'बिहार में बहार है', बारिश में कर रहे हैं घूमने का प्लान, 7 दिनों में ज़रूर घूमें ये 7 जगह

बरसात के दिनों में भी घूमने के कई लोग शौकीन होते हैं, लेकिन बारिश की वजह से ज्यादा दूर जाने की हिम्मत नहीं करते हैं। बिहार वासियों के लिए 7 ऐसी जगह के बारें में बताने जा रहे हैं जिन्हें 7 दिनों में घूमने का लुत्फ़....

पटना, 3 सितंबर 2022। बरसात के दिनों में भी घूमने के कई लोग शौकीन होते हैं, लेकिन बारिश की वजह से ज्यादा दूर जाने की हिम्मत नहीं करते हैं। बिहार वासियों के लिए 7 ऐसी जगह के बारें में बताने जा रहे हैं जिन्हें 7 दिनों में घूमने का लुत्फ़ उठा सकते हैं। बिहार पर्यटन के ऐतबार से भी विकसित हो चुका है, दूर-दूर से लोग यहां घूमने आ रहे हैं। आप अगर बिहार राज्य के ही रहने वाले हैं तो इन जगहों पर एक बार आपको घूमने ज़रूर जाना चाहिए। बिहार में प्राचीन वास्तु कला लोगों पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। बिहार के विभिन्न जगहों पर घूम कर आप भी कहेंगे की वाक़ई 'बिहार में बहार' है।

कभी मगध की राजधानी थी राजगीर

कभी मगध की राजधानी थी राजगीर

बिहार में आप राजगीर घूमने जा सकते हैं, कभी मगध की राजधानी राजगीर थी। प्राचीन हिंदू महाकाव्य महाभारत में भी राजगीर का ज़िक्र है। जब राजगीर मगध की राजधानी थी तो उस वक्त यहा राजा जरासंध का शासन करते थे। जानकारों की मानें तो यह जगह 3 हज़ार साल पुरानी है। प्राचीन बौद्ध और जैन शास्त्रों में भी यहां का जिक्र है। भौगोलिक ऐतबार से दो भागों में यह शहर बंटा हुआ है। एक भाग पुराना गढ़वाली शहर कहलाता है, ये सात पहाड़ियों से घिरी घाटी में मौजूद है। वहीं भाग (नया शहर) बिंबिसार के बेटे अजातशत्रु ने स्थापित किया था। यहां आप जब घूमने जाएंगे तो कई ऐतिहासिक चीज़ें आपको देखने को मिलेंगी। यहां के गुफ़ा में एक स्वर्ण भंडार है जिसका रहस्य आज भी अनसुलझी पहेली है।

सूफी सर्किट का नज़ारा लिया किया आपने ?

सूफी सर्किट का नज़ारा लिया किया आपने ?

बिहार में सूफी संतो से जुड़े कई ऐतिहासिक स्थल है, जहां आज भी सूफीवाद परंपरा जारी है। जानकारों की मानें तो रहस्यवादी सूफी के रहने के लिए सूफी सर्किट बनाया गया था। बिहार में पर्यटकों के सूफी सर्किट आकर्षण का केंद्र है। विदेशों से भी लोग बिहार के सूफी सर्किट घूमने आते हैं। बिहार में सूफीवाद के बाद ही सूफी संतों और उपदेशकों की मस्जिदें और खानकाह बनवाई गई थी जिसे शिक्षा केंद्रों में तब्दील कर दिया गया। हज़रत अताउल्लाह की मस्जिद फुलवारी शरीफ में है यह मुगल सम्राट अकबर के काल की एक शिलालेख है। इस्लामी धर्मशास्त्र की तालीम के छात्र आज भी यहां के मदरसे पढ़ते हैं। बिहार के खास सूफी सर्किट में मनेरशरीफ, अमझरशरीफ और बिहारशरीफ शामिल है। इसके अलाव और भी कई मदरसे और मस्जिद सूफ़ीवाद का सबूत पेश करते हैं।

महावीर ने यहां बिताई थीं 14 मॉनसून ऋतुएं

महावीर ने यहां बिताई थीं 14 मॉनसून ऋतुएं

नालंदा जिला ऐतिहासिक तौर पर दुनिया की सबसे पुरानी रेसिडेंशियल यूनिवर्सिटी के लिए मशहूर है। बिहार के इस जिले में कई ऐतिहासिक धरोहर प्राचीन काल की सभ्यता को आज भी दर्शाता है। नालंदा यूनिवर्सिटी घूमने पर आप समृद्ध पाल और गुप्त काल को नजदीक से जान पाएंगे। यहां कई मशहूर जैन तीर्थकर का नज़ारा आपको दिखेगा। जानकार बताते हैं कि 14 मॉनसून ऋतुएं महावीर ने यहां पर बिताई थीं। नांलदा विश्वविद्यालय के ज्यादातर हिस्से खंडहर हो चुके हैं लेकिन इसके बावजूद अगर इतिहास पर रिसर्च में दिलचस्पी रखते हैं तो यहां का दीदार करना बेकरा नहीं होगा।

