Success Story: पिता बेचते थे तंबाकू, कई किलोमीटर चलते थे पैदल, इस तरह अधिकारी बने निरंजन
कौन हैं वो निरंजन कुमार जिनके पिता तंबाकू बेचते थे और बेटे ने यूपीएससी क्रैक कर पिता का नाम रोशन कर दिया। वन इंडिया हिंदी से खास बातचीत में निंरजन कुमार ने अपनी कामयाबी के राज़ बताए।
पटना, 21 जून 2022। यूपीएससी के नतीजे घोषित होने के बाद कई अभ्यर्थियों के कामयाबी की कहानी सुर्खियां बनने लगती है। इस बार भी यूपीएससी के नतीजे घोषित होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने उम्मीद से ज्यादा हासिल कर जिला समेत पूरे राज्य को गौरवांवित किया है। इसी कड़ी में इन दिनों 2021 यूपीएससी में कामयाबी हासिल करने वाले निरंजन कुमार का किस्सा काफ़ी सुर्खियां में है। आईए जानते हैं कि कौन हैं वो निरंजन कुमार जिनके पिता तंबाकू बेचते थे और बेटे ने यूपीएससी क्रैक कर पिता का नाम रोशन कर दिया। वन इंडिया हिंदी से खास बातचीत में निंरजन कुमार ने अपनी कामयाबी के राज़ बताए।

सुर्खियों में रहा निरंजन कुमार का नाम
2021 के यूपीएससी नतीजे में बिहार के बेटों ने अपने राज्य का परचम लहराया था। जिसमें टॉप 10 की लिस्ट में बिहार के तीन अभ्यर्थियों का नाम शामिल था। इनमें सबसे ऊपर बिहार के टॉपर शुभम कुमार का नाम था जो कि बिहार के कटिहार जिले से ताल्लुक रखते हैं। वहीं 7वें नम्बर पर जमुई के चकाई से ताल्लुक रखने वाले प्रवीण कुमार का नाम था। इसके साथ ही 10वें नम्बर समस्तीपुर के रहने वाले सत्म गांधी का नाम था। इन सब टॉपर्स की कहानी के बीच एक नाम नवादा के रहने वाले निरंजन कुमार का भी सुर्खियों में था। क्योंकि निरंजन ने 2017 में यूपीएसी परीक्षा में 728 रैंक हासिल की थी। इसके बाद भी उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखी और इस बार (यूपीएससी 2021) में उन्हें 535वीं रैंक हासिल हुई।

कड़ी मेहनत के बाद मिली कामयाबी
निरंजन कुमार की कामयाबी के पीछे काफ़ी मशक्कत भरी कहानी है, उन्होंने इस मुकाम को पाने के लिए बहुत ही संघर्ष किया है। पकरीबरमा गांव (नवादा) से ताल्लुक रखने वाले निरंजन कुमार यूपीएससी की राह तो चुनी थी लेकिन उनका सफर आसान नही था क्योंकि उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। उनके पिता छोटी सी खैनी दुकान चलाते हुए पूरे परिवार की ज़िदगी गुजर-बसर कर रहे थे। चार बच्चों के पढ़ाई का ख़र्च उठा पाना काफ़ी मुश्किल था। इन सब चुनौतियों के बाद भी निरंजन ने हार नहीं मानी और ना ही अपने परिवार का साथ छोड़ा। अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने सपने को साकार किया।

काफ़ी तंगी में गुजर रही थी ज़िंदगी
वन इंडिया हिंदी से मुखातिब होते हुए निरंजन कुमार ने बताया कि वह ख़ुद के खर्च के लिए के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया करते थे और कई किलोमीटर तक पैदल चलकर कोचिंग भी गए। इस तरह से उन्होंने अपनी यूपीएससी की तैयारी की। निरंजन ने बताया कि 12वीं के बाद आईआईटी के लिए उनका सेलेक्शन हुआ तो परिवार को कुछ उम्मीदें जगी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई मुकम्मल करने के बाद कोल इंडिया में नौकरी भी मिल गई। नौकरी मिलने के बाद शादी हुई। इन सब के बावजूद निरंजन का ख्वाब यूपीएससी क्रैक करने का था। इस बाबत उन्होंने फिर से यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।

2016 में भी क्रैक किया था यूपीएससी
निरंजन ने अपने हौसले की उड़ान भरी और 2016 में उन्होंने यूपीएससी क्रैक कर लिया। हालांकि रैंक के मुताबिक उनका आईआरएस के लिए चयन हुआ। अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए निरंजन ने कहा कि उनके पिता की छोटी सी तंबाकु की दुकान थी। पिता जी की ग़ैरमौजूदगी मैने खैनी भी बेचा। उन्होंने बताया कि छोटी सी तंबाकु की दुकान होने की वजह से पिता जी के लिए पढ़ाई का ख़र्च उठाना मुश्किल था।

कामयाब लोगों की फहरिश्त में शुमार हैं निरंजन
निंरजन कुमार ने अपनी मेहनत के बल पर नवोदय विद्यालय में दाखिला लिया और अच्छी शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने बताया कि मैट्रिक पास करने के बाद पटना से इंटर की पढ़ाई की। घर की माली हालत अच्छी नहीं होने की वजह से पटना में रहना आसान नहीं था। इसलिए बच्चों को पढ़ाया और कभी हार नही मानी। इसका नतीजा है कि आज वह कामयाब लोगों की फहरिस्त में शुमार किए जा रहे हैं। मौजूदा समय में वह दिल्ली में डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्यरत हैं।
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