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बिना सबूत पति पर शक करना है क्रूरता ! पढ़िए कोर्ट का फैसला

बिलासपुर, 22 मार्च। अगर कोई पत्नी बिना किसी आधार के अपने पति पर चरित्रहीनता के आरोप लगाती है, उसे क्रूरता माना जायेगा। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पारिवारिक विवाद के संबंध में एक महत्त्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि इसे क्रूरता माना जायेगा।

HUSBAND WIFE

दरअसल 6 अप्रैल 2003 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के खैरागढ़ में रहने वाले बीएस मेश्राम का विवाह खैरागढ़ की ही एक महिला से हुआ था। लड़की ने शादी के बाद से अपने ससुराल से अलग रहने की मांग की। बीएस मेश्राम के मुताबिक पत्नी के दबाव में आकर पति ने पत्नी के साथ किराये के मकान में रहना शुरू कर दिया, लेकिन शादी के बाद महिला का रुख सहयोगात्मक नहीं रहा। वह कभी भी घर के किसी काम में रूचि नहीं लेती थी, इस वजह से घर के सारे काम पति को ही करने पड़ रहे थे। मिली जानकारी के मुताबिक महिला ना तो अपने बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देती थी, ना किसी अन्य काम में सहयोग करती थी।

बीएस मेश्राम के मुताबिक उसकी पत्नी हमेशा उसपर चरित्र हीनता का आरोप लगाकर मुकदमा करने की धमकी देती थी। कोर्ट को बताया गया कि पति इस मामले से परेशान हो चुका था, जब वह पत्नी की शारीरिक और मानसिक क्रूरता से परेशान हो गया, तब उसने अपनी पत्नी से अलग रहने के लिए अलग ठिकाना ढूंढ लिया और दोनों बच्चों की परवरिश करने लगा। इस दौरान लगातार पत्नी को समझाने के बावजूद वह नहीं समझी और अलग ही रहती रही।

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इस मामले में आगे बढ़ते हुए पति ने हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के तहत फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई। जिसपर 11 मई 2018 को क्रूरता और परित्याग को आधार मानते हुए कोर्ट ने डिक्री मंजूर की थी। बीएस मेश्राम के पक्ष में आये फैसले को उनकी पत्नी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उसने कोर्ट से कहा की वह पति और बच्चों के बिना किराये के मकान में अकेले रहती है, जबकि उसके पति ने अपना खुद का घर बनवा लिया है।

HC

कोर्ट में प्रतिपरीक्षण में पाया कि पत्नी बिना किसी ठोस वजह के पति से 8 सालों से अलग रहती है। पत्नी अपने पति के खिलाफ लगाए चरित्रहीनता के आरोपों को भी अदालत में साबित नहीं कर सकी। मामले में सुनवाई करते जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस दीपक कुमार तिवारी की डबल बेंच ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पति-पत्नी के बीच अलगाव काफी लम्बी अवधि तक रहा है, लिहाजा उनके आपसी संबंधों में सुधार की संभावना कम है।

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