Bihar Chunav: कौन हैं तेजस्वी के सहयोगी आई.पी. गुप्ता? यादवों को दी गाली, कहा- 'लाठी मारे तो दांत काट लो'
IP Gupta Controversial Statement: बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के प्रत्याशी आई.पी. गुप्ता (इंडियन इंक्लूसिव पार्टी) ने एक बेहद विवादित बयान देकर सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। सहरसा सीट से आरजेडी के कोटे पर चुनाव लड़ रहे गुप्ता ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अगर यादव समुदाय का कोई व्यक्ति लाठी मारे, तो उसके गले में दांत फंसाकर गला काट लो।
उन्होंने इस भड़काऊ टिप्पणी में राजपूत, भूमिहार, कुर्मी और कोईरी समुदायों को भी शामिल किया। तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले गठबंधन के एक उम्मीदवार द्वारा दिया गया यह बयान, सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, न केवल कानूनी और राजनीतिक विवाद खड़ा कर रहा है, बल्कि चुनाव से पहले ही महागठबंधन की एकता और सामाजिक समीकरणों पर भी गंभीर सवाल उठा रहा है।

आई.पी. गुप्ता ने क्या कहा?
IP Gupta ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि, 'अगर यादव एक लाठी मारे, राजपूत, भूमिहार, कुर्मी, कोईरी जो भी जात तुमको मारता है, क्योंकि तुम मार खाते हो। जब तक मार खाते हो, तब तक मार खाते रहोगे। तब तक तुमको सभी दबंग जाति मारता रहेगा। अगर एक लाठी मारे, अगर लाठी नहीं है, लाठी नहीं मार सकते हो तो तुम उसके गर्दन में अपना दांत फंसा दो।'
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Bihar Chunav: कौन हैं आई.पी. गुप्ता?
आई.पी. गुप्ता बिहार की राजनीति में एक उभरता हुआ चेहरा हैं, जो मुख्य रूप से तांती, ततवा, पान और चौपाल जैसे जाति समूहों के बीच अपना प्रभाव रखते हैं। वह इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (IIP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और साथ ही अखिल भारतीय पान महासंघ नामक अपने जाति आधारित संगठन का नेतृत्व करते हैं। गुप्ता ने हाल ही में अपने समाज के लिए आरक्षण और पहचान की लड़ाई को केंद्र में रखकर, बिहार की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाई है। हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में, उनकी पार्टी महागठबंधन (RJD के नेतृत्व वाला) का हिस्सा बनी है और वह स्वयं सहरसा सीट से गठबंधन के प्रत्याशी हैं।
सौ से अधिक सीटों पर है प्रभाव
राजनीतिक गलियारों में यह माना जाता है कि आई.पी. गुप्ता का प्रभाव केवल सहरसा तक सीमित नहीं है। उनका अखिल भारतीय पान महासंघ कोसी और मिथिलांचल के सौ से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखता है। हालाँकि तांती-ततवा समुदाय की आबादी राज्य में करीब दो फीसदी ही है, लेकिन चुनावी विश्लेषकों का स्पष्ट मत है कि सीटों के सीमान्त अंतर वाले इस चुनाव में यह छोटा, किंतु संगठित वोटबैंक कई सीटों पर हार-जीत में निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि महागठबंधन ने इस महत्वपूर्ण जातीय आधार को साधने के लिए गुप्ता पर दांव लगाया है।
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