Bihar News: कौन हैं गरिमा मलिक जिन्होंने संभाली पटना IG की कमान, जनिए कैसा रहा है सफर
Bihar IPS Transfer News: चुनावी मौसम में अधिकारियों के तबादले का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। इसी क्रम में बिहार में लोकसभा चुनाव से पहले पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल किया गया है। बिहार में विभिन्न बैच के 10 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है।
बिहार में हुए तबादलों के तहत राजधानी पटना में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इसी क्रम में आईपीएस गरिमा मलिक पटना आईजी की ज़िम्मेदारी दी गई है। पटना की नई आईजी के बारे में ज्यादातर लोग जानने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए आज हम आपको गरिमा मलिक की जीवनी बताने जा रहे हैं।

गरिमा मलिक बिहार कैडर की 2006 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं, इससे पहले वह पटना की 55वीं एसएसपी की ज़िम्मेदारी भी निभा चुकी हैं। वह पटना की दूसरी महिला एसएसपी भी थी। गरिमा, साल 2015 में पटना की ग्रामीण एसपी की भी ज़िम्मेदारी निभा चुकी हैं।
पटना ग्रामीण से से उनका ट्रांसफर बतौर एसएसपी पटना हुआ था। पटना एसएसपी की ज़िम्मेदारी निभाने से पहले उन्होंने गया और दरभंगा में बतौर एसएसपी ज़िम्मेदारी भी निभाई हैं। पटना ग्रामीण एसपी की ज़िम्मेदारी निभाते हुए गरिमा मलिक का कार्यकाल काफी अच्छा रहा था।
पटना के एसएसपी मनु महाराज का बतौर DIG प्रमोशन होने के बाद, पटना एसएसपी की रेस में कई नाम (मुजफ्फरपुर एसएसपी मनोज कुमार, मोतिहारी एसपी उपेंद्र शर्मा और बेतिया एसपी जयंत कांत) था। गरिमा पटना ग्रामीण की एसपी थी, इसके साथ ही दो ज़िलों में एसएसपी की ज़िम्मेदारी निभा चूकी थीं। इसलिए उन्हें ही पटना एसएसपी की जिम्मेदारी दी गई थी।
IPS गरिमा मलिक का ताल्लुक हरियाणा के फरीदाबाद से है। साल 2005 में उन्होंने अपने पहले ही अटेम्प्ट में UPSC में कामयाबी हासिल की थी। अच्छी रैंक हासलिक करने के बाद भी वह IAS नहीं बन पाई क्योंकि जेनरल कोटे से थी। इसलिए उन्होंने दूसरी तरजीह आईपीएस को दी और उन्हें बिहार कैडर मिला। अपने कार्यकाल में उन्होंने बिहार में लेडी सिंघम की तौर पर पहचान बनाई।
गया जिला में हुए आदित्य सचदेव मर्डर केस में गरिमा मलिक ने अहम भूमिका निभाई थी। 7 मई, 2016 को गया ज़िले में हुए रोड रेज केस 'आदित्य सचदेव मर्डर मामा' हाई-प्रोफाइल केस था। इस केस में सत्तारूढ़ दल की एमएलसी मनोरमा देवी का बेटा रॉकी यादव मुख्य आरोपी रॉकी यादव था।
आईपीएस गरिमा ने बहुत ही सराहनीय तरीक़े से मामले को हैंडल किया था। आरोपी के पिता बिंदी यादव के अपराध के चिट्ठे पहले से ही पुलिस की फाइलों में दर्ज थे। सत्ता रुढ़ दल में होने की वजह से जांच को आरोपी पक्ष प्रभावित नहीं कर सके इसलिए गरिमा मलिक ने आरोपी (रॉकी) के पिता को हिरासत में लिया था। केस में आरोपियों की पकड़ ढीली पड़ती चली गई।
आईपीएस गरिमा मलिक ने रॉकी (आरोपी) की मां मनोरमा देवी पर दवाब बनाना शुरू किया और इसके बाद रॉकी यादव को एक फॉर्महाउस से काबू कर लिया। गरिमा ने काम तो काफी सराहनीय किए, उनके लिए एक ही दाग लगा वह था, साल 2011 में फारबिसगंज में हिंसक भीड़ पर पुलिस द्वारा फायरिंग।
ग्रामीण सड़क निर्माण की मांग कर रहे थे, पुलिस ने काबू करने के लिए भीड़ पर फ़ायरिंग कर दी थी। इस मामले में सीएम नीतीश कुमार ने संज्ञान लिया और न्यायिक जांच के आदेश दिए। वही IPS गरिमा मलिक पर भी आंच आई। अररिया से तबादला करते हुए दरभंगा भेज दिया गया। यह कांड ही उनके कैरियर पर एक धब्बे के तौर पर देखा जाता है।












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