छत्तीसगढ़ के जंगल मे बंधक हैं दो वन भैंसे, हाईकोर्ट ने जताई चिंता,सरकार को किया तलब
बिलासपुर,12 जनवरी। छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु और संरक्षित पशु वन भैसों को नियम विरुद्ध बंधक बनाकर रखने का मामला सामने आया है। दरसअल एक याचिका के जरिये यह बात सामने आई है कि छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु वनभैंसा के संरक्षित पशुओं की श्रेणी में आने के बाद वन विभाग की ओर से असम से 2 वन भैसों को लाया गया था। जिसे याचिका में वापस असम भेजने की मांग की गई है। दायर की गई जनहित याचिका में सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश अरूप कुमार गोस्वामी और जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की युगल पीठ ने केंद्र शासन, छत्तीसगढ़ शासन और असम सरकार को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है।

वनभैसों को गैरकानूनी तरीके से बंधक बनाया गया
मामले के याचिकाकर्ता नितिन सिंघवी की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि भारत सरकार ने पांच मादा, एक नर भैंसा को असम के मानस नेशनल पार्क से पकड़ कर छत्तीसगढ़ के बारनवापारा अभ्यारण के जंगल में पुनर्वासित करने की अनुमति दी थी। अप्रैल 2020 में मानस नेशनल पार्क असम से छत्तीसगढ़ वन विभाग ने एक मादा वन भैंसा और एक नर वन भैंसा को छत्तीसगढ़ के बारनवापारा अभ्यारण के बाड़ों में रखा है, जो की नियमों के खिलाफ है। दरसअल छत्तीसगढ़ के वन विभाग की योजना के मुताबिक वन भैंसों को बाड़े में रखकर उनसे प्रजनन कराया जाना था। वनभैसों की ब्रीडिंग के बाद उनके बच्चे भी हुए, लेकिन उसके बाद भी उन्हें अभ्यारण्य में खुला नही छोड़ा गया।

प्रजनन के बाद जंगल में छोड़ना जरुरी
नितिन सिंघवी ने बताया कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 12 के मुताबिक शेड्यूल एक के वन्य प्राणी को ट्रांसलोकेट करने के बाद वापस जंगल में छोड़ा जाना जरूरी है, जबकि छत्तीसगढ़ वन विभाग ने इन्हें बाड़े मे कैद कर रखा है। यहाँ तक वन भैसों से पैदा हुए बच्चों को भी जंगल में नहीं छोड़ा जा रहा है। यानि कि बाड़े में ही संख्या बढ़ाई जाएगी। छत्तीसगढ़ वन विभाग ने होशियारी से वन में वापस वनभैसों को छोड़ने के नाम से अनुमती ली और उन्हें प्रजनन के नाम से बंधक बना रखा है जो कि वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत अपराध है। बंधक बनाये रखने के कारण कुछ समय में वन भैसे अपना स्वाभिक गुण खोने लगते है। वन विभाग ने असम से चार और वन भैसों को लाने की अनुमति ले रखी है।

बाकि वन भैंसों को छत्तीसगढ़ लाने की अनुमति रद्द करने की मांग
असम से जिस मानक नेशनल पार्क से वन भैंसे लाए गए हैं, वह एक टाइगर रिजर्व है यानि एनटीसीए की अनुमति जरूरी थी। एनटीसीए की तकनीकी समिति ने असम के वन भैसों को छत्तीसगढ़ के बारनवापारा में पुनर्वासित करने के पहले इकोलॉजिकल सूटेबिलिटी रिपोर्ट मंगवाई थी। जिससे यह पता लगाया जा सके कि असम के वन भैंसें छत्तीसगढ़ में रह सकते हैं कि नहीं। लेकिन छत्तीसगढ़ वन विभाग ने बिना इकोलॉजिकल सूटेबिलिटी अध्यन कराये और एनटीसीए को रिपोर्ट किये बिना ही वन भैसों को बारनवापारा लाया। याचिकाकर्ता ने दोनों वन भैसों को वापस असम भेजने की मांग समेत बाकी के 4 वन भैसों को छत्तीसगढ़ लाने की अनुमति रद्द करने की मांग करने के साथ ही दोषी अधिकारियों पर भी कार्यवाही की मांग की है।
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