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German climate protestors का 9.09 अरब रुपये की पेंटिंग पर हमला, 12 घंटे में 70 लाख प्लस व्यूज, देखें VIDEO

German climate protestors पर्यावरण बचाने का संकल्प लेकर निकले हैं। प्रदर्शनकारियों ने Monet painting पर आलू का पेस्ट और टमाटर सूप फेंक कर विरोध जताया। Germany climate protestors monet painting potatotes tomatos

German climate protestors पर्यावरण बचाने का संकल्प लेकर निकले हैं। युवाओं का आक्रोश सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो रहा है। युवाओं ने पेंटिंग पर आलू का पेस्ट और टमाटर से बना सूप फेंक कर अनोखे अंदाज में अपना विरोध जताया। इनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से होता है कि ट्विटर पर इनकी वीडियो को 12 घंटे से भी कम समय में सात मिलियन से अधिक यानी 70 लाख प्लस व्यूज मिल चुके हैं। भारतीय करेंसी में पेंटिंग की कीमत लगभग 9.09 अरब रुपये (110 मिलियन USD) होती है।

क्लाउड मोनेट की प्रसिद्ध पेंटिंग पर अटैक

क्लाउड मोनेट की प्रसिद्ध पेंटिंग पर अटैक

जर्मनी के पोस्टडैम में क्लाउड मोनेट की प्रसिद्ध पेंटिंग को प्रदर्शनकारियों ने निशाना बनाया। जलवायु परिवर्तन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों ने मोनेट के लेस म्यूल्स पेंटिंग पर मैश किए हुए आलू और टोमैटो सूप फेंके। ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

लड़कियों ने लंदन में फेंका, अब जर्मनी में विरोध

लड़कियों ने लंदन में फेंका, अब जर्मनी में विरोध

जर्मनी के संग्रहालय बारबेरिनी में घुसे जलवायु परिवर्तन से आक्रोशित प्रदर्शनकारियों का Claude Monet की पेंटिंग पर आलू-टमाटर फेंकने का वीडियो इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि लंदन में दो लड़कियों ने कुछ दिनों पहले प्रसिद्ध चित्रकार वैन गॉग की 'सनफ्लावर' पेंटिंग पर टमाटर का सूप फेंका था।

काले कपड़े और नारंगी रंग के जैकेट में विरोध

काले कपड़े और नारंगी रंग के जैकेट में विरोध

लंदन में दो लड़कियों ने 'सनफ्लावर' पेंटिंग पर टमाटर का सूप फेंका, उसके ठीक नौ दिन बाद German Climate Protesters ने Claude Monet की पेंटिंग को निशाना बनाया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों को काले कपड़े और नारंगी रंग के जैकेट में देखा गया।

जलवायु तबाही के बारे में मात्र एक चेतावनी

जलवायु तबाही के बारे में मात्र एक चेतावनी

जर्मनी के संग्रहालय बारबेरिनी में दीवार पर लगी तस्वीर पर मोनेट के 'लेस मेउल्स' पेंटिंग पर मैश किए हुए आलू और टोमैटो सूप फेंकते देखा जा सकता है। प्रदर्शनकारी जर्मन पर्यावरण समूह 'लेट्ज़टे जेनरेशन' से संबंधित हैं। उन्होंने यह कहकर अपनी कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश की कि उनका स्टंट आने वाले जलवायु तबाही के बारे में मात्र एक चेतावनी है।

2050 में परिवार के भरण पोषण पर सवाल

2050 में परिवार के भरण पोषण पर सवाल

वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों को यह कहते हुए सुना जा सकता है, "लोग भूखे मर रहे हैं, लोग मर रहे हैं। हम जलवायु से जुड़ी आपदा का सामना कर रहे हैं। आप किसी पेंटिंग पर टमाटर के सूप या मसले हुए आलू फेंकने से डरते हैं ? क्या आप जानते हैं कि मुझे किससे डर लगता है ? मुझे डर है क्योंकि विज्ञान हमें बताता है कि हम 2050 में हम अपने परिवार का भरण पोषण नहीं कर पाएंगे।"

नीचे देखें वीडियो---

110.07 मिलियन अमरीकी डालर की पेंटिंग

जर्मन प्रदर्शनकारियों ने सवाल किया, क्या आपको पेंटिंग पर मैश किए हुए आलू फेंकने पर ही क्लाइमेट चेंज का चैलेंज समझ में आएगा ? अगर हमें खाने के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़े तो यह पेंटिंग भी किसी भी चीज के लायक नहीं। आखिरकार आप कब सुनना शुरू करेंगे और हमेशा की तरह व्यापार बंद करेंगे ? लेट्ज़े जेनरेशन ने अपने ट्विटर हैंडल (@AufstandLastGen) पर वीडियो शेयर किया और लिखा, न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, मोनेट की 'लेस म्यूल्स' 2019 में न्यूयॉर्क में एक नीलामी में लगभग 110.07 मिलियन अमरीकी डालर में बेची गई थी। भारतीय करेंसी में पेंटिंग की कीमत लगभग 9.09 अरब रुपये होती है।

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