Bihar Chunav: पशुपति पारस पर Chirag Paswan का तंज, 'अब चाचा को साइडलाइन होने का दर्द समझ आएगा'
Bihar Chunav: बिहार चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज है। इसी बीच लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अपने चाचा और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) प्रमुख पशुपति कुमार पारस पर तीखा तंज कसा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पारस हाल ही में महागठबंधन में शामिल होने का फैसला किया था। हालांकि, सीट बंटवारे में सम्मानजनक हिस्सेदारी न मिलने से नाराज होकर उन्होंने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चिराग पासवान ने चाचा पर तंज कसा है। उन्होंने कहा, 'अब चाचा को मेरा दर्द समझ में आ रहा होगा। जब किसी गठबंधन में किनारे कर दिया जाता है, तो कैसा महसूस होता है।' दरअसल रामविलास पासवान की मृत्यु के बाद पासवान परिवार में विवाद हुआ था और उस दौरान पार्टी टूट गई थी। चिराग बिल्कुल अकेले रह गए थे, लेकिन फिर लोकसभा चुनाव 2024 के साथ उन्होंने शानदार वापसी की।

Chirag Paswan ने कसा अपने चाचा पर तंज
चिराग पासवान ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव को याद करते हुए कहा कि उस वक्त लोजपा के भीतर विभाजन की स्थिति में एनडीए में बने रहना असंभव हो गया था। उन्होंने कहा, 'मैंने भी 2020 में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था। जब आपको गठबंधन में लगातार नज़रअंदाज़ किया जाता है, तो आपके पास यही एक रास्ता बचता है। अब चाचा को समझ आ रहा होगा कि मेरा दर्द क्या था।' बता दें कि पारस कम से कम 5 सीटें चाहते थे, लेकिन तेजस्वी यादव उन्हें सिर्फ एक सीट देने के लिए तैयार हुए। इसके बाद अलग होकर उन्होंने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।
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केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने यह भी खुलासा किया कि 2020 में उनके पास महागठबंधन में जाने का विकल्प था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति वफादारी के कारण मैंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए प्रधानमंत्री मोदी जी की छवि और उनके नेतृत्व में भरोसा सबसे ऊपर था, इसलिए मैंने अलग राह चुनी।'
Bihar Chunav में सीट शेयरिंग पर भारी बवाल
⦁ महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर घमासान आखिरी वक्त तक नहीं सुलझ सका और कई साझेदारों ने अपनी अलग राहें कर ली हैं।
⦁ 8 से 10 ऐसी सीटें हैं जहां महागठबंधन के घटक दलों ने अलग-अलग अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए हैं। इसका असर चुनाव नतीजों के बाद ही पता चलेगा, लेकिन इसने जमीन पर गठबंधन को कमजोर जरूर कर दिया है।
⦁ सीट शेयरिंग पर समझौता नहीं होने की वजह से 6 सीटों पर जेएमएम ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इन सीटों पर भी हेमंत सोरेन की पार्टी महागठबंधन उम्मीदवार के वोट काट सकती है।
⦁ एलजेपी ने भी अब अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। एलजेपी ने तेजस्वी यादव पर अनदेखी का भी आरोप लगाया है। कुल मिलाकर पहले महागठबंधन की दरार कार्यकर्ताओं और समर्थकों दोनों को ही भ्रमित कर रही है।
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