सजावटी सामान समझ कपल ने खरीदी अर्धनग्न मूर्ति, 20 साल बाद जो हुआ उसने कर दिया हैरान
लंदन, 19 मार्च: कई लोगों को पुरानी और एतिहासिक चीजों से अपने घर को सजाने का शौक होता है। कई पैसे वाले लोग पुराने मास्टरपीस को खरीदने के लिए लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर देते हैं। कई बार पुरानी चीजों के शौकीन लोग ऐसी कलाकृतियां भी ले आते हैं, जिनके बारे में उन्हें जानकारी तक नहीं होती है, बस सुंदर और यूनिक दिखने के चक्कर में खरीद लेते हैं। जब उनकी असलियत पता चलती है, तो सभी चौंक जाते हैं। ब्रिटेन में एक कपल के साथ भी ऐसा ही हुआ है।

20 साल पहले अपने गार्डेन को सजाने के लिए मूर्ति खरीदी
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन के एक कपल ने करीब 20 साल पहले अपने गार्डेन को सजाने के लिए सफेद संगमरमर की एक मूर्ति खरीदी थी। जिसमें एक महिला पत्थर पर सिर रख अर्धनग्न अवस्था में लेटी हुई नजर आ रही है। कपल ने इस मूर्ति का एक नीलामी में करीब 5 लाख रुपए में खरीदा था। कई सालों तक ये उनके गार्डन में लगी रही। जब लोग उस मूर्ति को देखते तो इसे एक महान कलाकार का मास्टरपीस बताते।

सच जानकर रह गए हैरान
उस मूर्ति को लेकर लगातार अफवाहें फैलने लगी। इसके बाद उस कपल ने इसकी जांच कराने की सोची। जब एक्सपर्ट ने उस मूर्ति की जांच की तो पता चला कि, यह 200 साल पुराना एक मास्टर पीस है। महान इटालियन नियो क्लासिकल आर्टिस्ट एंटोनियो कैनोवा ने 18वीं शताब्दी में बनाया था। बताया जा रहा है कि, ये उनका सबसे अंतिम बनाया हुआ मास्टरपीस था। जो कई सालों से लापता था।

ये है दुनिया के सबसे महान मूर्तिकार का अंतिम मास्टरपीस
जांच कर रहे एक्सपर्ट्स ने इस मास्टरपीस की कीमत करीब 75 करोड़ रुपए बताई है। ये लेटी हुई मूर्ति मैरी मैगडेलिन की है। जो ईसा मसीह की अनुयायी थीं। पूर्व ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर लॉर्ड लिवरपूल ने इसे सबसे पहले साल 1819 में कमिशन किया था। तब उन्होंने इस मूर्ति के लिए 1,200 गिनी आज के समय में 110,000 पाउंड चुकाए थे। यह इतालवी मास्टर के अंतिम कार्यों में से एक था। 6 फीट लंबी संगमरमर की मूर्ति लॉर्ड लिवरपूल के परिवार द्वारा उनकी मृत्यु के 20 साल बेच दी थी।

मूर्ति का इतिहास जान रह जाएंगे हैरान
यह एक आलीशान घर में रखी हुई थी, तभी उस घर में आग लग गई। जिसके बाद इसे खराब अवस्था में पश्चिम लंदन के केंसिंग्टन में एक विलक्षण महिला उद्यमी के बगीचे में लगी दिया गया। 1960 के दशक में इस बेच दिया गया। कई बार इस मूर्ति को गुमनाम लोगों के यहां बेचा गया। धीरे-धीरे इस मूर्ति को लेकर अफवाहें फैलने लगी। ऐसा कहा जाने लगा कि, ये कैनोवा की बन हुई मूर्ति है। जिसके बाद इसकी जांच की गई तो असलियत सामने आई। जिसके बाद इस मूर्ति को उसके असली रूप में लाने के लिए आठ महीनों तक लाखों रुपए खर्च किए गए। अब मूर्ति अपनी सही अवस्था में है।
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