तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को अब मिलेगा 25,000 रु गुजारा भत्ता
पटना। अब बिहार की तलाकशुदा अल्पसंख्यक महिलाओं को 10,000 नहीं बल्कि 25000 रुपये महीना गुजारा भत्ता सरकार देगी। इस बात की जानकारी बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में दी।

10 हजार से बढ़ाकर 25 हजार
उन्होंने कहा कि पहली बार तलाकशुदा महिलाओं को गुजारा भत्ता देने की शुरुआत 2005 में की गई थी जिस वक्त बिहार में एनडीए गठबंधन की सरकार थी। अब दोबारा बिहार में एनडीए गठबंधन की सरकार आने के बाद इस कानून में संशोधन कर तलाकशुदा महिलाओं की गुजारा भत्ता की राशि बढ़ा दी गई है अब उन्हें 10,000 की जगह 25000 रुपये मिलेंगे।

अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रवृति
सुशील मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत सरकारी स्कूलों की भांति मदरसे से 10वीं व 12वीं की परीक्षा अंकों में उत्तीर्ण करने वाले छात्रों को भी छात्रवृत्ति देने के साथ-साथ पुरस्कृत किया जाएगा। मान्यता प्राप्त मदरसों में कक्ष, पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, कम्प्यूटर आदि के लिए राज्य सरकार के द्वारा सहायता राशि भी दी जाएगी।

तीन तलाक पर उप मुख्यमंत्री ने कहा
अल्पसंख्यक मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 22 अगस्त को एक साथ तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध करार दिया गया था।संसद के आगामी सत्र में भारत सरकार की ओर से तीन तलाक और तलाकशुदा महिलाओं के भरण-पोषण के लिए आने वाले संभावित बिल का देश के राजनीतिक दलों में मुस्लिम समाज के प्रगतिशील लोगों को समर्थन करना चाहिए।

शाह बानो केस
आपको बताते चलें कि आज से 21 साल पहले 1986 में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा तलाकशुदा महिलाओं को गुजारा भत्ता देने का निर्णय लिया गया था। पहली बार सुप्रीम कोर्ट के द्वारा शाह बानो मामले में इस तरह का फैसला सुनाया गया लेकिन उस वक्त देश में राजीव गांधी की सरकार चल रही थी जिन्होंने इस कानून में संशोधन कर मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं को उससे वंचित कर दिया था।












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