विश्व धरोहरों में शामिल है महाबोधी विहार

विश्व धरोहरों में शामिल है महाबोधी विहार

बोध गया महाबोधी मंदिर (महाबोधी विहार) के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर है। इसकी सबसे खास वजह यह है कि यूनेस्को ने महाबोधी विहार को विश्व धरोहरों में शामिल किया है। जानकार बताते हैं कि यह वही जगह है जहां ईसा पूर्व 6वी शताब्दी में गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था। इसे मुख्य विहार के नाम से भी जाना जाता है। सम्राट अशोक के ज़रिए स्थादपित स्तूप के तरह ही इस विहार की बनावट है। यहां गौतम बुद्ध की एक बड़ी मूर्त्ति भी स्थादपित है। यह मूर्त्ति ठीक उसी जगह पर स्थापित की गई है जहां पर गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

153 प्रजातियों के जलीय जीव का करें दीदार

153 प्रजातियों के जलीय जीव का करें दीदार

बिहार के भागलपुर जिले में मौजूद विक्रमशिला डॉल्फिन सेंचुरी गंगा नदी से 60 किलोमीटर की दूरी पर है। सुल्तानगंज से कहलगांव तक इस सेंचुरी का दायरा है। डॉल्फिन की वजह से सेंचुरी काफी मशहूर है, यहां पर सून नाम की डॉल्फ़िन काफी देखने को मिलती है। पर्यटकों के आकर्षण इस सेंचुरी में इस लिए भी है क्योंकि यहां मीठे पानी के कछुओं के साथ कई तरह के जलीय जीव का नज़ारा एक साथ देखा जा सकता है। यहां करीब 153 प्रजातियों के जलीय जीव देखने को मिल जाते हैं।

वैशाली जिला भी पर्यटन के ऐतबार से महत्वपूर्ण

वैशाली जिला भी पर्यटन के ऐतबार से महत्वपूर्ण

पर्यटन के ऐतबार से बिहार का वैशाली जिला भी काफी मशहूर है, इसकी सबसे बड़ी वजह आखिरी जैन तीर्थंकर भगवान महावीर की यह जन्मस्थली है। यहां का नज़ारा लेने पर आपको यह महसूस होगा कि आप अपने अतीत में घूम रहे हैं। गौरतलब है कि वैशाली जिले का ज़िक्र ह्वेन त्सांग और फाह्यान जैसे कई चीनी पर्यटकों की ट्रैवल बुक में भी है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म ईसा से 599 वर्ष पहले हुआ था। वैशाली गणराज्य के कुण्डग्राम में अयोध्या इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय परिवार से ताल्लुक रखने वाले महावीर ने तीस साल की आयु उम्र मे ही परिवार मोह त्याग दिया था। विदेशी पर्यटक भगवान महावीर से जुड़ी चीज़ों की जानकारी के लिए वैशाली ज़िला का रुख ज़रूर करते हैं।

भगवान राम और देवी सीता के जीवन से बिहार जुड़ाव

भगवान राम और देवी सीता के जीवन से बिहार जुड़ाव

बिहार में आप रामायण सर्किट का भी नज़ारा ज़रूर लें, जानकार बताते हैं कि भगवान राम और देवी सीता के जीवन से बिहार जुड़ा हुआ है। रामायण महाकाव्य में किए गए ज़िक्र में बिहार के कई जगहों का नाम शुमर है। जो हिंदु समुदाय के लोगों के लिए पवित्र स्थल है। ग़ौरतलब है कि दूसरे समुदाय के लोग भी काफी आस्था के साथ इन पवित्र स्थलों का दीदार करने जाते हैं। आप रामायण सर्किट में उन मंदिरों का नज़ारा ले पाएंगे जहां आप राम और सीता की कहानियों से रूबरू हो पाएंगे । रामायण सर्किट में चंकी गढ़, राम-जानकी मंदिर और अहिल्या अस्थान का नाम सबसे ऊपर है। यहां का नज़ारा भी आप ज़रूर लें।

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