लालू के 'लाल' तेजप्रताप बुरी तरह फंसे! ₹3.6 लाख का बिल बकाया, 3 साल से VIP छूट, क्या कटेगा कनेक्शन?
Tej Pratap Yadav Electricity Bill Due: आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव एक नए विवाद में घिर गए हैं। उनके पटना स्थित बेउर के निजी आवास पर तीन साल से अधिक समय से बिजली बिल बकाया है, जिसकी राशि ₹3.6 लाख तक पहुंच गई है।
बिजली कंपनी के नियमों के अनुसार, ₹25,000 से अधिक बिल बकाया होने पर कनेक्शन काट दिया जाता है, लेकिन तीन साल से बिल जमा न होने के बावजूद उनके कनेक्शन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस विशेष छूट और लापरवाही ने बिजली विभाग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

निजी आवास पर तीन साल का भारी बकाया
लालू यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव के पटना (Patna) स्थित बेउर निजी आवास पर बिजली कंपनी का ₹3.6 लाख से अधिक का बिल बकाया है। यह बकाया जुलाई 2022 के बाद से जमा नहीं किया गया है, जिसका मतलब है कि तीन साल से अधिक समय से भुगतान रुका हुआ है। बिजली कंपनी के रिकॉर्ड के अनुसार, बकाया राशि ₹3,24,974 है, जिसमें ₹23,681 का जुर्माना (Fine) भी शामिल है। यह भारी बकाया आरजेडी नेता के लिए एक नई विवादित स्थिति खड़ी कर रहा है।
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नियमों का उल्लंघन का आरोप
सबसे बड़ा सवाल यह है कि कंपनी के नियमों का उल्लंघन क्यों किया गया। बिजली कंपनी के नियमानुसार, पोस्टपेड कनेक्शन पर ₹25,000 से अधिक बकाया होने पर कनेक्शन काट दिया जाता है। तेज प्रताप यादव के कनेक्शन पर ₹3.6 लाख बकाया होने के बावजूद, तीन साल तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह स्थिति बिजली विभाग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सीधे सवाल उठाती है कि एक वीआईपी उपभोक्ता को नियम तोड़ने की विशेष छूट क्यों दी गई, जबकि आम जनता का कनेक्शन तुरंत काट दिया जाता है।
पोस्टपेड मीटर की 'विशेष व्यवस्था'
यह विवाद तब और गहरा जाता है जब यह सामने आता है कि पूरे बिहार में बड़े बकाए से बचने के लिए उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने पर जोर दिया गया था। इसके बावजूद, तेज प्रताप यादव के बेउर आवास पर अभी भी पोस्टपेड मीटर ही लगा है, जो जुलाई 2012 में जारी किया गया था। यह सवाल उठता है कि क्या यह जानबूझकर की गई विशेष व्यवस्था थी या विभाग की घोर लापरवाही। इस वीआईपी कनेक्शन को प्रीपेड योजना में क्यों नहीं बदला गया, इस पर बिजली विभाग को स्पष्टीकरण देना चाहिए।
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विवादित स्थिति और राजनीतिक सवाल
हालिया विधानसभा चुनाव में आरजेडी की हार के बाद तेज प्रताप यादव के सामने यह नया विवाद खड़ा हो गया है। ₹3.6 लाख का भारी-भरकम बकाया और उस पर कार्रवाई न होना, न केवल बिजली विभाग की निष्पक्षता पर संदेह पैदा करता है, बल्कि सरकारी नियमों के उल्लंघन में सत्ताधारी वर्ग को मिली विशेष छूट को भी उजागर करता है। अब देखना यह है कि इस विवाद के सामने आने के बाद बिजली कंपनी इस मामले पर क्या जवाबदेही तय करती है और कार्रवाई करती है।












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