बिल्ली के बच्चे बन रहे हैं डॉक्टर, इंजीनियर और टीचर! मजाक नहीं, ये है झारखंड के एक गांव की सच्ची कहानी
Jharkhand Billi Village: हमारे देश में कई जगहें ऐसी हैं, जो किसी न किसी अजीबोगरीब वजह के चलते सुर्खियों में रहती हैं। आज हम आपको ऐसी जगह के बारे में बताएंगे, जहां 'बिल्ली' के बच्चे खेलते हैं खाते-पीते हैं और स्कूल भी जाते हैं। जी हां! ये एक ऐसी कहानी है, जिसे सुनकर आप भी अचंभित हो जाएंगे।
'बिल्ली' के बच्चे जाते हैं स्कूल
बिल्ली के बच्चे भला स्कूल कैसे जा सकते हैं, डॉक्टर, इंजीनियर बनने का सपना कैसे पाल सकते हैं? ये बात गले से नीचे उतरने वाली कतई नहीं है। अगर आप भी इस सोच में पड़ गए तो चलिये आपको बताते हैं इस 'बिल्ली' के पीछे की कहानी आखिर है क्या।

क्या है 'बिल्ली' के पीछे की कहानी?
आपने कई ऐसे गांव या फिर मुहल्लों के बारे में सुना होगा, जो किसी न किसी वजह से चर्चा में रहते हैं। फिर चाहे इनके अजीबोगरीब रीति-रिवाज हों या फिर यहां के लोग। मगर एक गांव ऐसा है, जो अपने अजीबोगरीब नाम की वजह से छाया हुआ है। इस गांव का नाम ऐसा है, जिसे सुनकर किसी को भी शर्म आ जाए। सोचिये यहां के निवासी लोगों को कैसे बताते होंगे कि वे कहां रहते हैं।
आखिर क्यों शर्मिंदा होते हैं लोग?
कई बार कुछ चीजों से आप जुड़े होते हैं तो ये शर्मिंदगी की वजह भी बन जाती है। ऐसा ही कुछ इस गांव के लोगों के साथ भी है। स्कूल कॉलेज हों या फिर कोई सरकारी कार्यालय, यहां के लोगों को अपने गांव का नाम बताने में काफी शर्म आती है। आखिर इस गांव का ऐसा भी क्या नाम है, चलिये जानते हैं...
हैरान कर देगी वजह
ये गांव झारखंड के देवघर जिले में स्थित है। मधुपुर प्रखंड की गौनेया पंचायत में ये गांव है, जिसका नाम है बिल्ली। जी हां! बिल्ली। एक जानवर के नाम पर इस गांव का नाम पड़ा है, जो अपने आप में काफी हैरान करने वाला है। मगर ये सच है। इस गांव का नाम सुनते ही किसी की भी हंसी छूट जाए। ऐसे में जाहिर है इस गांव के लोगों का यहां का नाम बताने में शर्म आ जाना।
ग्रामीण लोगों का उड़ता है मजाक
इस गांव का जब जब जिक्र होता है, लोगों के लिए अपनी हंसी रोक पाना काफी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण लोगों को यहां का नाम बताने में बेहद शर्मिंदगी होती है। लोग यहां का मजाक उड़ाने लगते हैं। चलिये जानते हैं इस गांव का नाम बिल्ली कैसे पड़ा। कोई मजेदार ही वजह रही होगी जो इस गांव का ये नाम पड़ गया।
क्या है बिल्ली का दिलचस्प इतिहास
ग्रामीण लोग बताते हैं कि पास के गांव में पूजा चल रही थी। यज्ञ हो रहा था। तभी मंच से लड़के का परिचय मजाकिया अंदाज में कर दिया गया। कोई लड़ाई झगड़ा नहीं हुआ मगर लोग जमकर हंसी के ठहाके लगाने लगे। बता दें कि इस गांव की आबादी काफी कम ही है। कुल मिलाकर यहां 1200 लोग रहते हैं। कई समुदाय के लोग यहां मिलजुलकर रहते हैं।
गांव के लोगों ने लिया ये फैसला
गांव के लोगों का कहना है कि पुराने समय से ही इस गांव का ये नाम पड़ा हुआ है। पूर्वजों के समय से ही ये चला आ रहा है। मगर लोगों ने ये फैसला लिया है कि इस गांव का नाम अब बदला जाए। इस गांव का नाम अब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखने की योजना बनाई जा रही है। ऐसे में देखना ये होगा कि बिल्ली नाम से उबरने में लोगों को कितना समय लगता है।












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