Ratan Tata Death- बिहार से ऐसा था रतन टाटा का रिश्ता!, इस ग्रुप ने बसाया देश का पहला नियोजित औद्योगिक शहर
Ratan Tata Bihar Connection: देश के नामचीन उद्योगपति रतन टाटा ने 9 अक्टबूर 2024 को दुनिया अलविदा कह दिया। 28 दिसंबर 1937 को मुंबई में जन्मे रतन टाटा का पूरा नाम रतन नवल टाटा है। उन्होंने बतौर टाटा समूह और टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में 1990 से 2012 तक काम किया।
अक्टूबर 2016 से फरवरी 2017 तक अंतरिम अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी निभाई। साल 2000 में उन्हें पद्म भूषण से नवाज़ा गया। वहीं साल 2008 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानिक री गया। बिहार से रतन टाटा का ख़ास कनेक्शन रहा है। रतन नवल टाटा को रतनजी टाटा (जमशेदजी टाटा के पुत्र, टाटा समूह के संस्थापक) ने गोद लिया था।

रतन टाटा, नवल टाटा और सूनी कमिसारीट के पुत्र थे। 10 साल की उम्र रतन टाटा अलग हो गए थे। जेएन पेटिट पारसी अनाथालय के ज़रिए उनकी दादी नवाजबाई टाटा ने उन्हें औपचारिक रूप से गोद लिया था। इसके बाद रतन टाटा की परवरिश उनके सौतेले भाई नोएल टाटा (नवल टाटा और सिमोन टाटा के बेटे) के साथ हुई। आइए जानते हैं बिहार से कैसे है, उनका ख़ास कनेक्शन।
26 अगस्त, 1907 को टाटा स्टील की स्थापना हुई थी। टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) के नाम से भी जाना जाता है। टाटा स्टील संस्थापक जमशेदजी नूसर्वानजी टाटा थे। टाटा स्टील की स्थापना बिहार के जमशेदपुर (अब झारखंड) में हुई थी, जिसे ख़ास तौर से इस्पात उद्योग के लिए ही बसाया गया था।
भारत के पहला नियोजित औद्योगिक शहर की संज्ञा जमशेदपुर को दी जाती है। टाटा समूह ने ही इस शहर को बसाया और जमशेदजी नूसर्वानजी टाटा का नाम रखा गया था। आपको बता दें कि टाटा स्टील भारत की पहली आधुनिक इस्पात कंपनी थी।
जमशेदजी नूसर्वानजी टाटा ने भारत में एक स्वदेशी इस्पात उद्योग का सपना देखा और उसे साकार किया। टाटा स्टील ने भारत के औद्योगिक विकास में एक अहम किरदार निभाया और आज की तारीख में टाटा स्टील एक वैश्विक स्तर की इस्पात कंपनी है। उस वक्त बिहार और झारखंड एक राज्य थे, इसलिए टाटा ग्रुप के इतिहास में बिहार से ख़ास कनेक्शन ही दर्ज है।
टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा मार्च 2021 में झारखंड दौरे पर आए थे, इस दौरान जमशेदपुर में आयोजित कई प्रोग्राम में भी हिस्सा लिया था। 2 मार्च 2021 को जमशेदपुर में नवल टाटा हॉकी अकादमी के नवनिर्मित भवन, IIT सेंटर और टाटा कंपनी के उद्घाटन कार्यक्रम में शिरकत की। 3 मार्च को टाटा समूह के स्थापना दिवस पर शामिल हुए थे। तबीयत नासाज़ होने की वजह से थोड़ा ही वक्त बिताया और वापिस लौट गए।












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