'Waqf Bill और मुर्शीदाबाद हिंसा', युवाओं ने बताया कौन ज़िम्मेदार?, कहा- शरबत भी हुई सियासत की शिकार
Waqf Bill Bihar News: वक्फ बिल को लेकर देश भर में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। आरोप प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। वहीं हिंसा भड़कने की भी ख़बर देखने को मिली है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा पर लोगों का क्या कहना है, हिंसा का ज़िम्मेदार किसे मानते हैं।
वन इंडिया हिंदी ने इन सवालों पर लोगों की राय जानी। युवाओं ने कहा कि वक्फ अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के कारण 8, 11 और 12 अप्रैल को हिंसा भड़की थी। राज्य सरकार ने उपद्रव के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है और पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा की है।

पुलिस ने हिंसा से संबंधित 60 एफआईआर दर्ज की हैं और लगभग 315 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन घटनाओं की आगे की जांच के लिए राज्य सरकार ने 11 सदस्यों वाली एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है।
अमरेश कुमार ने कहा कि मोदी सरकार मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह का बिल लेकर आती है। ताकि लोग धर्म के नाम पर बंटे रहे और सरकार से रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मुद्दे पर सवाल नहीं उठाया जा सके। ये कभी अग्नीवीर लाते हैं तो, कभी CAA, NRC और तीन तलाक में उलझाते हैं।
मैं हिंदू होकर भी वक्फ बिल के विरोध में हूं क्योंकि इससे मुस्लिम भाइयों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। देश में अशांति फैल रही है, एक भाई दूसरे भाई से लड़ रहा है। सरकार को तो चाहिए कि वैसा काम करें जिससे देश की जनता खुश रहे और समाज में शांति बहाल हो। लेकिन भाजपा सरकार सिर्फ नफ़रत की सियासत को बढ़ावा दे रही है।
अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी कैसर रेहान ने कहा कि वक्फ बिल तो बहुत बड़ा मुद्दा है, यहां तो शरबत में भी नफरत ढूंढ लिया जा रहा है। रामदेव ने अपने उत्पाद को बेचने के लिए "शरबत जिहाद" का नाम दे दिया। रूह अफ़ज़ा होने वाले मुनाफे से धर्म विशेष को फायदा मिलता है। इसलिए उनके (रामदेव) के प्रोडक्ट ख़रीदें।
पतंजलि उत्पादों की बिक्री के लिए धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि खाड़ी देशों में अपने उत्पाद के निर्यात के लिए हलाल प्रमाणपत्र दिखा रहे हैं। इससे ही लोगों को यह समझ जाना चाहिए कि बाबा सिर्फ धर्म के नाम पर बेवकूफ बनाकर अपनी रोटी सेक रहे हैं। यह नफरत को बढ़ावा दे रहे हैं।
सोनू फरनाज़ ने कहा कि सरकार के पास और भी कई मुद्दे हैं,अगर उस पर काम किया जाए तो देश से भुखमरी, बेरोज़गारी, अशिक्षा जैसे गंभीर मुद्दे ख़त्म हो जाएगा। देश में मोहब्बत की नींव पड़ेगी और नफरती माहौल ख़त्म होगा। सरकार इन मुद्दों पर ध्यान देने लग जाएगी तो फिर उनकी सियासत ख़तरे में पड़ जाएगी। इसलिए ऐसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं, जिसमें धर्म के नाम पर लोगों को लड़ाया जा सके।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 8 अप्रैल को वक्फ अधिनियम के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए जंगीपुर में 8,000 से 10,000 लोगों की भीड़ जमा हुई थी। हालांकि, जब उन्होंने एक राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया और पुलिस के साथ झड़प की तो तनाव बढ़ गया। घातक हथियारों से लैस होकर, उन्होंने उन्हें तितर-बितर करने का प्रयास करने वाले अधिकारियों पर हमला किया।
11 अप्रैल को शुक्रवार की नमाज के असमाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिशी की। पुलिस ने हस्तक्षेप किया तो भीड़ ने पथराव किया और बाद में आस-पास की दुकानों और घरों में तोड़फोड़ की। अपनी पहचान छिपाने के लिए दंगाइयों ने सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए। धर्म के ठेकेदार और राजनेता दो भाइयों को बांटकर लड़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
भीड़ जुटाकर हिंसा भड़काने में सोशल मीडिया की भूमिका रही है। सोशल मीडिया पर अफवाह और भ्रामक ख़बरे ज़्यादा फ़ैलाई गईं। बंगाल पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने 1,500 से ज़्यादा सोशल मीडिया यूज़र्स की पहचान की है, जिन पर फ़ेसबुक, एक्स (पहले ट्विटर), यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लैटफ़ॉर्म के ज़रिए अशांति भड़काने का संदेह है।












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