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बिहार विधानसभा में 'खैनी निंजा टेक्नीक' का वीडियो वायरल, जानिए डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर विपक्ष क्यों हमलावर

Samrat Chaudhary News: बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य की विधानसभा के बजट सत्र के दौरान उप मुख्यमंत्री और भाजपा नेता सम्राट चौधरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे सदन में कुछ रगड़कर मुंह में डालते नजर आ रहे हैं। विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने इसे 'खैनी खाने की निंजा तकनीक' बताकर शेयर किया है, जबकि सम्राट चौधरी के समर्थकों का कहना है कि यह मात्र 'लौंग' या कोई अन्य चीज हो सकती है।

इस वीडियो ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, और सोशल मीडिया पर मीम्स और बहस छिड़ गई है। क्या यह सदन की मर्यादा का उल्लंघन है, या विपक्ष की राजनीतिक चाल? आइए विस्तार से जानते हैं।

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क्या हुआ सदन में?

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कैमरे में कैद हुए इस क्लिप में सम्राट चौधरी अपनी सीट पर बैठे हुए कुछ पदार्थ को हथेली पर रगड़ते दिख रहे हैं, फिर उसे मुंह में डाल लेते हैं। आरजेडी के आधिकारिक एक्स हैंडल ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन दिया: "80 चुटकी 90 ताल रगड़के... मुंह में डाल। ये है बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी। सदन में खैनी खाने की निंजा तकनीक!" वीडियो में सम्राट चौधरी नीले कुर्ते में नजर आ रहे हैं, और पृष्ठभूमि में अन्य विधायक बहस में व्यस्त दिखते हैं।

यह वीडियो विधानसभा की आधिकारिक कैमरे से रिकॉर्ड किया गया लगता है, जो बाद में सोशल मीडिया पर लीक हो गया। फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, क्लिप में चौधरी किसी पदार्थ को हथेली पर रगड़कर मुंह में डालते हैं, जिसे सोशल मीडिया यूजर्स और विपक्ष ने 'खैनी' (चबाने वाला तंबाकू) बताया है। इंस्टाग्राम और थ्रेड्स पर भी यह वीडियो तेजी से फैल रहा है, जहां यूजर्स इसे 'शर्मनाक' बता रहे हैं।

खैनी बिहार में एक आम नशा है, जो चूने के साथ तंबाकू को रगड़कर खाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह कैंसर और अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है। लेकिन सदन में इस तरह का व्यवहार क्या उचित है? विधानसभा के नियमों के तहत, सदन में खाने-पीने या नशीले पदार्थों का सेवन प्रतिबंधित है, क्योंकि इसे लोकतंत्र का मंदिर माना जाता है।

विपक्ष का हमला

आरजेडी ने इस वीडियो को भाजपा-जदयू गठबंधन पर हमले का हथियार बना लिया है। पार्टी ने कहा कि जब उप मुख्यमंत्री खुद सदन में 'खैनी' खा रहे हैं, तो राज्य में नशा मुक्ति कैसे होगी? आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने एक्स पर रीपोस्ट करते हुए लिखा, "नीतीश कुमार की सरकार में डिप्टी सीएम खैनी चबा रहे हैं, और जनता को शराबबंदी का पाठ पढ़ाया जा रहा है।" विपक्ष का आरोप है कि यह घटना बिहार की राजनीति में गिरते स्तर को दिखाती है।

सोशल मीडिया पर आरजेडी समर्थकों ने मीम्स बनाए, जैसे "खैनी खाओ, मस्त हो जाओ" का इस्तेमाल कर सम्राट चौधरी को ट्रोल किया। एक यूजर ने लिखा, "खुद खैनी खाकर बिहार की जनता को चूना लगा रहे हैं।" वहीं, कुछ ने इसे कुशवाहा समाज का अपमान बताया, क्योंकि सम्राट चौधरी इसी समुदाय से हैं।

BJP का बचाव

भाजपा ने इस वीडियो को विपक्ष की साजिश बताकर खारिज किया है। सम्राट चौधरी के करीबी सूत्रों का कहना है कि यह खैनी नहीं, बल्कि 'लौंग' या कोई आयुर्वेदिक चीज थी, जो पाचन के लिए ली जाती है। भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा, "यह विपक्ष की हताशा है। सम्राट जी बिहार के विकास पर फोकस कर रहे हैं, और आरजेडी पुरानी राजनीति कर रही है।"

समर्थकों ने सोशल मीडिया पर काउंटर किया। एक एक्स यूजर ने लिखा, "डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी खैनी खाते थे, इसमें नया क्या है?" वहीं, कुछ ने वीडियो को एडिटेड बताया, क्योंकि पैकेट स्पष्ट नहीं दिख रहा। भाजपा का तर्क है कि सदन में ऐसी छोटी घटनाएं होती रहती हैं, और इसे बड़ा मुद्दा बनाना गलत है।

सम्राट चौधरी कौन हैं?

सम्राट चौधरी बिहार भाजपा के प्रमुख नेता हैं, जो कुशवाहा समुदाय से आते हैं। वे नीतीश कुमार सरकार में उप मुख्यमंत्री हैं और गृह, वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभालते हैं। पहले आरजेडी में थे, लेकिन 2022 में भाजपा में शामिल हो गए। उनकी छवि एक सख्त नेता की है, लेकिन यह वीडियो उनकी इमेज को नुकसान पहुंचा सकता है। बिहार में शराबबंदी लागू है, लेकिन खैनी जैसी चीजें आम हैं।

सदन में विवादों का इतिहास

यह पहला मौका नहीं है जब सदन में ऐसी घटना हुई। 2018 में एक सांसद को संसद में गुटखा खाते पकड़ा गया था। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में 26 करोड़ लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, और बिहार में यह आंकड़ा ऊंचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नेताओं को ऐसी आदतों से बचना चाहिए, क्योंकि वे रोल मॉडल हैं।

क्या होगा आगे?

यह वीडियो बिहार की राजनीति को प्रभावित कर सकता है, खासकर आगामी चुनावों में। आरजेडी इसे मुद्दा बनाकर भाजपा पर हमला कर सकती है, जबकि भाजपा इसे नजरअंदाज करने की कोशिश करेगी। जनता अब सवाल पूछ रही है-क्या सदन में मर्यादा बरकरार रहेगी? या यह मात्र राजनीतिक खेल है? विधानसभा स्पीकर से इस पर जांच की मांग हो रही है।

बिहार की जनता विकास चाहती है, न कि ऐसे विवाद। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सोशल मीडिया कैसे छोटी घटनाओं को बड़ा मुद्दा बना सकता है।

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