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Shreyasi Singh NDA Cabinet: PM मोदी के 'MY समीकरण' में श्रेयसी सिंह फिट! क्या मिलेगी NDA कैबिनेट में जगह?

Shreyasi Singh New NDA Cabinet: नीतीश कुमार की नई कैबिनेट में जमुई की विधायक और स्टार शूटर श्रेयसी सिंह को मंत्री पद मिलने की संभावनाएं तेजी से मजबूत होती दिख रही हैं। 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतने वाली और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी श्रेयसी लगातार दूसरी बार BJP से जीत चुकी हैं, जिससे उनकी कैबिनेट में एंट्री लगभग तय मानी जा रही है।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नए MY समीकरण का ज़िक्र किया था-जहां M का मतलब महिला और Y का मतलब युवा से जोड़ा था। पीएम मोदी के इस समीकरण में श्रेयसी सिंह बिल्कुल फिट भी बैठती हैं।

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ऐसे में नई NDA कैबिनेट में श्रेयसी सिंह की एंट्री की अटकलें तेज हो गई है। खेल के मैदान से लेकर राजनीतिक गलियारों तक, उन्होंने हर मोर्चे पर अपने 'सटीक निशाने' से खास पहचान बनाई है।

RJD पर बड़ी बढ़त से दर्ज की जीत

भारत निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, श्रेयसी सिंह RJD प्रत्याशी मोहम्मद शमशाद आलम से 38,346 हजार वोटों से धमाकेदार जीत हासिल की है। इस सीट पर त्रिकोणिय मुकाबला था जिसनमें राजद की ओर से शमशाद आलम और अनिल प्रसाद साह (जन सुराज) की ओर से मैदान में थे। हालांकि, जमुई की जनता ने एक बार फिर श्रेयसी पर भरोसा जताया है।

2020 में भी बनाई थी धमाकेदार लीड

पिछला चुनाव भी श्रेयसी के लिए खास रहा था। 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने RJD के पूर्व मंत्री विजय प्रकाश को 41,049 वोटों के विशाल अंतर से हराकर सबको चौंका दिया था। 2020 में श्रेयसी को मिले थे 79,603 वोट मिले थे और वहीं RJD के विजय प्रकाश को 38,554 मत मिले थे। लगातार दो चुनावों में इतना बड़ा अंतर बताता है कि जमुई में श्रेयसी का जनाधार न सिर्फ बरकरार है, बल्कि मजबूत होता जा रहा है।

जमुई सीट क्यों रहती है हर पार्टी की नजर?

राजनीतिक तौर पर जमुई विधानसभा सीट हमेशा से अहम रही है। 1957 में पहली बार यह सीट अस्तित्व में आई और तब से अब तक यहां 17 बार चुनाव हो चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि हर दशक में यहां सत्ता का समीकरण बदलता रहा है।

शुरुआती साल में कांग्रेस ने पांच बार जीत हासिल की। 1957 में CPI ने यहां अपनी एकमात्र ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इसके बाद समाजवादी, जनता पार्टी, जनता दल, जदयू और RJD ने भी इस सीट पर कब्जा जमाया। यानी जमुई का राजनीतिक स्वभाव हमेशा से परिवर्तनशील रहा है-लेकिन पिछले दो चुनाव बताते हैं कि अब यहाँ BJP और खासकर श्रेयसी की पकड़ मजबूत हो चुकी है।

क्या श्रेयसी बनाएंगी हैट्रिक की तैयारी?

श्रेयसी सिंह दूसरी बार विधायक बन चुकी हैं। सवाल अब सिर्फ इतना है-क्या आने वाले सालों में वे जमुई की राजनीति को नई दिशा दे पाएंगी? राजनीति के जानकार बताते हैं कि श्रेयसी की लोकप्रियता सिर्फ खेल उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका सीधा और साफ-सुथरा प्रशासनिक स्टाइल, युवाओं व महिलाओं में उनकी मजबूत पहचान और स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ उन्हें लगातार बढ़त दिला रही है। जवाब साफ लगता है-श्रेयसी सिंह। लेकिन आखिरी नतीजे आने तक जमुई की चुनावी लड़ाई अपना रोमांच बनाए रखेगी।

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