगता है कि अदालतों में ही मुकदमे चलते हैं, तो जरा ठहरिए। उत्तर प्रदेश के कानपुर के कल्याणपुर पुलिस थाने में शनिवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने पुलिसवालों से लेकर जनता तक सभी को मुस्कुरा दिया। मामला था एक मेमने की 'मां पहचान' का, जी हां..दो महिलाओं के बीच ये विवाद हो गया कि एक प्यारा सा मेमना किसकी बकरी का बच्चा है?
दरअसल, चंद्रा देवी और मीना कुमारी, दोनों महिलाएं एक ही मेमने को अपनी-अपनी बकरी का बच्चा बता रही थीं। चंद्रा देवी की बकरी सफेद रंग की थी, जबकि मीना कुमारी की बकरी थी काले रंग की। मेमना दोनों के रंग का मिला-जुला कॉम्बिनेशन था यानी काला और सफेद। अब बात तो पेचीदा थी, कोई गवाह नहीं, कोई सबूत नहीं। ऐसे में पुलिस भी कुछ पल के लिए सोच में पड़ गई।

थाने में हुआ 'ड्रामा', फिर आया आइडिया!
इंस्पेक्टर सुबोध कुमार ने दोनों महिलाओं की पूरी बात सुनी। फिर जो तरीका निकाला, वो पुलिसिंग की दुनिया में मिसाल बन गया। उन्होंने दोनों बकरियों को थाने के दो कोनों में बंधवाया और कहा, "अब बच्चा छोड़ा जाएगा, जो बकरी इसकी मां होगी, वो जाकर उसी से दूध पीएगा।"
महिलाएं राजी हो गईं। फिर क्या था? मेमना छोड़ा गया। पहले थोड़ी देर इधर-उधर घूमा, फिर दौड़कर सीधे चंद्रा देवी की सफेद बकरी से लिपटकर दूध पीने लगा। ये देख वहां मौजूद हर शख्स के चेहरे पर मुस्कान आ गई, कुछ ने ताली भी बजा दी।
मेमने की मासूमियत ने जीत लिया दिल
मीना कुमारी भी मुस्कुरा उठीं और बोलीं, "सर, मुझसे गलती हो गई। मेरी बकरी का बच्चा कुछ दिन पहले खो गया था, वही रंग था, तो मुझे लगा यही है।" इस पर चंद्रा देवी ने भी शांति से कहा, "अगर मैं होती तो शायद मैं भी यही करती।"
इंस्पेक्टर की सूझबूझ ने किया कमाल
इधर, इंस्पेक्टर सुबोध कुमार ने इस फैसले को लेकर कहा, "बच्चा चाहे इंसान का हो या जानवर का, मां को पहचानता है। यही सोचकर ये तरीका अपनाया, और सच में काम कर गया।" ये मामला भले ही थाने की फाइल में दर्ज नहीं हुआ, लेकिन वहां मौजूद हर चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान जरूर दर्ज हो गई। इंसानियत और जानवरों की ममता की यह अनोखी मिसाल, शायद ही कोई भूल पाए।












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